गुरुवार, 16 अगस्त 2018

मध्यप्रदेश में गोंगपा ने मिलाया सपा से हाथ

अखिलेश यादव 

 बसपा से भी गठबंधन के तेज हुए प्रयास
मध्यप्रदेश कांग्रेस को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने  गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला कर लिया. इस बात पर लखनऊ में हुई बैठक में मोहर लग गई. अब मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ में सपा और गोंगपा मिलकर चुनाव लड़ेंगे. दोनों राज्यों में ये दल बसपा के साथ भी गठबंधन कर मैदान में उतर सकते हैं, इस बारे में बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के साथ उनकी चर्चा जारी है.
मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को इस बात का पूरा विश्वास था कि बसपा के अलावा सपा और गोंगपा के साथ गठबंधन करके चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर ली थी, मगर कांग्रेस के इस मंसूबे पर अखिलेश यादव ने पानी फेर दिया. अखिलेश यादव ने भोपाल यात्रा के लिए दौरान प्राय: सभी छोटे दलों के साथ मुलाकात की थी, इसके अलावा वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से भी मिले थे. साथ ही उन्होंने इस बात के संकेत दिए थे कि अगर कांग्रेस के साथ सम्मानजनक स्थिति में टिकट का बंटवारा नहीं होता है तो वे अपने बूते पर चुनाव मैदान में उतरेंगें.
हीरासिंह मरकाम 
अखिलेश ने जब उनके दल सपा के बजाय बसपा की ओर कांग्रेस का छुकाव ज्यादा देखा तो उन्होंने राजनीति समीकरण बदलते हुए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम से हाथ मिलाना उचित समझा. इसके बाद उन्होंने मंगलवार को हीरासिंह मरकाम के साथ लखनऊ में बैठक की. यह बैठक करीब आधा घंटे तक चली. इस बैठक में यह तय हुआ कि सपा और गोंगपा दोनों दल मिलकर मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ में चुनाव मैदान में उतरेंगे. 
 गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री श्याम मरकाम ने की है. मरकाम ने बताया कि लखनऊ में उनकी चर्चा अखिलेश यादव से हुई है. चर्चा में तय हो गया है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्यों में वे चुनाव मैदान में समाजवादी पार्टी के साथ मैदान में उतरेंगे. इस चर्चा में अभी सीटों के बंटवारे को लेकर मंथन नहीं हुआ है. यह जल्द कर लिया जाएगा.
यहां उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी की स्थिति मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्यों में वर्तमान में उतनी अच्छी नहीं है. जबकि गोंगपा के हालत भी अब पूर्व जैसे नहीं है. मध्यप्रदेश में वर्तमान में गोंगपा का प्रभाव सिमटकर आधा दर्जन सीटों तक रह गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर उसका अपना वोट बैंक है. अभिवाजित मध्यप्रदेश से जरुर दादा हीरासिंंह मरकार विधायक रहे थे, मगर जब मध्यप्रदेश से विभाजित होकर छत्तीसगढ़ राज्य अलग बना तो गोंगपा का विधायक वहां नहीं चुना गया. सपा यहां पर गोंगपा के वोट बैंक के सहारे चुनाव मैदान में उतरेगी और अपना मत प्रतिशत बढ़ाने का प्रयास करेगी, जबकि गोंगपा छत्तीसगढ़ में अपना विधायक जीतने का प्रयास करेगी.

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