मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए आदिवासी युवा जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) संगठन संकट बनता जा रहा है. भाजपा चाहकर भी इस संगठन को नहीं रोक पा रही है. पूरे प्रदेश में दो चरणों की यात्रा करने के बाद अब संगठन की यात्रा का अंतिम चरण राज्य के विंध्य अंचल में शुरु होने वाला है. इस यात्रा के समापन होने के अवसर पर यह संगठन प्रदेश में पहली बार 80 सीटों पर अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारने की अधिकारिक घोषणा भी करेगा. जयस आदिवासियों के हित के लिए प्रदेश में आदिवासियों को एकजुट करने का प्रयास कर रहा है.
मध्यप्रदेश में इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए आदिवासी वर्ग को साधना टेड़ी खीर हो गया है. भाजपा के लिए परेशानी खड़ी की है आदिवासी युवा शक्ति संगठन जयस ने. संगठन के प्रमुख एम्स के चिकित्सक डा. हीरालाल अलावा ने बीते पांच सालों में इस संगठन को जो मजबूती दी, वह आज राजनीतिक दलों को चिंता में डाल रही है. खासकर भाजपा के लिए यह बड़ा संगठन है. मालवा अंचल में पकड़ बनाने के बाद अब इस संगठन ने आदिवासियों का राजनीतिक नेतृत्व करने वाले दल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हाथ मिला लिया है. गोंगपा के प्रमुख हीरासिंह मरकाम और जय प्रमुख हीरालाल अलावा यह तय कर चुके हैं कि इस बार वे मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग की आरक्षित वर्ग की सभी 47 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे. इसके अलावा आदिवासियों के वोट से हार-जीत प्रभावित करने वाली 33 सीटों पर भी वे अपने प्रत्याशी उतारेंगे. इस तरह यह संगठन राज्य की कुल 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगा. संगठन ने साफ कर दिया है कि वह युवाओं को प्रत्याशी बनाएगा.
जयस और गोंगपा दोनों ही दल मिलकर अगर चुनाव मैदान में आते हैं तो भाजपा के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर देंगे. ये दोनों दल के मैदान में होने से भाजपा के पक्ष से आदिवासी मतदाता दूरी बना लेगा. वैसे आरएसएस द्वारा कराए गए सर्वे में इस बात का खुलासा हो चुका है कि राज्य में आदिवासी वर्ग भाजपा के पक्ष से दूरी बना रहा है. इस लिहाज से संघ ने पहले ही भाजपा को आदिवासी मतदाता के प्रभाव वाली सीटों पर सक्रिय कर दिया था. मगर जब से मालवा में जयस ने हुंकार भरी है, तब से भाजपा की चिंता और बढ़ गई है.
जयस का खासा प्रभाव मालवा अंचल में है, तो उसके साथ चुनाव मैदान में उतरने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का अपना प्रभाव महाकौशल के अलावा विंध्य में है. विंध्य अंचल भाजपा की कमजोरी बना हुआ है. इस अंचल की कई विधानसभा सीटों पर बहुजन समाजवादी पार्टी का प्रभाव है, तो कुछ पर सपा का भी असर है. वहीं कांग्रेस का अपना प्रभाव यहां पर है. इसके चलते भाजपा के लिए इस अंचल में बड़ी मुसीबत पैदा हो सकती है. वैसे जयस की अब 23 अगस्त से निकलने वाली यात्रा विंध्य अंचल में होगी. इस यात्रा में जयस यहां पर अपना प्रभाव बनाने का पूरा प्रयास कर रही है.
मध्यप्रदेश में इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए आदिवासी वर्ग को साधना टेड़ी खीर हो गया है. भाजपा के लिए परेशानी खड़ी की है आदिवासी युवा शक्ति संगठन जयस ने. संगठन के प्रमुख एम्स के चिकित्सक डा. हीरालाल अलावा ने बीते पांच सालों में इस संगठन को जो मजबूती दी, वह आज राजनीतिक दलों को चिंता में डाल रही है. खासकर भाजपा के लिए यह बड़ा संगठन है. मालवा अंचल में पकड़ बनाने के बाद अब इस संगठन ने आदिवासियों का राजनीतिक नेतृत्व करने वाले दल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हाथ मिला लिया है. गोंगपा के प्रमुख हीरासिंह मरकाम और जय प्रमुख हीरालाल अलावा यह तय कर चुके हैं कि इस बार वे मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग की आरक्षित वर्ग की सभी 47 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे. इसके अलावा आदिवासियों के वोट से हार-जीत प्रभावित करने वाली 33 सीटों पर भी वे अपने प्रत्याशी उतारेंगे. इस तरह यह संगठन राज्य की कुल 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगा. संगठन ने साफ कर दिया है कि वह युवाओं को प्रत्याशी बनाएगा.
जयस और गोंगपा दोनों ही दल मिलकर अगर चुनाव मैदान में आते हैं तो भाजपा के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर देंगे. ये दोनों दल के मैदान में होने से भाजपा के पक्ष से आदिवासी मतदाता दूरी बना लेगा. वैसे आरएसएस द्वारा कराए गए सर्वे में इस बात का खुलासा हो चुका है कि राज्य में आदिवासी वर्ग भाजपा के पक्ष से दूरी बना रहा है. इस लिहाज से संघ ने पहले ही भाजपा को आदिवासी मतदाता के प्रभाव वाली सीटों पर सक्रिय कर दिया था. मगर जब से मालवा में जयस ने हुंकार भरी है, तब से भाजपा की चिंता और बढ़ गई है.
जयस का खासा प्रभाव मालवा अंचल में है, तो उसके साथ चुनाव मैदान में उतरने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का अपना प्रभाव महाकौशल के अलावा विंध्य में है. विंध्य अंचल भाजपा की कमजोरी बना हुआ है. इस अंचल की कई विधानसभा सीटों पर बहुजन समाजवादी पार्टी का प्रभाव है, तो कुछ पर सपा का भी असर है. वहीं कांग्रेस का अपना प्रभाव यहां पर है. इसके चलते भाजपा के लिए इस अंचल में बड़ी मुसीबत पैदा हो सकती है. वैसे जयस की अब 23 अगस्त से निकलने वाली यात्रा विंध्य अंचल में होगी. इस यात्रा में जयस यहां पर अपना प्रभाव बनाने का पूरा प्रयास कर रही है.

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