रविवार, 26 अगस्त 2018

मुख्यमंत्री की चिट्ठी पर मचा बवाल

शिवराजसिंह चौहान 
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा बहनों को लिखी एक करोड़ चिट्ठी पर बवाल मच गया है. चिट्ठी के विरोध में कांग्रेस ने इसका विरोध किया, वहीं पदोन्नति में आरक्षण का विरोध कर रहे संगठन सपाक्स ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सपाक्स ने 10 हजार पत्र वाट्स एप पर भेजकर भाईयों से आरक्षण व एट्रोसिटी एक्ट का विरोध करने की शपथ लेने को कहा है.
 मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में अपनी बहनों को करीब एक करोड़ चिट्ठियां भिजवार्इं हैं. बताया जा रहा है कि इस चिट्ठी की प्रिंटिंग से लेकर उसे भेजने तक पर चार करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की जा रही है. शिवराज की ओर  से महिलाओं को लिखी गई एक चिट्ठी करीबन चार रुपए 70 पैसे की पड़ रही है. बताया जा रहा है कि शिवराज सरकार की ओर से डाक विभाग को कहा गया है कि वह 26 अगस्त के आस-पास तक यह चिट्ठी महिलाओं के पास पहुंचा दें. इस चिट्ठी पर बवाल मचा है. कांग्रेस ने इसे चुनावी साल में वोट से प्रेरित बताया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि जो शिवराज सरकार पिछले 15 सालों में बहनों-भांजियों को प्रदेश में सुरक्षित माहौल नहीं दे पाई, महिला अत्याचार में मध्यप्रदेश देशभर में टाप पर खड़ा हो गया है और वो अब रक्षाबंधन जैसे पवित्र त्यौहार पर किस मुंह से बहनों से सुरक्षित व खुशनुमा माहौल के लिए पाच साल और मांग रहे हैं.
वहीं प्रदेश कांग्रेस की मीडिया प्रभारी पत्र में रक्षाबंधन पर्व की पवित्र सुगंध के स्थान पर राजनीति से प्रेरित वोटों की अपेक्षा किये जाने की बू आ रही है. एक सजग महिला होने के नाते मैं और मध्यप्रदेश की सभी बहनें यह विचार भी कर रही हैं कि हमें रक्षाबंधन के पावन पर्व को स्वार्थ पर्व बनाकर वोट के लिए गिड़गिड़ाने वाला भाई चाहिए या सुरक्षा कवच देने वाला?
सपाक्स ने भी लिखी बहनों को चिट्ठी
सपाक्स संगठन द्वारा लिखे पत्र में कहा है कि  सपाक्स समाज संस्था एवं संस्था की महिला ईकाई की ओर से स्नेह भरा अभिवादन. राजनीतिक दलों की वोट बैंक के लिए तुष्टिकरण व अवसरवादी राजनीति के कारण हमारे समाज की पहले से ही निरंतर उपेक्षा होती रही है जो आजकल चरम पर है जातिगत आरक्षण, पदोन्नति में आरक्षण व सरकारी नौकरियों में बैकलाग व्यवस्था से जहां एक ओर हमारे प्रतिभाशाली बच्चों को भी सरकारी नौकरी में आने से रोका जा रहा है वहीं दूसरी ओर दलितों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में न्यूनतम प्राप्तांको की अनिवार्यता समाप्त कर सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता नष्ट की जा रही है.सपाक्स की ओर से लिखे पत्र में कहा है कि प्रिय बहनों, दोगली राजनीति ने सामान्य पिछड़े व अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों से उनके मौलिक व मानवाधिकार छीन कर दोयम दर्जे का नागरिक मान लिया है. सरकार के लिए हमारी उपयोगिता हमारी कमाई में 30 प्रतिशत टैक्स 28 प्रतिशत  जीएसटी और 300-400 प्रतिशत मंहगा पेट्रोल डीजल पर कर वसूली तक ही सीमित रह गई है. पत्र में अनुरोध किया है कि अपने-अपने भाईयों की कलाई में राखी बांधते समय उनसे जातिगत आरक्षण और दलित उत्पीड़न एक्ट (एट्रोसिटी एक्ट )की मुसीबत से समाज को छुटकारा दिलाने की लड़ाई में आगे आने का वचन अवश्य लें.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें