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| हीरासिंह मरकाम |
मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी भी गठबंधन को लेकर अपना मन बदल सकती है. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने आदिवासी युवा संगठन ‘जयस’के साथ मिलकर आज से मालवा में अधिकार यात्रा की शुरुआत की है. दोनों संगठन मिलकर अब मालवा और महाकौशल में अपनी ताकत दिखाएंगे. इनकी एकता से कांग्रेस के लिए संकट खड़ा हो सकता है.
मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से गठबंधन को लेकर लगातार प्रयास कर रही है, मगर उसके प्रयासों को एक-एक कर झटका लग रहा है. पहले मायावती ने यह कहकर झटका दिया कि वह सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही गठबबंधन पर विचार करेगी. इसी तरह से समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते अब तक नहीं खोले हैं. जबकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी भी इंतजार करते हुए अब साफ कर चुकी है कि वह अपने बूते पर मध्यप्रदेश में चुनाव
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| डा. हीरालाल अलावा |
लड़ेगी. इसके चलते आज गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने आदिवासीय युवा संगठन ‘जयस’ जो की मालवा में सक्रिय हैं, से अपना हाथ मिला लिया है. जयस और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी दोनों ही मिलकर आज से अधिकार यात्रा शुरु की है. यह अधिकार यात्रा रतलाम से शुरु हुई. यात्रा के शुभारंभ अवसर पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम, जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. हीरालाल अलावा, गोंगपा के राष्ट्रीय महामंत्री बलवीर सिंह तोमर मौजूद रहे. यात्रा का आगाज दोनों ही दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने किया. यह यात्रा फिलहाल तो मालवा के आदिवासी बहुल जिलों में निकलेगी. मगर विचार यह किया जा रहा है कि यात्रा को राज्य के दूसरे आदिवासी बहुल जिलों में विशेषकर महाकौशल में निकाला जाए. इसका फैैसला भी जल्द कर लिया जाएगा.
कांग्रेस को हो सकता है नुकसान
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और जयस दोनों मिलकर अगर विधानसभा चुनाव में सभी 47 अजा वर्ग की सीटों पर चुनाव लड़ते हैं तो यह माना जा रहा है कि इससे भाजपा को फायदा और कांग्रेस को नुकसान हो सकता है. कांग्रेस के पक्ष मे जाने वाले आदिवासी वोट पर सीधी सेंधमारी होगी, जो भाजपा को फायदा पहुंचाएगा. जयस के पदाधिकारियों का दावा है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ हम मिलकर चुनाव लड़ेंगे और दोनों ही दलों को प्रभावित करेंगे. हमारे मैदान में होने से फायदा न तो भाजपा को होगा और न ही कांग्रेस को. हालांकि माना जा रहा है कि जयस और गोंगपा का मैदान में आने से भील और गौंड मतदाता सीधे तौर से चुनाव परिणाम को प्रभावित करेगा.


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