गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

आदिवासी सांसद फग्गन की घोषणा से भाजपा में गर्माई सियासत

फग्गन सिंह कुलस्ते 
 लंबे समय से अपनी उपेक्षा को लेकर हैं नाराज
भारतीय जनता पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई में बदलाव के साथ ही बगावती सुुर भी तेज होते देखे जा रहे हैं. आदिवासी सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने आज घोषणा कर दी कि वे आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, वह भी मंडला से. इसके बाद भाजपा में सरगर्मी तेज हुई जो अंतर्कलह के रुप में देखी जा रही है.
मध्यप्रदेश भाजपा में बुधवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का बदलाव हुआ. नंदकुमार सिंह चौहान को हटाकर राकेश सिंह को कमान सौंपी गई. इसके साथ ही भाजपा में बगावती सुर भी उठते नजर आ रहे हैं. मंडला से सांसद और आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते ने इसकी शुरुआत की है. कुलस्ते ने आज मोर्चा खोलते हुए संकेत दिए हैं कि वे अगला विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और वह भी मंडला विधानसभा क्षेत्र से. कुलस्ते ने यह भी स्पष्ट किया है कि  वे अपना प्रस्ताव पार्टी को भेज चुके हैं, इस पर फैसला पार्टी को करना है. यहां उल्लेखनीय है कि कुलस्ते लंबे समय से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करते आए हैं. एक बार तो उन्होंने नामांकन भरने तक की तैयारी कर ली थी, मगर उन्हें वरिष्ठ नेताओं ने समझाइश देकर शांत कर दिया था. इसके बाद मोदी सरकार में उन्हें कुछ समय के लिए मंत्री बनाया गया, मगर उसके बाद उनसे मंत्रिपद भी छीन लिया गया. तब से कुलस्ते अपने को उपेक्षित सा मान रहे हैं. इसके बाद वे प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर भी खफा हैं. कुलस्ते के इस बयान के बाद से भाजपा में सरगर्मी तेज हो गई है. कुछ नेताओं ने कुलस्ते से चर्चा भी की, मगर  उन्होंने इस मामले में अभी अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है.
कुलस्ते की नाराजगी को देख नवनियुक्त प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने उनसे चर्चा की. सिंह का कहना है कि कुलस्ते से उनकी चर्चा हुई है. उन्होंने कहा कि हम साथ मिलकर संगठन का काम करेंगे. वे फिलहाल भोपाल के बीएचईएल रेस्ट हाउस में रुके हैं. वे वहां पर बंगला एलाट न होने तक रुकेंगे. उन्होंने मुझ से कहा है कि वे मेरे साथ मिलकर काम करेंगे.
ब्राह्मणों की उपेक्षा, मुखर हुए डा. वाजपेयी
डा. हितेश वाजपेयी

प्रदेश में बढ़ रहे ब्राह्मणों के आक्रोश को लेकर नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष डा. हितेश वाजपेयी भी अब मुखर हुए हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी चिंता फेसबुक के जरिए जाहिर की है. उन्होंने लिखा है  ‘ब्राह्मण वर्सेस आल’, अचानक राजनीति का नया रंग लेते देख रहा हूं. ऐसा नहीं कि सवर्ण समाज आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियों से नहीं गुजर रहा है, पर कहीं न कहीं इस समाज के नागरिकों में असुरक्षा का भाव पैदा हो रहा है, जो ठीक नहीं है. उन्होंने लिखा है कि आज राजनीतिक माहौल में यह जरुरी है कि हम ब्राह्मणों को लेकर भी चलें, युवाओं को मार्गदर्शन दें. युवाओं की मदद करें, जिससे वे भटकावे में न आएं.
मंत्री भार्गव भी जता चुके हैं नाराजगी
गोपाल भार्गव 

डा. हितेष वाजपेयी के मुखर होने के पूर्व पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव भी आरक्षण के मुद्दे को लेकर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं. भार्गव ने परशुराम जयंती के अवसर पर नरसिंहपुर में आयोजित ब्राहण समाज के एक कार्यक्रम में कहा था कि जब 40 प्रतिशत वाले को 90 प्रतिशत वाले के ऊपर चढ़ा दिया जाएगा, तो यह प्रतिभा का नुकसान होगा. इससे देश पिछड़ जाएगी. यह कहीं ब्राह्मणों के साथ अन्याय न हो जाए. यह मजाक प्रतिभा के साथ हो रहा है. ईश्वर प्रदत्त व्यवस्था के साथ हो रहा है. उन्होंने कहा था कि हर पार्टी ब्राह्मण से वोट तो चाहती है, मगर उसे कुछ देना नहीं चाहती.कमोबेश ऐसा सभी जातियों के साथ हो रहा है. हालांकि बाद में भार्गव ने इसे लेकर स्पष्टीकरण दिया था कि मेरे वक्तव्य को राजनीतिक कारणों से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. मैं आरक्षण व्यवस्था का समर्थक हूं.

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