नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाया है कि वे प्रदेश के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं के भविष्य को बर्बाद करने के दोषी हैं. सिंह ने आज मध्यप्रदेश का स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र जारी किया जो कि 28 अक्तूबर 2017 को तहसील रहली जिला सागर से जारी हुआ है और यह स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके परिवारजनों के नाम से जारी हुआ है.नेता प्रतिपक्ष सिंह ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर है. स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र फर्जी तरीके से बनाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर बाहर के लोगों ने मध्यप्रदेश के लोगों का हक मारते हुए फर्जी मूलनिवासी प्रमाण-पत्र बनवाकर प्रदेश के छात्र-छात्राओं की सीटें छीन लीं थीं . इससे कई प्रतिभावान छात्रों का भविष्य चौपट हुआ है. यह मामला हाईकोर्ट में भी पहुंचा था और हाईकोर्ट ने निर्देशित भी किया था उन्होंने कहा कि हाल ही में सागर में हुयी न्याय यात्रा के दौरान उन्हें एक नागरिक ने स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र दिया जो शिवराज पिता प्रेमसिंह निवासी - वार्ड नं 02, जवाहर लाल नेहरू, तहसील रहली, जिला सागर द्वारा जारी किया गया है. इसमें आवेदक की पत्नी का नाम साधना लिखा है तथा उनके पुत्र का नाम कुनाल और कार्तिकेय का नाम दर्ज है. इस स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र में फोटो किसी और का लगा हुआ है और हस्ताक्षर में तहसीलदार, नायब तहसीलदार जिला सागर अंकित है. सिंह ने कहा कि इस तरह फर्जी प्रमाण-पत्रों का बनना बताता है कि एक पूरा माफिया प्रदेश में काम कर रहा है और नौकरियों तथा मेडीकल - इंजीनियरिंग कॉलेज में दूसरे प्रदेशों के लोगों की भर्ती हो रही है और प्रदेश का बेरोजगार और छात्र-छात्राएं अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष सिंह ने कहा कि ऐसा ही घोटाला मतदाता सूची बनाने में भी हो रहा है. उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
भांजी रितु चौहान की भर्ती की भी जांच हो
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने हाल ही में पीएससी की भर्ती परीक्षा में हुए घोटाले में व्हीआईपी मामाजी शब्द का दस्तावेजों में उल्लेख होने पर कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भांजी की पीएससी द्वारा की गई भर्ती के मामले में हुई गड़बड़ी का मुद्दा भी कांग्रेस पार्टी ने उठाया था. उस समय नियमों को ताक पर रख कर भांजी का चयन किया गया था. वर्ष 2008 में लोकसेवा आयोग की जारी अंतिम परिणाम सूची में मुख्यमंत्री की भांजी का चयन किया गया था. इसमें पात्र सभी परीक्षार्थियों को दरकिनार करते हुए पिछड़ा वर्ग आरक्षित पद पर उप जिलाधीश के रूप में रितु चौहान का चयन किया गया था. रितु चौहान द्वारा भरे गए परीक्षा फॉर्म में ही भारी गड़बड़ियां थीं लेकिन उन्हें मामा के मुख्यमंत्री होने का लाभ मिला. सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग की प्रतिष्ठा पूरे देश में थी लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में पीएससी और व्यापमं सहित वे सभी संस्थान घोटालों के अड्डे बन गए जो प्रदेश के युवाओं का भविष्य संवारते हैं. उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के प्रमुख के रूप में ऐसे लोगों को मनमाने तरीके से अपात्र होने के बाद भी नियुक्त किया गया.
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