राजधानी लालघाटी स्थित गार्डन में आयोजित पंचायती राज समन्वय समिति, मध्यप्रदेश कांगे्रस के सम्मेलन में कमलनाथ ने कहा कि पंचायत जनप्रतिनिधियों को चुनाव का अनुभव है. वे चुने हुए प्रतिनिधि हैं. आगामी चुनाव में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी.
कमलनाथ ने कहा कि आज की राजनीति की इकाई पंचायत और गांव स्तर की हो गई है. पंच-सरपंच ही वहां के नेता हैं. अगले चुनाव में आपकी भूमिका मध्यप्रदेश का भविष्य तय करेगी. हम किस प्रकार भाजपा को इस प्रदेश से विदा कर सकते हैं, इसकी स्थानीय रणनीति आपको ही बनाना होगी.
कमलनाथ ने कहा कि यह परीक्षा का समय है. गांधी जी के पंचायत राज का सपना राजीव गांधी ने पूरा किया. लेकिन भाजपा सरकार ने धीरे-धीरे सभी अधिकार पंचायतों से छीन लिये. कांगे्रस चाहती है कि गांवों में वास्तविक पंचायत राज की स्थापना हो और आपको पहले की तरह अधिकार मिलें. यह चुनौती भविष्य की चुनौती है. उन्होंने कहा कि कांगे्रस सरकार बनने पर हम पुरानी व्यवस्था लागू करेंगे. पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मान को बढ़ायेंगे और हर बैठक में पंचों को 500 रूपये मानदेय की व्यवस्था की जायेगी. इसके अलावा उन्हें पुरानी बैठकों का ऐरियर्स भी दिया जायेगा. इसे हम कांगे्रस के घोषणा पत्र में शामिल करेंगे.
प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने कहा कि पूरे देश में भाजपा की जो रीति-नीति है, वह जनता को गुमराह करने की हैं, वे प्रजा के सामने बोलते कुछ हैं और निर्णय कुछ और ही करते हैं. शिवराजसिंह ने तो जुमलेबाजी में मोदी जी को भी पीछे छोड़ दिया. वे अपने वचन की सत्यता नहीं निभाते. विरोधियों को हैरान-परेशान करना उनकी आदत बन गयी है.
नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने पंचायत राज कानून में बहुत से संशोधन किये. यदि दोबारा ये लोग सत्ता में आ गये तो पंचायत के 73 वें और 74 वें संविधान संशोधन के अनुरूप पंचायतों का संचालन भूली-विसरी बात हो जायेगी. पंचायत राज का संचालन जन-अभियान परिषद करने लगेगी और यह सभी जानते हैं कि इसके पीछे आरएसएस है. उन्होंने कहा कि संबल योजना साढ़े चार साल पहले कांगे्रस की मनमोहनसिंह सरकार ने बनायी थी. एकबत्ती कनेक्शन भी कांगे्रस की देन है. यदि आपको वास्तव में अपने सम्मान की लड़ाई लड़ना है तो कांग्रेस पार्टी को जिताने के लिए काम करें और कांगे्रस आपका सम्मान वापिस दिलायेगी.
पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि भाजपा ने सत्ता के विक्रेदीकरण की प्रक्रिया को ठेस पहुंचायी है. पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार में लगातार कटौती हुई है. नेहरू जी ने कहा था कि पंचायत चुनाव इतना महत्वपूर्ण होता है कि उसमें प्रधानमंत्री बनने तक की ट्रेनिंग मिलती है. हितग्राहियों का चयन ग्राम पंचायत द्वारा होना चाहिए. पंचायतों को निगरानी के अधिकार अब नहीं हैं. वित्त नियोजन के अधिकार भी उनके पास नहीं हैं. कांगे्रस जनप्रतिनिधियों के साथ यह सरकार धारा-40 का राजनैतिक दुरूपयोग कर रही है. कांगे्रस के घोषणा पत्र में पंचायतों के अधिकार पुर्नस्थापित करने की बातें शामिल होना चाहिए.
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