मध्यप्रदेश में भाजपा, कांग्रेस के लिए मुसीबत बन रहा सपाक्स संगठनमध्यप्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव का माहौल गर्मा रहा है, वैसे-वैसे सरकार के खिलाफ सामाजिक संगठनों, किसानों के अलावा कर्मचारियों की नाराजगी भी सामने आ रही है. लंबे समय से पदोन्नति में आरक्षण बंद करने की मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहे संगठन सपाक्स ने अब सरकार के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों के खिलाफ मोर्चा खोला है. सपाक्स की युवा इकाई ने अभियान चलाकर घरों पर यह लिख दिया है कि ‘कृपया जातिगत आरक्षण एवं दलित उत्पीडन एक्ट के समर्थक राजनीतिक दल वोट मांग कर शर्मिंदा न करें.’
मध्यप्रदेश में सपाक्स की युवा इकाई के अलावा सपाक्स संगठन से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों ने अब सरकार के अलावा उन सभी राजनीतिक दलों के खिलाफ मोर्चा खोला है जो पदोन्नति में आरक्षण के समर्थक हैं. पहले तो सपाक्स संगठन का पूरा निशाना प्रदेश की शिवराज सरकार पर था, मगर अब संगठन और संगठन की युवा इकाई ने उन सभी राजनीतिक दलों के खिलाफ मोर्चा खोला है, जो आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं साथ ही दलित उत्पीडन एक्ट का समर्थन कर रहे हैं.
चुनाव मैदान में उतरने को आतुर इस संगठन द्वारा अपनी मांगों को लेकर जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी मोर्चा खोला हुआ है. संगठन द्वारा अपनी लंबित मांगों को लेकर जनप्रतिनिधियों को एक ज्ञापन सौंपा जा रहा है, साथ ही उन्हें ‘चुल्लू भर पानी’ दिया जा रहा है. इस पानी देने का आशय साफ है कि वे जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर यह संदेश दे रहे हैं कि अगर वे उनकी मांगों का समर्थन नहीं करते हैं या फिर उनके समर्थन में सरकार पर दबाव नहीं बना सकते हैं तो उन्हें पद पर रहने का अधिकार नहीं है. यह अभियान सपाक्स द्वारा पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है.
मध्यप्रदेश में सपाक्स संगठन से सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस भी जुड़ गए हैं. इन सेवानिवृत्त अधिकारियों के जुड़ने से सपाक्स संगठन को और भी ताकत मिली है. साथ ही संगठन ने विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी है. इस घोषणा के बाद भाजपा के लिए संकट खड़ा हुआ था, मगर अब जिस तरह से संगठन ने सोशल मीडिया पर ‘कृपया जातिगत आरक्षण एवं दलित उत्पीडन एक्ट के समर्थक राजनीतिक दल वोट मांग कर शर्मिंदा न करें.’ अभियान चलाया है, उससे कांग्रेस के लिए भी संकट खड़ा हो गया है.
सपाक्स संगठन के उद्देश्य
* सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारियों, कर्मचारियों के कार्मिक कार्य में गुणात्मक सुधार लाने हेतु कार्य करना एवं इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु ऐसे कार्मिकों को संगठित कर संस्था का सदस्य बनाना.
* सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के शासकीय सेवकों का हितरक्षण करना.
* सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के शासकीय सेवकों की सेवा, कार्य, प्रशासन से संबंधित कठिनाईयों एवं समस्याओं के समाधान हेतु प्रयासरत रहना.
* सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के शासकीय सेवकों की नियोजन संबंधी विभागीय एवं सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूक रहना एवं उनके समाधान के प्रयास करना.
* सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के शासकीय सेवकों को उनके कर्तव्य एवं अधिकारों के प्रति जारूक बनाना एवं इस हेतु संवैधानिक उपचार उपलब्ध करवाने की व्यवस्था हेतु प्रयास करना.
* समान उद्देश्य वाले एवं इस संस्था के उद्देश्यों से सहमत अन्य संस्थाओं से सहयोग का आदान-प्रदान एवं जहां आवश्यक हो संस्था की संबंद्धता प्रदान करना.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें