मंगलवार, 24 जुलाई 2018

सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों को सहयोग करें देशवासी


राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले देशवासियों का कर्तव्य है कि वह सीमा पर तैनात सैनिकों से अच्छे संबंध रखें और उन्हें सहयोग करें. सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और सीमा पर तैनात सैनिक का बहुत घनिष्ठ संबंध होता है. दोनों को एक ही तरह की परिस्थितियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने यह बात आज सशस्त्र सीमा बल के प्रशिक्षु सहायक कमांडेंट के 34 सदस्यीय दल से भेंट के दौरान कही.
राज्यपाल पटेल ने कहा कि सीमाओं और आंतरिक क्षेत्रों में आतंकवादियों और नक्सलियों के द्वारा आधुनिक हथियारों के उपयोग तथा तरीकों से किए जा रहे हमलों से सैनिकों को बचाने के लिए सख्त उपाये करने की आवश्यकता है. आज जहां हमारी सेनाएं आधुनिक हथियारों और संचार साधनों से सम्पन्न हो रही हैं, वहीं आतंकवादी और नक्सलवादी भी आधुनिक तरीकों का उपयोग कर रहे हैं. इससे गश्त में लगे सैनिकों की जान को खतरा बना रहता है. कारगिल युद्ध और उसके बाद की बदलती परिस्थितियों में 'विशेष सेवा ब्यूरो' का देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान है. राज्यपाल ने कहा कि हमारे सैनिक चाहे वह बीएसएफ, सेना अथवा अन्य बलों के हों, उनके बलिदान, बहादुरी और कर्मठता के कारण ही आज हमारे देश की सेना विश्व की बड़ी सेनाओं में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित करती जा रही है.
इस अवसर पर सशस्त्र सीमा बल अकादमी के निदेशक, सुधांशु नौटियाल ने अकादमी की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए उत्तराखंड के श्रीनगर से अविस्थत होकर भोपाल में पुन: स्थापित सशस्त्र सीमा बल अकादमी के बारे में विस्तार से जानकारी दी. कमांडेंट सशस्त्र सीमा बल अकादमी डी एन भौमबे ने आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम का संचालन अधिकारी प्रशिक्षु  प्रीति शर्मा ने किया.

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