प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि पिछले वर्ष दो जुलाई को शिवराज सरकार द्वारा प्रदेश भर में नर्मदा नदी के तटों पर 6 करोड़ 67 लाख पौधे लगाने का दावा किया गया था और इस रिकार्ड को गिनीज बुक में शामिल करने का दावा भी किया गया था. बाद में इस पौधारोपण के नाम पर जमकर फर्जीवाड़े का खेल सामने आया. दावा करोड़ों का किया गया, लेकिन निकले सैकड़ों भी नहीं. गड्डे करने से लेकर पौधे खरीदने तक जमकर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया. सरकारी खजाने से करोड़ों रूपये पौधारोपण के नाम पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिये गये. एक वर्ष बाद भी आज तक यह पौधारोपण अभियान गिनीज बुक में शामिल नहीं हो पाया, क्योंकि सरकार इन पौधों को सत्यापित ही नहीं कर पायी. जबकि सरकार के दावे के अनुसार 1 लाख 17 हजार 293 रोपण स्थानों पर पौधारोपण किया गया.
नाथ ने राज्य योजना आयोग की उस रिपोर्ट को भी सार्वजनिक करने की मांग की है, जिस रिपोर्ट के अंदर पिछले वर्ष रोपे गये पौधों की वास्तविक संख्या को सत्यापित किया गया था. सरकार ने जानबूझकर उस रिपोर्ट को दबा दिया क्योंकि उस रिपोर्ट से सरकार के पौधारोपण की वास्तविकता उजागर हो जाती.
नाथ ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह ने पिछले पौधारोपण के तर्ज पर इस वर्ष भी बड़े पौधारोपण अभियान की घोषणा की थी, जिसके तहत इस वर्ष 15 जुलाई से 15 अगस्त तक प्रदेश की 313 नदियों के केचमेंट एरिया में एक माह तक पौधारोपण अभियान चलाने की घोषणा कर, 8 करोड़ पौधे लगाने का दावा किया था. इस अभियान का एक माह पूर्ण हो चुका है. इस अभियान के दौरान विभिन्न जिलों से पौधे खरीदने व फर्जीवाड़े की खबरे आती रहीं. कहीं मुरझाये पौधे खरीदे गये, कहीं जानबूझकर पौधों को मुरझाने के लिये छोड़ दिया गया. कहीं गड्डे खोदकर छोड़ दिये गये.
नाथ ने कहा कि सरकार स्पष्ट करें कि प्रदेश की वह कौन सी 313 नदियां हैं, जिसके कैचमेंट एरिया में इस वर्ष पौधारोपण अभियान चलाया गया? किन-किन जिलों में पौधारोपण के क्या आंकड़े हैं? कितने रूपये इस अभियान के नाम पर खर्च किये गये? प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों ने कब-कब, किन-किन स्थानों पर इस पौधारोपण अभियान में भाग लिया? इस बार का पौधारोपण का वास्तविक आंकड़ा क्या है?
नाथ ने आरोप लगाया कि इस बार भी पौधारोपण अभियान के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े की खबरें आ रही हैं. दावा 313 नदियों के कैचमंट एरिया में 8 करोड़ पौधे लगाने का किया गया लेकिन स्थिति इसके बिलकुल विपरीत है. पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी कागजों में खरीदी दिखाकर आंकड़ों के खेल खेलने की तैयारी है. जबकि जमीनी हकीकत में ये पौधे कहीं नजर नहीं आयेंगे. पिछले वर्ष तो सरकार को पौधारोपण घोटाला छिपाने के लिए पांच बाबाओं को मंत्री बनाना पड़ा. देखना दिलचस्प होगा कि इस बार पौधारोपण के फर्जीवाड़े की आड़ में कितने नये मंत्री बनाये जायेंगे और कितने रथ इन पौधों को गिनने के नाम पर सरकार को ब्लैकमेल करने के लिये तैयार होंगे?
नाथ ने कहा कि सरकार द्वारा स्थान व संख्या स्पष्ट करने के बाद इन पौधों की वास्तविकता जानने के लिए कांग्रेस के लोगों को भेजकर इस अभियान की वास्तविकता जानी जायेगी और इस भ्रष्टाचार के फर्जीवाड़े के खेल की वास्तविकता को जनता के बीच उजागर किया जायेगा.
नाथ ने राज्य योजना आयोग की उस रिपोर्ट को भी सार्वजनिक करने की मांग की है, जिस रिपोर्ट के अंदर पिछले वर्ष रोपे गये पौधों की वास्तविक संख्या को सत्यापित किया गया था. सरकार ने जानबूझकर उस रिपोर्ट को दबा दिया क्योंकि उस रिपोर्ट से सरकार के पौधारोपण की वास्तविकता उजागर हो जाती.
नाथ ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह ने पिछले पौधारोपण के तर्ज पर इस वर्ष भी बड़े पौधारोपण अभियान की घोषणा की थी, जिसके तहत इस वर्ष 15 जुलाई से 15 अगस्त तक प्रदेश की 313 नदियों के केचमेंट एरिया में एक माह तक पौधारोपण अभियान चलाने की घोषणा कर, 8 करोड़ पौधे लगाने का दावा किया था. इस अभियान का एक माह पूर्ण हो चुका है. इस अभियान के दौरान विभिन्न जिलों से पौधे खरीदने व फर्जीवाड़े की खबरे आती रहीं. कहीं मुरझाये पौधे खरीदे गये, कहीं जानबूझकर पौधों को मुरझाने के लिये छोड़ दिया गया. कहीं गड्डे खोदकर छोड़ दिये गये.
नाथ ने कहा कि सरकार स्पष्ट करें कि प्रदेश की वह कौन सी 313 नदियां हैं, जिसके कैचमेंट एरिया में इस वर्ष पौधारोपण अभियान चलाया गया? किन-किन जिलों में पौधारोपण के क्या आंकड़े हैं? कितने रूपये इस अभियान के नाम पर खर्च किये गये? प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों ने कब-कब, किन-किन स्थानों पर इस पौधारोपण अभियान में भाग लिया? इस बार का पौधारोपण का वास्तविक आंकड़ा क्या है?
नाथ ने आरोप लगाया कि इस बार भी पौधारोपण अभियान के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े की खबरें आ रही हैं. दावा 313 नदियों के कैचमंट एरिया में 8 करोड़ पौधे लगाने का किया गया लेकिन स्थिति इसके बिलकुल विपरीत है. पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी कागजों में खरीदी दिखाकर आंकड़ों के खेल खेलने की तैयारी है. जबकि जमीनी हकीकत में ये पौधे कहीं नजर नहीं आयेंगे. पिछले वर्ष तो सरकार को पौधारोपण घोटाला छिपाने के लिए पांच बाबाओं को मंत्री बनाना पड़ा. देखना दिलचस्प होगा कि इस बार पौधारोपण के फर्जीवाड़े की आड़ में कितने नये मंत्री बनाये जायेंगे और कितने रथ इन पौधों को गिनने के नाम पर सरकार को ब्लैकमेल करने के लिये तैयार होंगे?
नाथ ने कहा कि सरकार द्वारा स्थान व संख्या स्पष्ट करने के बाद इन पौधों की वास्तविकता जानने के लिए कांग्रेस के लोगों को भेजकर इस अभियान की वास्तविकता जानी जायेगी और इस भ्रष्टाचार के फर्जीवाड़े के खेल की वास्तविकता को जनता के बीच उजागर किया जायेगा.
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