रविवार, 5 अगस्त 2018

कांग्रेस मौन, ऊहोपोह में मध्यप्रदेश के छोटे दल

गठबंधन को लेकर छोटे दल तो सक्रिय, मगर कांग्रेस नहीं खोल रही  पत्ते

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव को गठबंधन को लेकर कांग्रेस के मौन और इस मुद्दे पर धीमी गति से विचार-विमर्श किए जाने से राज्य के छोटे दलों के नेता अब आहत नजर आ रहे हैं. इन नेताओं का मानना है कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर जल्द ही कोई निर्णय लेना चाहिए, ताकि समय रहते सीटों का बंटवारा हो और सभी दल ताकत के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता दिखाएं.
मध्यप्रदेश में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस के अलावा छोटे और क्षेत्रीय दलों में भी सक्रियता दिखाई दे रही है. इन दलों को हाल ही में संजीवनी तब मिली जब लोक तांत्रिक जनता दल के संयोजक गोविंद यादव द्वारा आयोजित किए गए लोक क्रांति सम्मेलन में शरद यादव की उपस्थिति में राज्य के छह प्रमुख छोटे दलों ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में अपनी रणनीति बनाई. इस संबंध में शरद यादव ने कांग्रेस की समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजयसिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव से भी चर्चा की. सूत्रों की माने तो शरद यादव के साथ हुई कांग्रेस नेताओं की चर्चा के बाद छोटे दलों के नेताओं को उम्मीद थी कि कांग्रेस नेता उनसे इस संबंध में कोई चर्चा करेंगे. मगर अब तक कांग्रेस की ओर से इन दलों के नेताओं के पास किसी तरह की कोई चर्चा नहीं की गई. छोटे दलों विशेषकर बहुजन संघर्ष दल, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, समानता दल के अलावा भाकपा और माकपा को इस बात की उम्मीद है कांगे्रस के साथ गठबंधन करके वे भाजपा को करारी शिकस्त देंगे, मगर जब कांग्रेस की ओर से इस मामले में कोई संकेत नहीं मिल रहे तो इन दलों के नेता आहत नजर आ रहे हैं. इन नेताओं को यह उम्मीद थी कि अगर कांग्रेस इस मामले को लेकर जल्द ही सक्रियता दिखाए तो यह उसके लिए और उन दलों के लिए भी फायदे की बात होगी. 
यादव को राजधानी भोपाल लाकर इन दलों ने कांग्रेस को एक तरह से खुला संदेश दे दिया है कि वे कांग्रेस के साथ गठबंधन को तैयार हैं. कांग्रेस अपनी रणनीति तय कर अगर बसपा और सपा के साथ-साथ इन दलों से भी गठबंधन करती है तो यह गठबंधन प्रदेश में महागठबंधन के रुप में उभरेगा और भाजपा के लिए मुसीबत भी बन सकेगा. 
नहीं हुआ गठबंधन तो आधा दर्जन दल साथ मिलकर लड़ेंगे चुनाव
लोक क्रांति सम्मेलन में शामिल होने वाले सभी दल बहुजन संघर्ष दल, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, माकपा, भाकपा, समानता दल और लोक तांत्रिक जनता दल की रणनीति है कि अगर कांग्रेस के साथ उनका कोई समझौता नहीं हुआ तो वे आपस में गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे. इन दलों का आकलन है कि अगर वे ऐसा करते हैं तो इससे नुकसान भाजपा के अलावा कांग्रेस को भी होगा. विशेषकर ग्वालियर-चंबल एवं बुंदेलखंड में बहुजन संघर्ष दल से और महाकौशल के अलावा विंध्य के कुछ क्षेत्रों में गोंगपा से कांग्रेस और भाजपा को क्षति होगी. इस क्षति में कांग्रेस का वोट बैंक अधिक संख्या में बंटेगा और भाजपा को इससे फायदा भी होगा.
कांग्रेस को लेना चाहिए जल्द फैसला
बहुजन संघर्ष दल के प्रमुख फूलसिंह बरैया का कहना है कि हमने अपना संदेश शरद यादव के माध्यम से कांग्रेस को भेज दिया है. अब कांग्रेस को इस पर निर्णय लेना है. कांग्रेस नेताओं को इस पर जल्द ही फैसला करके सीटों का बंटवारा कर लेना चाहिए. हम भी कुछ सीटें छोड़ने को तैयार हैं. वैसे अपने प्रदेश में 170 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है.
रणनीति नहीं है कांग्रेस नेताओं के पास
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के मनमोहन शाह बट्टी का कहना है कि छोटे दलों की ओर से जो भी संदेश कांग्रेस को दिया है, उस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और सभी कांग्रेस नेताओं को बैठक कर छोटे दलों के साथ अपनी रणनीति को तय करना चाहिए. अगर कांग्रेस द्वारा कोई फैसला जल्द नहीं लिया तो हमारी ओर से हमारी प्रभाव वाली विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है. हम मैदान में हैं और जनता के बीच अपना काम कर रहे हैं.
फैसला कांग्रेस के हाथ में
लोक तांत्रिक जनता दल के गोविंंद यादव ने कहा कि तीसरे मोर्चे के गठबंधन के लिए कांग्रेस के लिए प्लेटफार्म तैयार कर दिया. खुद हमारे  नेता शरद यादव ने कांग्रेस नेताओं से चर्चा की. इस प्रस्ताव पर कांग्रेस को जल्द विचार करना चाहिए. समय रहते विचार किया गया तो सभी दल अपनी रणनीति के साथ मैदान में मोर्चा खोलेंगे, नहीं तो अपने-अपने हिसाब से तो वे मैदान में उतरेंगे ही.

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