मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में हुए हादसे में करीब 10 घंटे तक चले राहत और बचाव अभियान के बाद नदी के बीच में फंसे सभी 45 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है. हादसे में करीब 11 लोगों के बहने की खबर है, जिनकी खोजबीन जारी है.
शिवपुरी जिले के सुल्तानगढ़ जलप्रपात में बुधवार की दोपहर को करीब साढ़े तीन बजहे पानी अधिक होने के कारण एक चट्टान पर फंसे 45 लोगों को सुरक्षित बचा लिया. इनमें से 6 लोगों को कल देर शाम ही हेलीकाप्टर से निकाल लिया गया था. शेष सभी को देर रात करीब ढ़ाई बजे रस्सियों और अन्य माध्यमों से निकाल लिया गया. इस पूरे बचाव कार्य में तीन स्थानीय युवकों का अहम योगदान बताया जा रहा है. मोहना निवासी तीन युवकों कल्लू बाथम, रामसेवक प्रजापति एवं निशात खान ने पानी में फंसे लोगों को निकलवाने के लिए पुलिस एवं प्रशासन का विशेष सहयोग किया. इन तीनों युवकों को इस क्षेत्र की अच्छी जानकारी थी.
जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर शिवपुरी और ग्वालियर जिले की सीमा पर स्थित इस प्राकृतिक पर्यटन स्थल पर कल स्वतंत्रता दिवस के अवकाश के दौरान करीब 400 से ज्यादा लोग पहुंचे थे. इनमें से कई लोग पानी के भीतर भी थे. अचानक पानी बढ़ने से करीब 11 लोग बह गए, वहीं 45 लोग एक चट्टान पर फंस गए. हादसे की सूचना मिलने के बाद भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, होमगार्ड और प्रदेश पुलिस ने संयुक्त तौर पर बचाव अभियान चलाया. स्थानीय लोगों ने भी प्रशासनिक अमले की पूरी मदद की.
मुख्यमंत्री ने कहा बचाने वालों का होगा सम्मान
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शिवपुरी जिले के बाढ़ में फंसे 45 व्यक्तियों की जिंदगी बचाने वालों का सम्मान करेंगे. सम्मान निधि के रूप में उन्हें पांच-पांच लाख रुपए प्रदान किए जाएंगे. चौहान ने जनता से अपील की है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात का पानी तेजी से आता है, जिससे छोटे नाले भी उफनने लगते हैं. ऐसे स्थानों पर जाते समय सावधानी रखें. जीवन बहुमूल्य है. मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे बताया गया है कि बाढ़ में फंसे 6 व्यक्तियों विशाल चौहान, श्रीकांत कुशवाह, अभिषेक कुशवाह, लोकेश कुशवाह, रवि कुशवाह और सुशील कुशवाह की तलाश जारी हैं.
केन्द्रीय मंत्री भी रहें संपर्क में
मुख्यमंत्री शिवरजासिंह चौहान ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ सम्पर्क कर बचाव और राहत के प्रयास किए गए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि रात्रि तीन बजे तक वे स्वयं स्थिति की निगरानी करते रहे. बचाव कार्यों की सफलता के लिए यह आवश्यक था कि फंसे हुए लोग हिम्मत नहीं खोए. केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्रसिंह तोमर और प्रदेश की खेल एवं युवक कल्याण मंत्री यशोधरा राजे ने भी घटना स्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य की जानकारी ली थी.
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