शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

फसलों पर एमएसपी बढ़ाने का फैसला किसानों से धोखा

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने मोदी सरकार द्वारा वर्ष 2018-19 के लिए 14 खरीफ फसलों के एमएसपी बढ़ाने के लिए निर्णय को चुनावी लालीपाप व किसानों से बड़ा धोखा बताया है.
उन्होंने कहा कि सरकार का उक्त निर्णय कृषि लागत व मूल्य आयोग की वर्ष 2017.18 की सिफारिशों पर भी खरा नहीं उतर रहा है और कृषि लागत व मूल्य आयोग की 2018-19 की सिफारिशों को तो सरकार दबा कर बैठी है. वैसे भी एमएसपी बढ़ाने का निर्णय 4 साल की मोदी सरकार ने अगले वर्ष 2018.19 की खरीफ फसलों को लेकर लिया है. जब तक चुनाव हो चुके होंगे और वह सत्ता से बाहर होगी. इसलिए यह किसानों के साथ धोखा है.  नाथ ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2014 के चुनावों के समय स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर लागत $ 50 प्रतिशत का आंकलन सी-2 के आधार पर (यानि भूमि का जो किराया है, उसको शामिल कर देंगे) देने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने ए-2$ एफएल लागत के आधार पर एमएसपी देने का निर्णय लेकर किसानों के साथ धोखा किया है. 
कमलनाथ ने कहा कि सरकार यह भी झूठ बोल रही है कि धान में 200 रुपए की बढ़ोतरी अभी तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है. कांग्रेस की यूपीए सरकार के समय वर्ष 2009 से 2014 तक धान की फसल में 420 रुपए की बढ़ोतरी थी. यूपीए सरकार के समय एमएसपी में एवरेज बढ़ोतरी 12 प्रतिशत थी. जबकि मोदी सरकार में यह 2.5 प्रतिशत को भी पार नहीं कर पाई.  नाथ ने कहा कि देश का हर किसान अभी संपूर्ण कर्ज माफी, खेती को लाभ का धंधा बनाना व स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कराना चाहता है, वो ऐसी किसी भी चुनावी घोषणा के झांसे में आने वाला नहीं है. मध्यप्रदेश में तो पहले से ही खेती घाटे का धंधा बन चुकी है. कर्ज के बोझ से प्रतिदिन किसान आत्महत्या कर रहे है. पिछले 3 दिनों में भी 3 किसानों ने कर्ज के बोझ से आत्महत्या की है. यहां के किसान पुत्र मुखिया खुद किसानों को खेती घाटे का धंधा बता, खेती छोड़ने की सलाह दे चुके हैं. इस निर्णय से उन्हें कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है. 

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