रविवार, 12 अगस्त 2018

कमलनाथ के दौरे के पहले उभरे मतभेद

कमलनाथ
मध्यप्रदेश कांग्रेस में अंतर्कलह बंद नहीं हो रही है. जैसे-तैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एकजुटता का संदेश दे रहे हैं, वहीं कांग्रेस  के लिए कार्यकर्ता और जिलों के पदाधिकारी चिंता का कारण बनते जा रहे हैं. कमलनाथ ने लंबे समय के बाद अपने प्रदेश के दौरे तय किए, उसके पहले ही मतभेद उभरने लगे हैं.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से कमलनाथ ने बैठकों के सहारे पार्टी को मजबूत करने का प्रयास तो किया, मगर वे कुछ हद तक ही सफल हो पाए. कांग्रेस की गुटबाजी और अंतर्कलह को वे अब तक शांत नहीं कर पाए. भाजपा द्वारा बयानबाजी कर जब कमलनाथ को छिंदवाड़ा जिले का नेता साबित करने का प्रयास किया तो नाथ ने अपना प्रदेश दौरा तय कर दिया. इसी दौरे कार्यक्रम के तहत उन्हें 20 अगस्त को हरदा जिले का दौरा करना था, उसके पहले वहां पर गुटबाजी और नाराजगी उभरती नजर आई. हरदा के ब्लाक कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष अब्दुल सलाम ने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों की उपेक्षा को देखते हुए वे इस्तीफा दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि ब्लाक अध्यक्ष पद पर पिछले तीस सालों से अल्पसंख्यक वर्ग के खातें यह पद था. मगर इस बार पार्टी ने कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर समाज की जनभावना को ठेस पहुंचाई है. उन्होंने यह निर्णय समाज की बैठक लेने के बाद ही लिया है. हरदा जिला कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पंवार ने इस बात की पुष्टि की है कि सलाम ने इस्तीफा दिया है. उनके पास इस्तीफा स्वीकार करने के अधिकार  नहीं हैं. इसके लिए उन्होंने बताया कि सलाम का इस्तीफा प्रदेश संगठन को भेज दिया है. 
हरदा के अलावा कांग्रेस की होशंगाबाद जिला इकाई में भी पदाधिकारियों के बीच खींचतान तेज हो गई है. यहां पर गुपचुप तरीके से जिला इकाई का गठन किए जाने से स्थानीय नेता वर्तमान पदाधिकारियों से खफा हैं.
उल्लेखनीय है कि सलाम के पूर्व हरदा जिले के खिरकिया ब्लाक के कार्यकारी अध्यक्ष ने भी इस्तीफा दे दिया है. इसी तरह विधायक आर.के. दोगने से नाराज होकर हरदा के ही पार्षद मुन्ना पटेल ने भी पद से इस्तीफा दे चुके हैं.

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