शनिवार, 14 अप्रैल 2018

देश को समर नहीं समरसता की जरूरत

     राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि आज देश को समर नहीं समरसता की जरूरत है। उन्होने बाबा साहब के समरसता के संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का आव्हान किया। श्री कोविंद ने कहा कि बाबा साहब ने हमेशा शांति, करूणा और अंहिसा का रास्ता चुना। उन्होने नागरिकों से बाबा साहब के सपनों का भारत निर्माण करने में अपना योगदान देने का आव्हान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र की अखण्डता के संदर्भ में बाबा साहब कहते थे कि ष्वे पहले भारतीय हैं, बाद में भी भारतीय हैं और अंत में भी भारतीय हैं।
    राष्ट्रपति आज यहाँ बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जन्मस्थली महू में आयोजित 127वीं जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति ने अम्बेडकर जन्म भूमि स्मारक जाकर भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किया और अनुयायियों के बीच बैठकर भोजन ग्रहण किया।    राष्ट्रपति ने महू में हर साल अम्बेडकर महाकुंभ आयोजित करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार की सराहना की। श्री कोविंद ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर क जन्म स्थली महू नागरिकों के लिये प्रेरणास्त्रोत है। उन्होने कहा कि नई पीढ़ी को यह समझना होगा कि आधुनिक भारत के निर्माण की नींव बाबा साहब ने रखी थी। दामोदर वैली, हीराकुंड जैसे बांध और वृहद बिजली परियोजनाएं लागू करने जैसे बड़े कामों के पीछे बाबा साहब की प्रगतिशील सोच थी। उन्होने बाबा साहब का योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिलाया। मजदूरों के काम के घंटे बारह से घटाकर आठ किये। महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का अधिकार दिलाया। भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है।
कोविंद ने कहा कि बाबा साहब ने हमेशा भगवान बुद्ध के शांति और अंहिसा का मार्ग अपनाया। वे कहते थे कि जब विरोध के संवैधानिक उपकरण उपलब्ध हैं तो हिंसात्मक तरीकों की कोई जरूरत नहीं है। वे महान विधिवेत्ता, विद्वान और समाज सुधारक थे। उनके बनाये संविधान की शक्ति से प्रजातंत्र जीवंत हुआ। कमजोर, वंचित और पिछड़े लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिला, जिससे वे देश की प्रगति में योगदान देने में सक्षम बने हैं।  कोविंद ने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में अम्बेडकर जन्मस्थली महू में यह उनकी पहली यात्रा है। उल्लेखनीय है कि अम्बेडकर जयंती पर जन्मस्थली महू में पधारने वाले वे पहले राष्ट्रपति हैं।
    राष्ट्रपति ने कहा कि बाबा साहब ने जो संविधान दिया है, वह समानता का मूल अधिकार देता है। इसके बाद सबसे बड़ा अधिकार मतदान का अधिकार है जो लोकतंत्र का आधार है। वे कहते थे शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो। बाबा साहब एक असाधारण विद्यार्थी थे। उन्होंने कहा कि समझदारी के बिना शिक्षा अधूरी है। जब पहला मंत्रिमंडल बना तो डॉ. अम्बेडकर विधि मंत्री के रूप में शामिल हुये। वे उस समय मंत्रिमंडल के सदस्यों में सर्वाधिक डिग्री प्राप्त मंत्री थे। उन्होंने शिक्षा पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया। उनका जीवन युवाओं के लिये अत्यंत प्रेरणास्प्रद हैं।
    कोविंद ने बताया कि बाबा साहब ने मात्र 27 साल की उम्र में ष्स्माल होल्डिंग इन इंडिया एण्ड रेमेडीजष् शीर्षक से आलेख लिखकर स्वयं को उच्चकोटि का अर्थशास्त्री साबित कर दिया था। उन्होंने हमेशा अहिंसा और करूणा का मार्ग अपनाया। राष्ट्रपति ने कहा कि जय भीम बोलने का अर्थ है - बाबा साहब के बनाये संविधान का सम्मान करना, उनकी वैचारिक विरासत का सम्मान करना।

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