समाजवादी जनपरिषद के नवनियुक्त राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग मोदी ने मांग की, कि जिस तरह से भोपाल के एक निजी छात्रावास में सरकार की योजना के तहत रह रही दो मूल एवं बधिर आदिवासी लड़कियों से सालभर तक बालात्कार का मामला संयोगवश सामने आया है, एवं उसी तरह कटनी का मामला सामने आया उससे साफ है कि मध्यप्रदेश सरकार अपने तमाम दावों के बावजूद आदिवासी युवतियों को सुरक्षित सरकारी छात्रावास उपलब्ध कराने में असफल रही है. म. प्र. सरकार ने पिछले 10 सालों से अजा एन अजजा वर्ग के छात्र एवं छात्राओं के लिए सरकारी छात्रावास उपलब्ध कराने की बजाएं, उन्हें बहार किराए पर घर लेकर सिर्फ एक निश्चित किराए का भुगतान कर अपना पडला झाड़ लिया है. लड़कियों के लिए संचालित इन निजी होस्टलों की मोनिटरिंग से आदिवासी कल्याण विभाग अपना पल्ला झाड़ लेता है. इतना ही नहीं, प्रदेश में वर्तमान में जितने छात्रावास अजजा एवं अजा वर्ग की लडकियों के लिए है, वहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है; यह सब भगवान भरोसे है. उन्होंने बैतूल जिले का उदहारण देते हुए बताया कि, वहां जिला पंचायत के पीछे एक ही परिसर में लड़कियों के आठ छात्रावास है; इसमें अधीक्षक के कमरे छात्रावास के अंदर है और जो गेट बना है उस पर मात्र एक पुरुष चौकीदार तैनात रहता है, कोई सी सी टी व्ही कैमरा नहीं है; अनेक छात्रावासों की तो बाउंड्री वाल तक टूटी है.
सजप के प्रवक्ता ने आगे कहा कि एक तो इस घटना से सबक ले सरकार को तुरंत भोपाल, इंदौर सहित पूरे प्रदेश में आदिवासी एवं दलित छात्राओं के लिए सरकारी सुरक्षित छात्रावासों की व्यवस्था तुरंत करना चाहिए. दूसरा, इन छात्रावासों में कड़ी सुरक्षा एवं नियमित मोनिटरिंग व्यवस्था करना चाहिऐ तीसरा, यह घटना तो संयोगवश अन्य लड़कियों के प्रयासों से उजागर हुई, लेकिन यह ईशारा है सरकार को कि वो पूरे प्रदेश के इस तरह के छात्रावासों और सुधार गृहों की टाटा इंस्टिट्यूट जैसी संस्था से जाँच कराएं.
सजप के प्रवक्ता ने आगे कहा कि एक तो इस घटना से सबक ले सरकार को तुरंत भोपाल, इंदौर सहित पूरे प्रदेश में आदिवासी एवं दलित छात्राओं के लिए सरकारी सुरक्षित छात्रावासों की व्यवस्था तुरंत करना चाहिए. दूसरा, इन छात्रावासों में कड़ी सुरक्षा एवं नियमित मोनिटरिंग व्यवस्था करना चाहिऐ तीसरा, यह घटना तो संयोगवश अन्य लड़कियों के प्रयासों से उजागर हुई, लेकिन यह ईशारा है सरकार को कि वो पूरे प्रदेश के इस तरह के छात्रावासों और सुधार गृहों की टाटा इंस्टिट्यूट जैसी संस्था से जाँच कराएं.
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