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| कमलनाथ |
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने प्रदेश कहा कि मंदसौर गोली कांड की जांच रिपोर्ट में पहले तो देरी की गई, फिर रिर्पोट में सभी को क्लीनचिट दे दी गई. उन्होंने कहा कि आखिर इस पूरे मामले में दोषी कौन है. उन्होंने कहा कि इस तरह के घटनाक्रम यह बताते हैं कि पीड़ितों ाके प्रदेश में न्याय मिलने अब एक सपना हो गया है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रदेश भाजपा सरकार पर हमला बोला और कहा कि 6 जून 2017 को मंदसौर के पीपल्यामंडी में पुलिस की गोलियों व पिटाई से हुई 6 किसानों की मौत के बाद, शिवराज सरकार द्वारा गठित जे.के. जैन आयोग की रिपोर्ट में देरी, बार- बार कार्यकाल बढ़ाने, फिर रिपोर्ट में गोलीचालन को आवश्यक व न्यायसंगत बताने व सभी को क्लीनचिट देने और अब घटना के समय निलंबित तत्कालीन कलेक्टर, एसपी व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की बहाली में शिवराज सरकार द्वारा दिखायी गयी तत्परता ने शिवराज सरकार की किसान विरोधी मंशा को उजागर कर दिया है. जांच आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने के पूर्व ही, अधिकारियों की बहाली में दिखायी गयी जल्दबाजी ने ही शिवराज सरकार की किसानो के प्रति सोच को उजागर करके रख दिया है. इस निर्णय से पीड़ितों को न्याय मिलने का सपना पूरी तरह से धूमिल हो गया है.
नाथ ने कहा कि जिस तरह से जांच आयोग का कार्यकाल बार-बार बढ़ाया जा रहा था, रिपोर्ट में जानबूझकर देरी की जा रही थी, उसी से यह आशंका बलवती हो गयी थी कि शिवराज सरकार के निर्देशन में दोषियों को बचाने का खेल गुपचुप ढंग से खेला जा रहा है. इस रिपोर्ट में पीड़ितों को कोई न्याय नहीं मिलेगा व इसके दोषियों को पूरी तरह से बचा लिया जाएगा और वही हुआ. इस गोलीकांड के बाद किसान पुत्र मुख्यमंत्री ने भोपाल में शाही उपवास पर बैठकर पीड़ित किसानो के परिजनो से जो वादे किए थे, वो सब झूठे साबित हुए. पिछले एक वर्ष से न्याय की उम्मीद में आंसू बहा रहे, पीड़ित परिवार के जख्म, शिवराज सरकार ने इस रिपोर्ट व निर्णय से फिर हरे कर दिए हैं. शिवराज सिंह का किसान विरोधी चेहरा फिर सामने आ गया है.
नाथ ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए सरकार से पूछा है कि इस गोलीकांड के बाद शिवराज सरकार व तमाम भाजपा नेता निरंतर इस घटना पर यह प्रचारित करते आए हैं कि सरकार ने अविलंब कार्यवाही कर दोषी अधिकारियों को उसी समय निलंबित कर दिया था, तो अब इस बहाली के बाद शिवराज बताएं कि इस पूरे गोलीकांड व किसानों की मौत पर सरकार ने क्या कार्यवाही की?, सरकार की नजर में किसानों की मौत का दोषी आखिर कौन है?, क्या खुद किसान ही अपनी मौत का दोषी है? तो फिर मुआवजा किसे व क्यों?, पुलिस, सीआरपीएफ, जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारीयों को ही क्लीनचिट तो फिर आखिर इस घटना का जिम्मेदार कौन?, क्या सरकार की नजर में आंदोलनकारी किसान, किसान नहीं असामाजिक तत्व, तस्कर, उपद्रवी थे जो सभी दोषियों को बचा लिया गया?

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