प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान को पत्र लिखकर पूछा है कि नवंबर-दिसम्बर 2017 में बनायी गयी नई रेत खनन नीति बिना गजट नोटिफिकेशन के कैसे लागू हो गयी. इससे सरकार को करोड़ों रूपयों की सुरक्षा निधि ठेकेदारों को लौटाना पड़ेगी. उन्होंने पूछा है कि क्या यह सच है कि वित्त विभाग की 350 करोड़ रुपए की हानि की संभावना संबंधी आपत्ति के कारण नये नियम राजपत्र में प्रकाशित होने से रूक गये?
कमलनाथ ने पत्र में लिखा है कि राजपत्र में बिना अधिसूचना प्रकाशित हुए नई रेत खनन नीति कैसे लागू हो गयी? अभी भी मध्यप्रदेश गौण खनिज अधिनियम 1996 लागू है, जिसमें कोई भी संशोधन अधिसूचित नहीं हुआ है. सरकार ने फरवरी 2018 में नई नीति के अनुरूप ठेकेदारों से खदानों का समर्पण करने और उन्हें सुरक्षा निधि वापस करने के निर्देश जारी कर दिये, ताकि पंचायतों द्वारा एक चैथाई खदानें प्रारंभ की जा सकें. इन्हें भी वषार्काल में बंद कर दिया गया है.
कमलनाथ ने लिखा है कि नई रेत खनन नीति लागू होने के पूर्व भोपाल में रेत 25 रुपए घन फीट बिक रही थी. नई रेत खनन नीति के बाद रेत 35 रुपए घनफीट बिकने लगी. वर्तमान ठेकेदारों के स्टाक कर लेने के कारण आज यह 50 रुपए घनफीट बिक रही है, यानि पूरे दोगुने भाव पर. उन्होंने लिखा है कि षड्यंत्रपूर्वक रेत भण्डारण की अनुमति देकर माफियाआें को खुली छूट दे दी गयी है. इससे माफियाओं पर सरकार का नियंत्रण समाप्त हो गया है. नाथ ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान को लिखा है कि वे जनता को बतायें कि नयी रेत खनन नीति का राजपत्र में प्रकाशन कब तक होगा? प्रकाशन के बिना ठेकेदारों को सुरक्षा निधि लौटाने और खदान सरकार को समर्पित करने के आदेश कैसे जारी हो गये? इन सभी कारणों से रेत के जो भाव दोगुने हो गये हैं, उससे किसका लाभ हुआ, जनता का या रेत माफिया का? यह भी बतायें कि इस तरह के कुटिलपूर्ण निर्णयों के पीछे भाजपा के किन शक्तिशाली नेताओं की भूमिका है? कमलनाथ ने शिवराजसिंह को लिखा है कि आपकी सरकारी यात्रा में जनता को इन तथ्यों से भी अवगत करायें कि रेत निजी संपत्ति नहीं है, जनता की संपत्ति है.
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