प्रदेश में शिक्षा की तस्वीर बदल रही है. प्रधानमंत्री की डिजिटल इण्डिया मुहीम का असर सरकारी स्कूलों में दिखने लगा है. जबलपुर शहर के पाँच हायर सेकेण्डरी स्कूलों में बच्चे चॉक और ब्लैक-बोर्ड की जगह अब इलेक्ट्रॉनिक प्रोजेक्टर के माध्यम से डिजिटल बोर्ड पर पढ़ाई कर रहे हैं.
प्रदेश के हर बच्चे को बेहतर शिक्षा देने के लिये जबलपुर में स्मार्ट क्लास शुरू की गई है. इसके बेहतर क्रियान्वयन पर स्कूलों को भारत सरकार के आवासीय एवं शहरी गरीबी उन्मूलन विभाग द्वारा इण्डियन स्मार्ट सिटीज अवार्ड-2018 प्रदान किया गया है. शहर के लक्ष्मीनारायण यादव बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रांझी, नगर निगम कन्या उ.मा.विद्यालय घमापुर और गोविन्दगंज तथा नगर निगम उ.मा.विद्यालय तिलवाराघाट और डॉ राजेन्द्र प्रसाद हायर सेकेण्डरी स्कूल ग्वारीघाट की 4-4 कक्षाओं को स्मार्ट क्लास बनाया गया है. इन सभी स्कूलों को मिलाकर 20 कक्षाओं को स्मार्ट बनाया जा चुका है. इनमें पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है. इन्हीं स्कूलों में 23 स्मार्ट कक्षाएँ और निमार्णाधीन हैं.
स्मार्ट क्लास में वाई-फाई इंटरनेट, आडियो-वीडियो और थ्री-डी तकनीक के जरिए बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. प्रोजेक्टर द्वारा डिजिटल स्क्रीन पर बच्चों को न सिर्फ पढ़ाया जा रहा है, बल्कि उन्हें मल्टीमीडिया कंटेण्ट और वीडियो के जरिए सीधे प्रैक्टिकल करके भी पढ़ाया जा रहा है. मसलन अभी तक ब्लैक-बोर्ड में शिक्षक भूगोल पढ़ाते समय चॉक के जरिए गोलनुमा आकृति बनाकर बताते थे कि पृथ्वी गोल है, लेकिन अब पृथ्वी किस तरह गोल है, किस दिशा में घूमती है, किन-किन ग्रहों का चक्कर लगाती है, छात्र यह सब स्क्रीन में देख पा रहे हैं. इसी तरह से भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान के हर प्रैक्टिकल के वीडियो, पिक्चर्स, ग्राफिक्स के जरिए बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. इन स्कूलों के शिक्षक और छात्र सहित पूरे स्टॉफ की बायोमेट्रिक अटेण्डेंस ली जाती है. स्मार्ट क्लास सिस्टम का कंट्रोल रूम और वर्चुअल स्टूडियो लक्ष्मीनारायण हायर सेकेण्डरी स्कूल रांझी में बनाया गया है. स्मार्ट कक्षाओं में सीसीटीव्ही कैमरा लगाया गया है और छात्रों के लिए लैपटॉप की व्यवस्था है. हर स्कूल में डिजिटल लायब्रेरी है. लायब्रेरी में छात्र 5 हजार पुस्तकें आॅनलाइन पढ़ सकते हैं. हर स्कूल को 10-10 टैब भी दिए गए हैं.
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