मंगलवार, 14 अगस्त 2018

शहीदों को नमन कर राष्ट्र का कर्ज उतारें

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने शौर्य एवं बलिदान की धरा भिंड में शहीदो के परिजनों का किया सम्मान, शहीदों के माता-पिता को भी सम्मान राशि व पेंशन देने की घोषणा.
चौहान शौर्य एवं बलिदान की धरा चंबल अंचल के भिंड शहर में आयोजित हुए शहीद सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा हम सबका नैतिक दायित्व हैं कि शहीदों को नमन कर राष्ट्र का कर्ज उतारे. मुख्यमंत्री  ने कहा जिस तरह परतंत्रता की बेडियां काटने के लिए वीर सपूत हँसते-हँसते फांसी के फंदे पर झूल गए थे, उसी तरह आजादी के बाद देश की रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा के लिए हजारों रण-बॉंकुरो ने शहादत दी है. इन शहीदों का राष्ट्र पर कर्ज है। हम मध्यप्रदेश में ऐसी परंपरा डालेंगे, जिससे शहादत को नमन कर और शहीदों के परिजनों व वीर नारियों का सम्मान कर इस कर्ज को कम कर सकें. 
भिंड के निराला रंग बिहार प्रांगण में आयोजित हुए इस गरिमामयी समारोह में जिले के 119 शहीदो की वीर नारियों एवं उनके परिजनो को सम्मानित किया गया. मुख्यमंत्री ने मंच से इनमें से 70 से अधिक वीर नारियों एवं शहीदो के परिजनों को शॉल श्रीफल, सम्मान-पत्र एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया. वीर भोग्या वसुंधरा का चंबल अंचल वो भू-भाग है, जहां के जांबाज सबसे ज्यादा शहीद हुए हैं. चंबल संभाग के भिण्ड जिले में शहीदों की संख्या सर्वाधिक है. इसीलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं भिण्ड के समारोह में शहीदों के परिजनों का सम्मान करने पहुंचे. प्रदेश के अन्य जिला मुख्यालयों पर केन्द्रीय एवं राज्य सरकार के मंत्रिगण व अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं वरिष्ठ अधिकारियों  की मौजूदगी में सम्मान समारोह आयोजित हुए.
शहीद सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे जवान कड़कड़ाती सर्दी, भीषण गर्मी और तेज बारिश व भू-स्खलन की चिंता किए बगैर सीमा पर डटे रहते हैं. तभी यहां हम चैन की नींद लेते हैं और सावन, दिवाली व होली इत्यादि त्यौहार मना पाते हैं.शहीदों का स्मरण कर हम कोई उन पर उपकार नहीं करते, बल्कि राष्ट्र पर चढे उनके कर्ज को उतारने का प्रयास भर करते हैं. श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हर साल स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले शहीद सम्मान दिवस मनाने का फैसला लिया हैं.साथ ही मार्ग,  चौराहा  एवं  अन्य सार्वजनिक  स्थलो का नाम शहीदों के नाम पर रखा जाएगा.स्कूलों व सार्वजनिक स्थलों पर शहीदों की प्रतिमा लगाई जाएगी.जिन शिक्षण संस्थाओं में शहीद पढें थे, उनकी शौर्य गाथाएं प्रदर्शित कराई जाए, जिससे युवा पीढी में देश भक्ति का जज्बा पनपे और शहीदों का स्मरण भी होता रहें. मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद सीमा की रक्षा, आतंकबाद, नक्शलबाद आदि कार्रवाई के दौरान देश के 30 हजार जवानों ने शहादत दी हैं.अकेले मध्यप्रदेश में 602 शहीदों को अब तक सूचीबद्व किया जा चुका हैं.इनमें भिण्ड, मुरैना व ग्वालियर जिले के शहीदों की संख्या सर्वाधिक हैं.


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