राजधानी के मनुआभान टेकरी पर 12 साल की नाबालिग के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपियों की डीएनए रिपोर्ट निगेटिव आई है. इस रिपोर्ट के आने के बाद भोपाल पुलिस की छवि तो खराब हुई है, साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर नाबालिग का आरोपी कौन है. पुलिस अब दिल्ली स्थित लैब से जांच कराने की बात कह रही है.
राजधानी के मनुआभान टेकरी पर बीते साल 12 वर्ष की नाबालिग के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या के मामले में पुलिस ने जस्टिनराज और अविनाश साहू नामक युवकों को आरोपी बनाया था. पुलिस अफसरों के निर्देश पर कोहेफिजा थाना पुलिस ने छात्रा के शरीर पर मिले शुक्राणु और आरोपी बनाए गए अविनाश साहू और जस्टिन राज के (सीमन) वैजाइनल स्वाब और ब्लड सैंपल की डीएनए जांच के लिए सागर भेजी थी. जांच में दोनों ही डीएनए रिपोर्ट का मिलान नहीं हुआ और रिपोर्ट निगेटिव आई. निगेटिव रिपोर्ट आते ही अफसरों ने रिपोर्ट को दबा दिया और डीआईजी से लेकर टीआई इस समय हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की शरण में हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब वे इसकी जांच दिल्ली स्थित फोरेंसिक लैब से कराएंगे. पुलिस ने तीसरी मर्तबा दिल्ली लैब से इसकी जांच कराने की अनुमति मांगी है.
रिपोर्ट पेश करने पर आरोपी साबित होंगे निर्दोष
पुलिस ने इस घटना में 45 गवाह बनाए हैं, पूरी तफ्तीश कर 16 जून को चालान कोर्ट में पेश किया था. पुलिस ने न्यायालय को तर्क दिया कि दो बार डीएनए सैंपल सागर लैब भेजे गए, जो खराब हो गए. पुलिस अगर निगेटिव डीएनए रिपोर्ट को न्यायालय में पेश कर देती है, तो निश्चित ही दोनों आरोपियों को जमानत मिलना तय है. वहीं दोषियों के परिजनों का कहना है कि अगर उनके बेटे दोषी हैं, तो फांसी दे दो. अगर वे निर्दोष हैं, तो उनके साथ न्याय क्यों नहीं हो रहा है. वहीं न्यायाधीश ने पुलिस की इस बात पर फटकार भी लगाई कि अब तक सागर फोरेंसिक लैब रिपोर्ट पर निर्णय होते आए हैं.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें