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| अजय सिंह |
प्रधानमंत्री ने पूरे देश को डिजिटल इंडिया बनाने का एक सपना दिखाया. देशवासियों से अपेक्षा की कि वे पेपरलेस और कैशलेस व्यवस्था पर आधारित समाज बनाए पर मध्यप्रदेश में इस अपेक्षा को गहरा आघात ई-टेंडर घोटाले और एमपी आॅनलाईन पोर्टल में हुए घोटाले ने पहुंचाया है. यह घोटाला व्यापम महाघोटाले से भी बड़ा है.
यह तमाम बातें नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कही हैं. उन्होंने पीएम को लिखे पत्र में कहा कि जल निगम, पीडब्ल्यूडी, एवं जल संसाधन विभाग के जिन निविदाओं में अंकित की गई राशि में गड़बड़ी की गई उसमें डेमो आईडीएस का उपयोग किया गया है जिसे आॅस्मो आईटी सॉल्यू शन कंपनी द्वारा परफॉरमेंस टेस्टिंग के लिए बनाया गया है. इस कंपनी के मुख्य कर्ताधर्ता विनय चौधरी हैं. जिनके मोबाईल नंबर की कॉल डिटेल तथा कंपनी की गतिविधियों की जांच की जाए तो बड़े खुलासे होंगे. उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा है कि आप इस पूरे मामले की जिस भी एजेंसी से जांच कराएं वह तत्काल हो. साथ ही वह जांच एजेंसी मेरे द्वारा दिए गए तथ्यों के आधार पर सभी दस्तावेजों को जब्त कर इससे जुड़े लोगों और अधिकारियों से कड़ी पूछताछ करें.
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में अजय सिंह ने कहा अगर इसकी तत्काल जांच नहीं कराई गई तो इस घोटाले के तथ्यों के साथ छेड़छाड़ प्रारंभ हो गई है और उन्हें नष्ट करने की सुनियोजित साजिश शुरू कर दी गई है. सिंह ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि 29 जून को आपने नई दिल्ली में एक स्थानीय कार्यक्रम में कहा था कि ''ईमानदार हो रहा है देश, राष्ट्र निर्माण में अहम जिम्मेदारी निभा रहे लोग'' पर आपकी ही पार्टी की सरकार, मध्यप्रदेश में ऐसा नहीं कर रही है और पूरी सरकार बेईमानों की संरक्षक बनी हुई है. उन्होंने लिखा मैं ई-टेंडर घोटाले से जुड़े हुए महत्वपूर्ण तथ्यों पर आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं, जिससे यह पता चलता है कि किस तरह यह घोटाला किया गया है.
नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री को ई-टेंडर घोटाले से जुड़े 6 प्रमुख बिन्दुओं की तरफ ध्यान आकर्षित किया है. जो इस प्रकार हैं.
1. प्रारंभिक जांच में 02 आईपी एड्रेस प्राप्त हुए थे जिससे प्राईज बिड ओपन की गई थी. यह आईपी एड्रेस 27.60.185.141 एवं 27.60.163.98 थे . ये आईपी एड्रेस डेमो टेंडर बनाने में एवं डिजिटल की के माध्यम से प्राईज बिड ओपन करने में इस्तेमाल किये गये यह आईपी एड्रेस आॅस्मो आईटी सॉल्यूाशन कंपनी से कनेक्टेट थे.
2. डिजीटल सिग्नेचर : प्राईज बिड इस प्रकार इनक्रिप्ट की जाती है कि विभाग के टेंडर ओपनिंग अथोरिटी के इनक्रिप्सन सर्टिफिकेट के बिना प्राईज बिड ओपन नहीं की जा सकती है. सामान्यत: यह इनक्रिप्सन सर्टिफिकेट (डिसक्रिप्सन की) आॅनर के पास रहती है किन्तु यह ऐसी सुविधा है कि इसमें बेक-अप रजिस्ट्रिंग अथोरिटी के पास उपलब्ध रहती है. इस प्रकरण में रजिस्ट्रिंग अथोरिटी आॅस्मो आईटी सॉल्यूरशन कंपनी है. अत: यह संभावना है कि आॅस्मो आईटी सॉल्यूगशन के द्वारा इनक्रिप्सन की का उपयोग किया गया .
3. बेक-अप एंड अपडेट : डिपार्टमेंटल की वास्तविक बिड को डेमो टेंडर से कापी कर खोलकर देखा गया . इस प्रकार का बेक-अप एंड अपडेट केवल ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है जिसे डाटाबेस आर्किटेक्चर, डाटाबेस टेबल एवं एपलीकेशन प्रोगामिंग का ज्ञान हो. डाटाबेस एसेस एंथरेक्स सिस्टम से संलग्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ही था . अत: एंथरेक्स सिस्टम के किसी व्यक्ति के द्वारा ही बेक-अप एंड अपडेट का कार्य किया गया .
4. टेंडर मैंनेजमेंट: टीसीएस के द्वारा पोर्टल पर सिग्नेचर वेरिफाई की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी. विभिन्न विभागों के हजारों-करोड़ो के टेंडर में एल-1 बिड को मॉडिफाई किया गया और चहेती कम्पनियों को टेंडर अवार्ड किये गये. अत्याधिक टेंडर में इस प्रकार के घपले किये जिससे यह स्पष्ट होता है कि सिग्नेचर वेरिफाई की के द्वारा एल-1 बिड मॉडिफाई होने की पुष्टी के पश्चात् ही टेंडर अवार्ड किये गये. संबधित विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव, मुख्य अभियंता, नोडल अधिकारी एवं टेंडर ओपनिंग अथोरिटी की इसमें बराबर की भागीदारी है. यह सिर्फ त्रुटि और लापरवाही नहीं है जानबूझकर चहेतों को लाभ पहुंचाने की सुनियोजित साजिश है.
5- द बेनिफीसयरी: किसी भी फ्रॉड में हमेशा बेननिफीसयरी होता है . विभिन्न कम्पनियां जिनके एल-1 बिड मॉडिफाई किये गये उन्हें टेंडर प्राप्त होने का लाभ मिला वे सभी फ्रॉडूलेंट एक्टिविटी में शामिल हैं . संपूर्ण गतिविधियां बेक एंड में आॅस्मो आईटी सॉल्यूेशन एवं एंथरेक्स कंपनी के द्वारा तथा फ्रंट एंड में संबधित विभागों के द्वारा की गई जिससे चहेते बिडर को लाभ पहुंचाया गया .
6- एमपीएसईडीसी का रोल : टेंडर अवार्ड करने में एमपीएसईडीसी की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि एमपीएसईडीसी के द्वारा नियमित रूप से हार्डवेयर एंड सॉफ्टवेयर आॅडिट किया गया तथा जितनी शिकायतें प्राप्त हुई उनका वेरिफिकेशन किया गया और सभी में एंथरेक्स कंपनी सही होने का सर्टिफिकेट दिया गया .
नंबर की छानबीन करें ..घोटाले के सभी किरदार सामने आ जाएंगे
सिंह ने पत्र में लिखा कि जिन मुख्य विभागों के टेंडर में फर्जीकरण हुआ वह जल संसाधन, पीडब्ल्यूडी, जल निगम, नर्मदा घाटी, नगरीय कल्याण इत्यादी हैं. इन विभागों के अधिकारी संदेह के दायरे में हैं. यहां मैं आॅस्मो आईटी सॉल्यू शन कंपनी के कर्ता-धर्ता विनय चौधरी का उल्लेख करना चाहूंगा. श्री चौधरी वर्ष 2006 में जब मध्यप्रदेश में ई-टेंडर की शुरूआत हुई थी तब नेक्सटेंडर कंपनी में काम करते थे. एमपीएसईडीसी के द्वारा परफॉरमेंस टेस्टिंग के लिए इसे इम्पैनल किया गया था. इनका बरबई में आईटी पार्क है, जिसे नियमों के विपरीत जाकर भूमि आवंटित की गई है. इनका मोबाईल नंबर 9755092919 है, अगर इसके कॉल डिटेल निकालकर जांच करवाई जाए तो इस घोटाले के सभी किरदार सामने आ जाएंगे. नेता प्रतिपक्ष ने उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि ई-टेंडर के माध्यम से चहेती कम्पनियों को टेंडर अवार्ड करना हेकिंग नहीं है, बल्कि गलत से गतिविधियों के लिये आपराधिक षडयंत्र एवं भ्रष्ट आचरण है. जबकि हेकिंग के लिये सिस्टम में अनाधिकृत एक्सेस की जाती है किन्तु एंथरेक्स के सिस्टम में दो फायर बाल, एक्सटर्नल एवं इन्टरनल तथा इन्ट्रक्सन प्रेवेनशन सिस्टम, स्टेट डाटा सेंटर द्वारा डिप्लोय किये गये थे जिससे अनाधिकृत एक्सेस को रोका जा सके तथा इस पोर्टल की नियमित रूप से थर्ड पार्टी आॅडिट डिलोइट कंपनी द्वारा प्रत्येक माह एवं पीडब्ल्यूसी द्वारा लास्ट एप्लीकेशन सिक्युरिटी एवं वेप्ट आॅडिट कराया गया. सभी आॅडिट में जो भी पाईंट रेस किये गये उनका निराकरण एमपीएसईडीसी द्वारा कराया गया.

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