मंगलवार, 14 अगस्त 2018

मध्यप्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री की पत्नी, भतीजे को बैंक का विलफुल नोटिस

सुरेन्द्र पटवा 
 मध्यप्रदेश के संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा की बढ़ी मुश्किलें
मध्यप्रदेश के पर्यटन मंत्री सुरेन्द्र पटवा फिर से मुश्किल में फंस गए हैं. बैंक आफ बड़ौदा ने 36 करोड़ का लोन न चुकाने के मामले में विलफुल डिफाल्टर घोषित करने के लिए शोकाज नोटिस जारी कर दिया है. पटवा की फर्म पटवा आटोमेटिव में मध्यप्रदेश के पूर्व  मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुंदरलाल की पत्नी फूलकुंवर और पटवा परिवार के  सदस्य शामिल हैं.
बैंक आफ बड़ौदा ने लोन लेकर न चुकाने के मामले में राज्य के पर्यटन और संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा को विलफुल नोटिस जारी कर कहा कि वे बताएं कि कब तक लोन की राशि चुकाएंगे, अन्यथा आरबीआई की गाइड लाइन के अनुसार डिफाल्टर घोषित कर वसूली की कार्रवाई की जाएगी. पटवा ने पटवा आटोमोटिव प्रायवेट लिमिटेड कंपनी लसूड़िया मोरी देवास नाका इंदौर के लिए 36 करोड़ का लोन लिया था, लेकिन लोन नहीं चुकाया.  बैंक ने उनकी संपत्ति को सीज कर लिया, इसके बाद भी बैंक को लोन की पूरी राशि नहीं मिल पाई. पटवा की इस कंपनी में उनके अलावा उनकी पत्नी मोनिका पटवा, भाई भरत पटवा, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की पत्नी फूलकुंवर पटवा सहित परिवार के सात सदस्य शामिल हैं. बैंक द्वारा पूर्व में भी नोटिस जारी किया गया था, इसके बाद कंपनी की संपत्ति को सीज कर लिया गया.  बैंक ने आज अखबारों में विज्ञापन देकर मंत्री पटवा को 15 दिन का समय दिया है कि वे जवाब दें. इसके बाद बैंक उन्हें डिफाल्टर घोषित करने की कार्रवाई कर सके. 
उल्लेखनीय है कि पटवा के खिलाफ  इंदौर की ही एक फर्म से ब्याज पर 10 लाख रुपए उधार लेने के मामले में चेक बाउंस होने पर रुपए उधार देने वाली फर्म ने जिला अदालत में पटवा के खिलाफ परिवाद दर्ज करा दिया था.
क्या होता है विलफुल डिफाल्टर 
भारतीय रिजर्व बैंक की गाइड लाइन के अनुसार कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों को चार परिस्थितियों में विलफुल नोटिस जारी करता है. यह नोटिस जब जानबूझकर कज नहीं लौटाया जाए तब जारी किया जाता है. नोटिस जब देय तिथि को ग्राहक की वित्तीय क्षमता होने के बाद कर्ज की किस्त न लौटाए, कर्ज की राशि का इस्तेमार उस कार्य के लिए नहीं किया जाए, जिसके लिए लोन लिया गया, कर्ज की राशि का इस्तेमार संपत्ति निर्माण के लिए नहीं किया गया हो. कर्ज की राशि से खरीदी गई संपत्ति कोकिसी दूसरे पक्ष को बगैर बैंक या वित्तीय संस्थान को जानकारी दिए बेच दिया जाए. 

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