शनिवार, 28 जुलाई 2018

शिवराजसिंह की यात्रा का नाम, जनआशीर्वाद नहीं बल्कि, जनआवेदन यात्रा होना चाहिए


प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि शिवराजसिंह की निकल रही यात्रा का नाम, जनआशीर्वाद नहीं बल्कि, जनआवेदन यात्रा होना चाहिए. इस यात्रा के लिए भीड़ को लेकर दिखावटी दावे तो बड़े-बड़े किये जा रहे हैं, लेकिन इस यात्रा में आने वाले वे लोग हैं जो पिछले साढ़े चैदह वर्ष की भाजपा सरकार में अपनी समस्याओं के निदान को लेकर दर-दर भटक रहे हैं एवं सरकारी अधिकारी- कर्मचारियों द्वारा समस्याओं के निदान के नाम पर गुमराह कर लायी जा रही भीड़ है. स्थिति यह है कि शिवराजसिंह चैहान की जनआशीर्वाद यात्रा जहां-जहां जा रही है, वहां बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के आवेदन लेकर आ रहे हैं, जिसे आशीर्वाद देने आने वाली जनता के रूप में प्रायोजित तरीके से प्रचारित किया जा रहा है. स्थिति यह है कि आवेदनांे की संख्या को देखते हुए उन्हें बोरो में भरना पड़ रहा है. 
कमलनाथ ने कहा कि पिछले साढ़े चैदह साल से गरीब जनता अपनी समस्याओं को लेकर दर-बरदर भटक रही है, वे बड़ी संख्या में आवेदन लेकर इस यात्रा में आ रहे हैं. उनमें पेंशन, बिजली, सड़क, राशन कार्ड, बीपीएल कार्ड, नामांतरण, भावांतर और अनाज बिक्री का पैसा न मिलना, बीमा राशि के नाम पर नाम मात्र पैसा मिलना, भ्रष्टाचार से लेकर, घोषणाओं के बाद भी कार्य नहीं होना, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार पर केंद्रित मामले शामिल हैं. मुख्यमंत्री की हर यात्रा में 10-15 बोरी आवेदन एकत्र हो रहे हैं. जनता को समस्या निदान के नाम पर आवेदन लेकर यात्रा में बुलाकर, ठगा जा रहा है और प्रचारित यह किया जा रहा है कि यह भीड़ शिवराजसिंह चैहान को आशीर्वाद देने आ रही है. 
कमलनाथ ने कहा कि पूरी सरकार और तमाम मंत्रीगण, अधिकारी और कर्मचारी अपना काम छोड़कर इस जनआशीर्वाद यात्रा में लगे हैं. सरकारी दफ्तर लावारिस हो चुके हैं, क्योंकि जिम्मेदारों को इस यात्रा में भीड़ ढोने व यात्रा को सफल बनाने की जबावदारी में लगा दिया गया है. उन्होंने कहा कि जनता परेशान हो रही है. जनआशीर्वाद यात्रा के चक्कर मंे पूरा शासन, प्रशासन ठप्प पड़ा हुआ है. जनता भटक रही है, कोई सुनने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि कहने को तो यह भाजपा की यात्रा है, लेकिन यह पूरी तरह से सरकारी यात्रा बनकर रह गयी है.  

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