बुधवार, 22 अगस्त 2018

झूठी योजनाएं बनाकर गुमराह कर रहे शिवराज

कांग्रेस ने कहा नौकरशाहों के हस्तक्षेप को नहीं रोक पाई सरकार
प्रदेश कांग्रेस  की पोल खोल अभियान कमेटी के अध्यक्ष एवं मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह झूठी योजनाएं बनाकर और आश्वासन देकर प्रदेश के नागरिकों को गुमराह कर रही है. मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णयों का दस-दस साल तक पालन नहीं होता है. निर्णयों पर नौकरशाही के अनावश्यक दवाब और हस्तक्षेप को सरकार रोकने में अक्षम साबित हुई है. सुशासन के नारे की आड़ में यह एक चौपट राज का नमूना है.
गुप्ता ने आज पत्रकारों से चर्चा करते हुए आरोप लगाया है कि जिन शिक्षकों का सम्मान राष्ट्रपति और राज्यपाल ने किया अब उनका अपमान करने के लिए शिवराज सरकार तुली हुई है, इसी सरकार ने वर्ष 2011 में कैबीनेट में निर्णय लिया था कि राष्ट्रपति और राज्यपाल पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठापूर्ण सम्मान से नवाजे गये प्रदेश के शिक्षकों को आउट आफ टर्न प्रमोशन दिया जाएगा. ऐसे सहायक शिक्षकों को शिक्षक और शिक्षकों को माध्यमिक विद्यालय में प्रधान अध्यापक या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में व्याख्याता बनाया जाएगा. इस निर्णय का बकायदा वर्ष 2012 में राजपत्र में प्रकाशन भी हुआ.
यह निर्णय शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए लिया गया था, ताकि अन्य शिक्षक भी उनके व्यवहार और पढ़ाने के उनके हुनर से प्रेरित होकर  उसे अपने आचरण में उतार सकें.  गुप्ता ने कहा कि इस निर्णय की पोल तब खुली जब तत्कालीन शिक्षा मंत्री पारस जैन एवं वर्तमान शिक्षा मंत्री दीपक जोशी को नोटशीट पर यह कहना पड़ा कि नौकरशाही द्वेषपूर्ण तरीके से काम कर रही है जो शर्मनाक है. फिर भी राष्ट्रपति और राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को प्रमोशन का इंतजार करते करते छह-सात साल निकल गए और वे आज भी इंतजार ही कर रहे हैं. 
क्या वोट के लिए करते हैं मिथ्या घोषणाएं?
 गुप्ता ने कहा कि कांगे्रस शिवराज सिंह से पूछना चाहती है कि उन्होंने ऐसी मिथ्या घोषणाएं क्या तत्कालीन चुनाव में मात्र वोट कबाड़ने के लिए की थीं. यदि नहीं करना था तो फिर आउट आॅफ टर्न प्रमोशन देने का निर्णय ही क्यों लिया गया? यदि शिवराजसिंह की इस निर्णय के पीछे शुद्ध भावनाएं हैं और दृष्टि साफ है तो वे बताएं कब तक इन शिक्षकों को अपने प्रमोशन का इंतजार करना पड़ेगा? जबकि कई पात्र शिक्षक इंतजार करते-करते रिटायर भी हो चुके हैं. यदि उनकी नीयत साफ नहीं है तो इस आदेश को सरकार निरस्त क्यों नहीं कर देती? आउफ आॅफ टर्न प्रमोशन का निर्णय लेते समय सरकार ने ऊंची-ऊंची बातें की थीं कि इस तरह का निर्णय लेने वाला मध्यप्रदेश, देश मे पहला राज्य बन गया है. 

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