विश्व हिन्दू परिषद अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अपने गृह नगर इंदौर आए जस्टिस वी एस कोकजे ने प्रदेश सरकार द्वार पांच बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होनें कहा कि मैं इन बाबाओं को संन्यासी नहीं मानता. ये लोग संन्यासी नहीं बल्कि पद की महत्वकान्क्षा रखने वाले लोग है. संन्यासी वो होता है जिसने अपना सर्वस्व न्यास को सौंप दिया हो, लेकिन ये लोग तो अब खुद के लिए टिकट मांगने लगे है.
जस्टिस कोकजे ने कहा कि जो संन्यासी पद ग्रहण करले वह संन्यासी कैसे हो सकता है. असली संन्यासी धर्म की रक्षा और समाज के जगारण के लिए जीता है. विहिप के इतिहास में पहली बार हुए चुनाव को लेकर उन्होने कहा कि विहिप में किसी पदाधिकारी को दो बार से ज्यादा एक पद पर नहीं रखा जाता. पूर्व अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया तीन बार से लगातार अध्यक्ष पद पर रहे.कोई व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं हो सकता. उन्हें समझाने का प्रयास किया गया लेकिन जब बात नहीं बनी तो चुनाव कराने पडे. उन्होनें यह भी स्पष्ट किया कि उनके अध्यक्ष बनने के बाद विहिप के एजेंडे में कोई बदलाव नहीं होने वाला. हमारी पहली प्राथमिक राम मनिदर निर्माण है. सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही हम मन्दिर निर्माण में जुट जाएगें.
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