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| शिवराज सिंह चौहान |
मध्यप्रदेश भाजपा में गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के निशाने पर हैं. खासकर पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने तो शिवराज के खिलाफ मोर्चा ही खोल रखा है. उन्हें हाल ही में यह मौका भाजपा के प्रकल्पों, प्रकोष्ठों की बैठक के दौरान फिर मिला और शिवराज सिंह के खिलाफ फिर शर्मा ने मोर्चा खोल दिया. वे यहां तक कह गए कि बैठकों के भाषण देने से क्या होगा, बैठके कार्ययोजना के लिए होती हैं, कार्ययोजनाएं तो बनाएं.
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| रघुनंदन शर्मा |
शर्मा इतने नाराज हुए कि प्रदेश अध्यक्ष को भी खरी-खरी सुना डाली. उन्होंने साफ कहा कि अगर संगठन चलाना है तो ढंग से चलाया जाए. शर्मा की नाराजगी को भांप कर प्रदेश अध्यक्ष को यह कहना पड़ा कि वे आगे से इस बात का ध्यान रखेंगे. कोशिश करेंगे कि कम बैठकें हो और कार्यकर्ता को मिलने का समय भी दिया जाए. इस पर शर्मा ने कहा कि भाजपा की सरकार थी तब मुख्यमंत्री जनकल्याण प्रकोष्ठ बनाया गया था, जब मुख्यमंत्री नहीं है तो इस प्रकोष्ठ का क्या मतलब, इसे बंद कर देना चाहिए.
पहले भी हो चुके हैं नाराज
विधानसभा चुनाव में हार मिलने पर शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं. शर्मा ने माई के लाल वाले बयान को लेकर शिवराज सिंह चौहान पर कटाक्ष किया था. इसके अलावा वे यहां तक कह चुके थे कि अगर शिवराज सिंह को जीत का श्रेय दिया जाता है तो हार का कारण भी वे ही है. उन्हें इस बात को स्वीकार करना चाहिए. वे यहां तक कह गए थे कि शिवराज सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के समान आदर्श प्रस्तुत करन चाहिए और चौहान को पांच-दस साल तक कोई पद नहीं लेना चाहिए. इसके अलावा भी शर्मा कई अवसरों पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का विरोध करते रहे हैं. इसके चलते एक बार तो उन्हें पार्टी के उपाध्यक्ष पद से भी हटाया गया है.


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