बुधवार, 4 जुलाई 2018

मुख्यमंत्री जो कहें उस पर अमल भी करें

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सवाल किया है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट हर जिले में बनाने की घोषणा तो उन्होंने निर्भया कांड 2012 में हुआ था तब की थी और अब वे सीजेआई को पत्र लिख रहे हैं, क्या प्रदेश में सभी जगह यह कोर्ट स्थापित हो गए हैं. 
सिंह ने कहा कि बच्चियों और महिलाओं के साथ होने वाले दुष्कर्म जैंसे संवेदनशील मामलों में भी मुख्यमंत्री सिर्फ शिगुफेबाजी करते हैं जो यह बताता है कि घटनाओं पर रोकथाम से ज्यादा उनकी रूचि घटनाओं के समय अपने चेहरे पर लगी कालिख को छुपाना ही होता है.
नेता प्रतिपक्ष ने हाल ही में मंदसौर सतना और जबलपुर में बच्चियों और महिलाओं के साथ हुए शारीरिक अत्याचार को घिनौना कृत्य बताते हुए कहा कि इन घटनाओं पर गंभीरता के साथ ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है. सिंह ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने हमेशा प्रदेश में इस तरह की घटनाओं पर राजनीति की और शिगुफेबाजी की. सिंह ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि उन्होंने 28 फरवरी 2012 को मध्यप्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा था कि महिलाओं पर होने वाले अपराधों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे. वर्ष 2013 में भी 138 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित होंगे, यह बात कही थी. उन्होंने यह भी कहा था कि उत्पीड़न के मामले में प्रतिदिन सुनवाई होगी. महिला प्रकरणों की सुनवाई के लिए 52 सत्र और 86 निचली अदालते स्थापित की जाएंगी. मुख्यमंत्री बताएं कि क्या ऐसा वे पिछले 5 साल में कर पाए. सिंह ने कहा कि मंदसौर सतना घटना की कालिख लगते ही मुख्यमंत्री ने अब फिर शिगुफेबाजी की और भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कह दी. पिछले चार साल में उन्होंने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया.

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