पृथ्वी से चंद्रमा के बीच 8 हजार चक्कर लगाने के लिए काफीअतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दिनेश चंद्र सागर ने कहा कि हमारे शरीर में 75 खरब कोशिकाएं होती हैं. प्रत्येक कोशिका में 2 मीटर डीएनए मौजूद होता है. इन संरचनाओं की लंबाई इतनी है कि यह पृथ्वी से चंद्रमा के बीच 8 हजार चक्कर और पृथ्वी से सूरज के 400 चक्कर लगाने के लिए काफी है.
डीएनए के संबंध में यह रोचक जानकारी सागर ने दी. सागर, मध्यप्रदेश के सागर स्थित राज्य फोरेंसिक साइंस लेबोटरी में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं कार्यशाला के समापन पर बोल रहे थे. सेमिनार मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी और एफएसएल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था. इसके लिए डीएनए प्रयोगशाला के आधुनिकतम उपकरणों और प्रशिक्षित वैज्ञानिकों की क्षमता की आवश्यकता होती है. उन्होंने इन्दौर के बच्ची के बलात्कार के सनसनीखेज प्रकरण में, मध्यप्रदेश एफएसएल द्वारा डीएनए परीक्षण के आधार पर, आरोपी को रिकार्ड समय में सजा दिलाए जाने का विशेष रूप से उल्लेख किया और अंतिम फैसले में डीएनए रिपोर्ट के उल्लेख को भी शब्दश: दिखाते हुए, न्यायाधीशों से प्रभावी चर्चा की. सागर ने मानव डीएनए की संरचना के संबंध में अचंभित करने वाले कई रोचक तथ्यों को समझाया. उन्होंने कहा कि डीएनए की इतनी मात्रा में से परीक्षण के लायक डीएनए को निकाल लेना, भूसे के ढ़ेर में से एक सुई को खोजने के समान जटिल काम है जिसके लिए डीएनए प्रयोगशाला के आधुनिकतम उपकरणों और प्रशिक्षित वैज्ञानिकों की क्षमता की आवश्यकता होती है. इस परिपेक्ष्य में उन्होंने मध्यप्रदेश एफएसएल की डीएनए यूनिट की सराहना करने बताया कि प्रदेश की यह प्रयोगशाला किसी भी स्तर पर, देश विदेश की किसी भी प्रयोगशाला से कम नही है.
सागर ने मध्यप्रदेश न्यायिक सेवा के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए उदगार व्यक्त किया कि राष्ट्रीय स्तर पर जब हम मध्यप्रदेश न्यायिक व्यवस्था की तुलना करते है तो निश्चित ही हम पाते है कि दूसरे प्रदेशों की तुलना में मध्यप्रदेश की न्यायिक संस्था में अधिक विश्वास है एवं पुलिस, वैज्ञानिक एवं न्यायिक संस्था के कर्मियों के समन्वयिक प्रयासों और अथक परिश्रम के कारण इतनी मात्रा में प्रकरणों का निराकरण संभव हो पा रहा है.
डा. हर्ष शर्मा निदेशक ने वैज्ञानिक साक्ष्य की महत्ता को प्रतिपादित करते हुये व्यक्त किया कि मनुष्य झूठ बोल सकता है, लेकिन वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर निकले निष्कर्ष सदैव सत्य ही होते है इसलिये आज के इस तकनीकी और वैज्ञानिक युग में समय आ गया है कि अधिक से अधिक मात्रा में ऐंसे संस्थानो का लाभ लेकर उचित न्याय प्रदान किया जाए. उन्होंने अपने सभी सहयोगियों द्वारा किए जा रहे अथक परिश्रम की सराहना करते हुए भविष्य में अपनी विश्सवनीयता प्रतिबद्धता को बनाये रखते हुये अपने कार्यों को इसी तरह से आगे भी संपादित करते रहने में जोर दिया है.
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