प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार ने चुनावों में गड़बड़ी करने के उद्देश्य से हर जिले में सरकारी अमले की जमावट तेज कर दी है. निर्वाचन आयोग के नियमों को दरकिनार करते हुए सरकार ने एक दर्जन से ज्यादा ऐसे अफसरों को जिलों में बैठाना शुरू कर दिया है, जो मंत्रियों के स्टाफ में शामिल रहे हैं. बड़ी संख्या में अधिकारियों को उन जिलों में भेजा जा रहा है, जहां वे वर्ष 2013 के चुनावों में भी पदस्थ रहे हैं.
कांग्रेस प्रवक्ता सैयद जाफर ने बताया है कि मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग द्वारा 18 जुलाई को तहसील एवं नायब तहसीलदारों के पद पर कार्यरत अधिकारियों के स्थानांतरण संबंधी आदेश जारी किए गए थे, जिसे संशोधित कर 30 जुलाई को पुन: राजस्व विभाग द्वारा स्थानांतरण सूची जारी की गई है जो कि निर्वाचन नियमों के विरुद्ध है. जाफर ने कहा कि निर्वाचन आयोग के नियमों का उल्लघंन करते हुए जिन अधिकारियों को स्थानांतरित कर वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में जिन जिलों में कार्यरत थे उन्हें पुन: उन्हीं जिलों में यथावत पदस्थ कर दिया गया है, उनमें शालिनी पाली भोपाल, रंजना पाटीदार खरगोन, सुनील जायसवाल उज्जैन, चंद्रसिंह धारवे धार, तपिश पांडे इंदौर शामिल हैं. वहीं भोपाल में कार्यरत चार तहसीलदारों भुवन गुप्ता, विनोद सोनकिया, पी.सी. जैन और संध्या चतुर्वेदी को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में बतौर ओएसडी के रूप में पदस्थ किया गया है, जो कि पूर्व में भाजपा सरकार के मंत्रियों के स्टाफ में रहे है और मंत्रियों के रिश्तेदार भी है. इन अधिकारियों को निर्वाचन आयोग में पदस्थ करना सीधे तौर पर चुनाव को प्रभावित करने की मंशा को जाहिर करता है. जाफर ने कहा है कि अधिकारियों की षड्यंत्रपूर्वक लगायी जा रही ड्यूटी और उसी जिले में पदस्थ रहने और अन्यत्र स्थानांतरित न किए जाने के संबंध में प्रदेश कांगे्रस द्वारा अधिकृत चुनाव कार्य के लिए नियुक्त प्रभारी के माध्यम से नामजद शिकायत की जा रही है.
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