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| लता वानखेड़े |
वानखेड़े ने सखी-संगिनी प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए यह जानकारी दी. वानखेड़े ने समितियों के सदस्यों को परिचय-पत्र प्रदान करते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों से समन्वय स्थापित करें तथा महिलाओं के विकास, पुनर्वास तथा विभिन्न समस्याओं के निराकरण की दिशा में सक्रियता से काम करें. उन्होंने कहा कि समितियां अपने-अपने कार्यक्षेत्र में शक्ति परामर्श शिविर का आयोजन कर महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित संबल योजना, आजीविका मिशन और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं की जानकारी दें. वानखेड़े ने कहा कि समितियों की महिला सदस्य स्थानीय कन्या शालाओं और कन्या महाविद्यालयों में जाएं और बच्चियों को गुड टच, बैड टच तथा विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दें.
कार्यशाला में शामिल महिला सदस्यों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में महिलाओं के उत्थान और सुरक्षा की दृष्टि से किए जा रहे प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी. इस मौके पर राजगढ़ जिले की सखी माधवी परमार ने बताया कि उन्होंने बेड़िया-बांछड़ा जनजाति की 12 महिलाओं को वैश्यावृत्ति छोड़कर खेती-बाड़ी की ओर अग्रसर किया है. अब ये महिलाएं अपने बच्चों को स्कूल भेजने को भी तैयार हो गई हैं.

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