![]() |
| कमलनाथ |
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में दो महीने पहले उजागर हुए ई-टेंडरिंग घोटाले की जांच कर रही राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने अभी तक न तो कोई एफआईआर दर्ज की है और न ही कोई गिरफ्तारी की है. जांच एजेंसी दो महीने से सिर्फ प्राथमिक पड़ताल में ही जुटी है, जबकि यह घोटाला पूरी तरह से आईटी पर निर्भर है. जांच एजेंसी ने अभी तक घोटाले से जुड़े किसी भी शख्स को नोटिस देकर पूछताछ के लिए भी नहीं बुलाया है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है संपूर्ण मामले की जांच मामला सामने आने के तीन दिन बाद ही ईओडब्ल्यू को सौंपी गई. उसी समय कांग्रेस ने कहा था कि ईओडब्ल्यू को जांच सौंपकर शिवराज सरकार मामले को दबाना चाहती है. इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपना चाहिए व अभी तक के सभी विभागों के सारे ई-टेंडरों को इस जांच के दायरे में लेना चाहिए. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश के कई विभागों में टेंडर व्यवस्था में भ्रष्टाचार रोकने के लिए ई-टेंडर व्यवस्था लागू कर मध्यप्रदेश ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल बनवाया गया था, इसके माध्यम से विभिन्न विभागों के कार्यों के लिए ई-टेंडर व्यवस्था लागू की गई थी. इसी के अंतर्गत नल-जल समूह योजना के तहत गांवों में पानी पहुंचाने के लिए बनी परियोजनाओं के लिये 1000 करोड़ रुपए के तीन टेंडरों में टेंपरिंग कर रेट बदलने का मामला जून माह में सामने आया था. आश्यर्चजनक है कि इसमें से दो टेंडर राजगढ़ क्षेत्र की उन पेजयल परियोजनाओं के हैं, जिनका शिलान्यास देश के प्रधानमंत्री के हाथ से 23 जून को ही होना था. जल निगम के ई-टेंडर में टेंपरिंग सामने आने के बाद प्रदेश में जल संसाधन, लोक निर्माण विभाग, महिला बाल विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम सहित अन्य विभागों में भी टेंडरों में गड़बड़ी की बातें सामने आयीं. संपूर्ण मामले की जांच मामला सामने आने के तीन दिन बाद ईओडब्ल्यू को सौंपी गई. उसी समय कांग्रेस ने कहा था कि ईओडब्ल्यू को जांच सौंपकर शिवराज सरकार मामले को दबाना चाहती है. इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपना चाहिए व अभी तक के सभी विभागों के सारे ई-टेंडरों को इस जांच के दायरे में लेना चाहिए. कमलनाथ ने कहा कि इस मांग को लेकर मैंने प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक पत्र भी लिखा. चलती जांच में इस गड़बड़ी को उजागर करने वाले मेप आईटी के प्रमुख को पहले छुट्टी पर भेज दिया गया, फिर बाद में उन्हें हटा दिया गया. इससे ही सरकार की इस घोटाले को लेकर मंशा व घबराहट उजागर हो गई थी.
भोपाल में ही की गड़बड़ी
नाथ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में इस गड़बड़ी के तार मुंबई से जुड़े होना बताया गया, लेकिन बाद में जांच में यह बात सामने आयी कि भोपाल में ही बैठकर इस गड़बड़ी को अंजाम दिया गया. जांच में भोपाल के नये आईपी एड्रेस पाये गये, जिनके माध्यम से यह गड़बड़ी की बात सामने आयी. यह बात भी सामने आयी कि इन आईपी एड्रेस के माध्यम से कई विभागों में भी गड़बड़ी के सबूत भी मिले हैं.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें