राजधानी भोपाल में नियमितिकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठे अतिथि विद्वानों ने नए साल पर कफन ओढ़कर विरोध जताया. उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांग पूरी नहीं करती, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अतिथि विद्वान अपनी मांगो को लेकर धरने पर बैठे हैं. कड़ाके की सर्दी में धरने में करीब 2 सौ अतिथि विद्वान समेत कई महिलाएं जो अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ इस धरने पर बैठी हैं. अतिथि विद्वान अपनी नियमितीकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं. अतिथि विद्वान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले यह धरना दे रहे हैं. हालांकि सरकार ने इन्हे वापस लौटने की अपील कर चुकी हैं. अपनी मांगो पर अड़े अतिथि विद्वानों नेमंगलवार की रात कफन ओढ़ कर नए साल मनाया.
अतिथि विद्वान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष डा. देवराज सिंह ने बताया सरकार की ओर से कोई संवेदनशील रुख नहीं अपनाया जा रहा. उन्होंने कहा की हम लगातार इस कड़ाके की ठंड में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार पर इस बात का कोई असर नहीं पड़ रहा हैं. डा. सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि तेज ठंड से यदि कोई अतिथि विद्वान को कुछ हो जाता है तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी. डा. सिंह कहा कि एक तरफ सरकार कहती रही कि किसी भी कालेज से किसी अतिथि विद्वान को निकाला नहीं जाएगा, लेकिन लोक सेवा आयोग के जरिए चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदभार संभालने पर करीब ढाई हजार अतिथि विद्वानों को निकाल दिया गया हैं. हम इसकी शियाकत कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से करेंगे.
सोनिया गांधी से करेंगे शिकायत
अतिथि विद्वानों ने इस बात पर भी फैसला किया है कि वे कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी शिकायत करेंगे, जिसमें वे बताएंगे कि किस तरह कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में अतिथि विद्वानों को नियमित करने की बात कही थी, लेकिन अब उन्हें नियमित करना तो दूर उन्हें कालेज से ही निकाल दिया गया हैं.
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