प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने कहा है कि बिहार के मुजफ्फरपुर, उत्तरप्रदेश के देवरिया और अब मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक निजी एनजीओ के संचालक द्वारा मूक-बधिर बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले ने समूचे प्रदेश को शर्मसार किया है। बिहार, मुजफ्फरपुर और भोपाल की इन घटनाओं में एक बात समान है। इन तीनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। बिहार के मुजफ्फरपुर में जेडीयू-बीजेपी गठबंधन की सरकार है।
ओझा ने कहा कि प्रदेश पहले से ही महिलाओं और बच्चियों के दुष्कर्म के मामले में प्रथम स्थान पर है, लेकिन अब जो मामला सामने आया है, वह जितना शर्मनाक है उतना ही संवेदनहीन भी है। जो आदिवासी बच्चियां बोल और सुन नहीं सकतीं, उनके साथ घिनौने कृत्य किये गये जो निश्चित ही प्रदेश की छवि को तार-तार करते हैं। जहां मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बच्चियों के मामा बनने का ढोंग करते हैं, वहीं वे दुष्कर्म के आरोपी अश्विनी शर्मा के सिर पर हाथ रखते है, उनकी पीठ ठोकते हैं। यह शिवराजसिंह सरकार के वास्तविक चरित्र और प्रदेश की भांजियों की सुरक्षा के प्रति उनकी सोच को प्रमाणित करता है।
ओझा ने प्रदेश सरकार और उसके मुखिया से इस मामले से जुड़े कुछ ज्वलंत सवाल पूछते हुए उनका जबाव चाहा है
- मूक-बधिर बालिकाओं से दुष्कर्म के आरोपी पर पुलिस द्वारा की गई एफआईआर में सामान्य आरोपियों की तरह उम्र, पिता का नाम और उसका पता क्यों नहीं लिखा गया?
- अश्विनी शर्मा के एनजीओ के संदर्भ में समाचार पत्रों के अनुसार वह पंजीकृत संस्था नहीं है। फिर सरकार द्वारा किस प्रावधान के तहत इसे कई वर्ष से अनुदान दिया जा रहा था? शर्मा के एनजीओ का नाम सरकार क्यों छुपा रही है?
- इस संस्था का आॅडिट और जांच करने का अधिकार किस विभाग के पास था और किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी?
- क्या पुलिस ये पर्दाफाश करेगी कि आरोपी अश्विनी शर्मा के सिर पर मुख्यमंत्री अपना आशीष भरा हाथ फेर रहे हैं और पीठ थपथपाकर किस तरह का बल प्रदान कर रहे हैं?
- समाचार पत्रों में पुलिस के बयान के अनुसार आरोपी को भाजपा के कई मंत्री, नेता और अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है? पुलिस उन सभी मंत्रियों, नेताआंे और अधिकारियों के नाम उजागर करने में देर क्यों लगा रही है?
- मध्यप्रदेश में विगत 2-3 साल पहले मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर के बालिका गृह में भी मूक-बधिर बच्चियों के साथ बलात्कार की घटना हुई थी। खंडवा की एक संस्था मंे मानसिक रूप से विक्षिप्त 13 और 15 वर्ष की दो बच्चियांे के साथ संस्था के संचालक ने दुराचार किया था तब भी मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिये और सभी संस्थाओं की माॅनिटरिंग की बात कहीं थी। क्या कारण रहा कि उस वक्त ही प्रदेश की उन सभी संस्थाओं की जांच क्यों नहीं की गई?
ओझा ने कहा कि प्रदेश पहले से ही महिलाओं और बच्चियों के दुष्कर्म के मामले में प्रथम स्थान पर है, लेकिन अब जो मामला सामने आया है, वह जितना शर्मनाक है उतना ही संवेदनहीन भी है। जो आदिवासी बच्चियां बोल और सुन नहीं सकतीं, उनके साथ घिनौने कृत्य किये गये जो निश्चित ही प्रदेश की छवि को तार-तार करते हैं। जहां मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बच्चियों के मामा बनने का ढोंग करते हैं, वहीं वे दुष्कर्म के आरोपी अश्विनी शर्मा के सिर पर हाथ रखते है, उनकी पीठ ठोकते हैं। यह शिवराजसिंह सरकार के वास्तविक चरित्र और प्रदेश की भांजियों की सुरक्षा के प्रति उनकी सोच को प्रमाणित करता है।
ओझा ने प्रदेश सरकार और उसके मुखिया से इस मामले से जुड़े कुछ ज्वलंत सवाल पूछते हुए उनका जबाव चाहा है
- मूक-बधिर बालिकाओं से दुष्कर्म के आरोपी पर पुलिस द्वारा की गई एफआईआर में सामान्य आरोपियों की तरह उम्र, पिता का नाम और उसका पता क्यों नहीं लिखा गया?
- अश्विनी शर्मा के एनजीओ के संदर्भ में समाचार पत्रों के अनुसार वह पंजीकृत संस्था नहीं है। फिर सरकार द्वारा किस प्रावधान के तहत इसे कई वर्ष से अनुदान दिया जा रहा था? शर्मा के एनजीओ का नाम सरकार क्यों छुपा रही है?
- इस संस्था का आॅडिट और जांच करने का अधिकार किस विभाग के पास था और किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी?
- क्या पुलिस ये पर्दाफाश करेगी कि आरोपी अश्विनी शर्मा के सिर पर मुख्यमंत्री अपना आशीष भरा हाथ फेर रहे हैं और पीठ थपथपाकर किस तरह का बल प्रदान कर रहे हैं?
- समाचार पत्रों में पुलिस के बयान के अनुसार आरोपी को भाजपा के कई मंत्री, नेता और अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है? पुलिस उन सभी मंत्रियों, नेताआंे और अधिकारियों के नाम उजागर करने में देर क्यों लगा रही है?
- मध्यप्रदेश में विगत 2-3 साल पहले मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर के बालिका गृह में भी मूक-बधिर बच्चियों के साथ बलात्कार की घटना हुई थी। खंडवा की एक संस्था मंे मानसिक रूप से विक्षिप्त 13 और 15 वर्ष की दो बच्चियांे के साथ संस्था के संचालक ने दुराचार किया था तब भी मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिये और सभी संस्थाओं की माॅनिटरिंग की बात कहीं थी। क्या कारण रहा कि उस वक्त ही प्रदेश की उन सभी संस्थाओं की जांच क्यों नहीं की गई?
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