प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने बुधवार को स्तनपान सप्ताह के शुभारंभ अवसर पर खण्डवा के गौरीकुंज में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि जन्म के बाद बच्चे का पहला अधिकार स्तनपान करना है. उन्होंने कहा कि स्तनपान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर वर्ष 1 से 7 अगस्त तक स्तनपान सप्ताह आयोजित किया जाता है. लेकिन इस बार वर्षभर ही स्तनपान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे.
महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री चिटनिस ने इस अवसर पर कहा कि स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में आज से एक नया अभियान प्रारंभ किया जा रहा है, जिसका नाम है हाँ मैंने माँ का दूध पिया है. कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री चिटनिस ने नवजात शिशुओं की माताओं को स्वागतम लक्ष्मी किट वितरित की. साथ ही लाड़ली लक्ष्मी योजना व प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के हितग्राहियों को प्रमाण पत्र वितरित किए. इसके अलावा उन्होंने पिंक ड्राइविंग लायसेंस भी छात्राओं को इस दौरान प्रदान किए.
महिला एवं बाल विकास मंत्री चिटनिस ने अपने संबोधन में कहा कि हर मॉ को अपने बेटो को यह सिखाना चाहिए कि वह अपनी पत्नी के पोषण का विशेष ध्यान रखे और उन्हें पोष्टिक आहार खिलाएं. उन्होंने संबल योजना के तहत भी अब सरकार गर्भवस्था में महिलाओं को पोषण आहार व अन्य जरूरतों की पूर्ति के लिए 16 हजार रुपए की मदद दे रही है. उन्होंने बताया कि एनीमिया से बचने के लिए आयरन युक्त भोजन तो जरूरी है ही लेकिन यह आयरन शरीर को तभी फायदा करता है जबकि आयरन के साथ विटामिन सी भोजन में शामिल हो. इसीलिए प्राचीन काल से भारतीय भोजन में चटनी, सलाद, निम्बू आदि का प्रयोग किया जाता रहा है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले मात्र 33 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में होते थे अब प्रदेश सरकार के प्रयासों से 88 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में होने लगे है, जिससे मातृ मृत्यु दर में बहुत कमी आयी है. महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने कहा कि गर्भवस्था से ही महिलाओं को स्तनपान के महत्व के बारे में समझा देना चाहिए तथा उन्हें सिखा देना चाहिए कि बच्चे के जन्म के 6 माह बाद तक बच्चों को केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए.
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