बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

कानून व्यवस्था बिगड़ने से पहले भांपे, करें कार्रवाई

 कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा शिकायतें जिला स्तर पर निपटाएं अधिकारी
प्रदेश में कानून व्यवस्था सर्वोपरि है. जिला मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारियों का संयुक्त दायित्व होता है कि कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति को पहले भांप लें और जरूरी कार्रवाई करें. सभी कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि आमजन का कार्य जिलास्तर पर ही हो. लोगों को भोपाल या मंत्रालय न आना पड़े. हमने कलेक्टर को सशक्त किया है और आगे भी करेंगे.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह बात आज मंत्रालय में आयोजित कमिश्नर-कलेक्टर कांफ्रेंस में कही. कांफे्रंस में मुख्य सचिव एसआर मोहंती सहित कई विभागों के प्रमुख सचिव, अपर मुख्य सचिव और सचिव भी मौजूद रहे. कांफें्रस में मुख्यमंत्री कर्जमाफी, कानून व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर चर्चा के साथ योजनाओं पर फीडबैक लिया. इस दौरान जय किसान फसल ऋण माफी योजना, ग्रीष्म ऋतु में पेयजल प्रबंध, प्रोजेक्ट गौ-शाला, स्व-रोजगार योजनाओं की समीक्षा, राजस्व प्रकरणों की समीक्षा, बिजली बिलों को ठीक करने, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और आगामी बोर्ड परीक्षाओं जैसी प्राथमिकताओं के संबंध में विस्तृत चर्चा भी होगी.
कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री  ने सभी कमिश्नरों, कलेक्टरों और अधिकारियों से कहा कि  संभाग और जिला स्तर पर आप सरकार का चेहरा हैं. गरीबों और वंचितों को उनका अधिकार मिले, उनके काम आसानी से हों इस पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करें. प्रदेश में कानून व्यवस्था सर्वोपरि है. जिला मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारियों का संयुक्त दायित्व होता है कि कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति को पहले भांप लें और जरूरी कार्रवाई करें.
उन्होंने कहा कि मेरी चिंता है कि युवा स्वाभिमान योजना से अधिक से अधिक युवा लाभांवित हों. मैं चाहूंगा कि कलेक्टर व्यक्तिगत रूचि लेकर युवा बेरोजगारों से संवाद करें और उनकी काउंसलिंग करें. साथ ही उन्हें योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित करें. उन्होंने कहा कि हमारा संविधान हमें समाज के निचले तबके को सशक्त करने और गरीबों व वंचितों को न्याय दिलाने के लिए प्रेरित करता है. उन्होंने कहा कि सभी जिला कलेक्टरों से मेरा आग्रह है कि जरूरतमंद और गरीब लोगों की चिंता मेरी तरफ से आप करें. जनसुनवाई, लोकसेवा गारंटी, सीएम हेल्पलाइन और समाधान एक दिन की व्यवस्थाएं सुदृढ़ हों. उन्होंने कहा कि हम सुशासन को जिलास्तर पर दोबारा लेकर गये हैं. सभी कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि आमजन का कार्य जिलास्तर पर ही हो. लोगों को भोपाल या मंत्रालय न आना पड़े. हमने कलेक्टर को सशक्त किया है और आगे भी करेंगे. मुख्यमंत्री  ने  इस अवसर पर आनलाइन डायवर्सन प्रोसेस की शुरूआत की. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने दो आवेदकों को पत्र भी सौंपे.


मुरैना पुलिस अधीक्षक को हटाकर घिरी सरकार

राज्य सरकार ने फिर तीन आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं. इन अधिकारियों में वह अधिकारी भी शामिल है, जिसने कांग्रेस विधायक के बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया था. कहा जा रहा है कि मुरैनाा के एसपी रियाज इकबाल को इसके चलते ही वहां से हटाया गया है. इकबाल के तबादले करने के बाद सरकार घिरती नजर आ रही है. इसे लेकर आज पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सरकार पर हमला बोला है. 
राज्य के मुरैना में पदस्थ पुलिस अधीक्षक रियाज इकबाल को कांग्रेस विधायक एेंदल सिंह कंसाना के पुत्र पर प्रकरण दर्ज करना महंगा पड़ गया. सोमवार की रात तीन अधिकारियों के किए गए तबादले में उन्हें भी मुरैना से हटा दिया गया. उनके स्थान पर श्योपुर के पुलिस अधीक्षक असिद यादव को पदस्थ किया गया है.
उल्लेखनीय है कि इकबाल ने सुमावली विधायक एदल सिंह कंसाना के बेटे राहुल सिंह कंसाना के खिलाफ आगरा-मुंबई टोल नाके में कर्मचारियों से मारपीट और फायरिंग करने के मामले में पुलिस रियाज इकबाल ने केस दर्ज किया था. इसके अगले दिन मंगलवार शाम को उनके तबादले का आदेश आ गया. वहीं, असित यादव को 20 फरवरी का श्योपुर पुलिस अधीक्षक बनाए जाने का तबादला आदेश संशोधित करते हुए मुरैना का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है. जबकि आईपीएस नागेंद्र सिंह श्योपुर के पुलिस अधीक्षक बनाये गए हैं.
तबादलों का वर्ल्ड रिकार्ड बनाएगी सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने एमपी की कांग्रेस सरकार और कमलनाथ पर जमकर हमला किया है. शिवराज सिंह ने एक के बाद एक ट्वीट कर कमलनाथ सरकार को घेरा है. शिवराज ने लिखा है कि  साहब को छींक आयी, एक अधिकारी का तबादला हुआ. खांसी आयी तो दूसरे अधिकारी का तबादला हुआ. अफसरों को चक्करघिन्नी बना दिया है. लगता है तबादलों का वर्ल्ड रिकार्ड मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ही बनाएगी. प्रदेशवासी चिंता न करें, मैं उनके साथ हंू, उनकी लड़ाई मैं लड़ूंगा, न्याय मैं दिलाऊंगा.

एयर स्ट्राइक के बाद मध्यप्रदेश में घोषित किया अलर्ट


भारतीय वायु सेना के पाकिस्तान पर में की गई कार्रवाई के बाद  मध्यप्रदेश में अलर्ट घोषित किया गया है. पुलिस महानिदेशक वी.के. सिंह ने पूरे मध्यप्रदेश में अलर्ट घोषित करते हुए आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा के निर्देश दिए हैं.
पुलिस महानिदेशक  सिंह  ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सभी एसपी, रेंज डीआईजी और जोन आईजी से चर्चा की. उन्होंने वीडियो कांफ्रेंस में मैदानी पुलिस अधिकारियों से कहा कि संवेदनशील इलाकों में लगी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर लें. आतंरिक सुरक्षा की भी समीक्षा करें. उन्होंने कहा कि कोई भी घटना साम्प्रदायिक रूप नहीं ले, इसका विशेष ध्यान रखें.
उल्लेखनीय है कि पुलवामा हमले के 12 दिन बाद भारतीय वायु सेना ने मिराज-2000 फाइटर प्लेन से पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर 21 मिनट तक बमबारी की. इस बमबारी से जैश के आतंकी कैंपों को तबाह किया गया.  इस बमबारी में जबलपुर के खमरिया आयुध फैक्ट्री में निर्मित बमों का उपयोग किया गया, जबकि विमान मिराज ने ग्वालियर से उड़ान भरी थी. इसके चलते भी पुलिस विभाग चौकन्ना हुआ है और अलर्ट घोषित किया गया है.

लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं करेंगे 108 एंबुलेंस कर्मचारी



प्रदेशभर के 108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने 2019 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं करने का निर्णय लिया है. यह निर्णय जिगित्सा कंपनी व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों से पीड़ित होकर लिया गया है.
 108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ मध्यप्रदेश के महामंत्री डा. नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अधिकारी डा. दुर्गेश गौर उपसंचालक, भूपेंद्र परते एवं डॉ. महेंद्र जैन सलाहकार के समक्ष कई बार जिगित्सा हेल्थ केयर 108 सेवा प्रदाता ठेका कंपनी के अन्याय, अत्याचार एवं शोषण के संबध में अपनी पीड़ा जाहिर करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया है. डा. दुर्गेश गौर उपसंचालक का कहना है कि हमारे बीच कोई संबंध नहीं है, इसलिए समस्या का समाधान कभी भी नहीं हो सकता है. इस संबध में मुख्यमंत्री कमलनाथ से लेकर चुनाव आयोग, राज्य मानवधिकार आयोग, स्वास्थ्य विभाग प्रमुख को इस संबध में पत्र दिया गया है. वहीं, लोकसभा चुनाव में 108 एंबुलेंस कर्मचारी एवं उनके परिवार व समर्थक लगभग 30 लाख वोटर अपने मताधिकार का बहिष्कार करेंगे.

सिंधिया का अपना अंदाज, श्रमिकों के साथ खाया खाना

गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने गुना प्रवास के दौरान एक बार फिर अलग अंदाज में दिखाई दिए. उन्होंने श्रमिकों के अपने हाथों से भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर भोजन किया भी. हालांकि चुनावी समय है और सिंधिया इस वक्त में आम आदमी के बीच पहुंचकर इस तरह भोजन करने और कराने की राजनीति पहले भी कर चुके हैं. 
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक बार फिर एक अलग अंदाज देखने को मिला है. सिंधिया ने मंगलवार को गुना में श्रमिक सम्मेलन में आये श्रमिकों को अपने हाथों से भोजन करवाया और उन्ही के साथ बैठकर दोपहर का भोजन किया.  इसके कुछ दिनों पहले सिंधिया अशोकनगर की एक होटल में हलवाई के रूप में नजर आए थे, जहां उन्होंने खुद समोसे तल कर लोगों को खिलाए थे. 
 दरअसल मप्र शासन के श्रम विभाग द्वारा गुना में आयोजित 'श्रमिक सम्मेलन' एवं जय किसान ऋण माफी योजना व किसान सम्मान समारोह में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने श्रमिकों के साथ बैठ कर भोजन किया और कुछ श्रमिक महिलाओं को अपने हाथों से खाना भी खिलाया. इस अवसर पर कमलनाथ कैबिनेट की मंत्री इमरती देवी भी साथ मौजूद थीं. सिंधिया की यह सादगी की चर्चा का विषय बन गई. बता दें कि जनप्रतिनिधियों का ऐसा व्यवहार कम ही देखने को मिलता है, हालांकि चुनावी माहौल में ऐसी तसवीरें अक्सर देखी जाती है.

शिवराज ने तबादलों पर उड़ाया कमलनाथ का मजाक

मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार तबादलों पर लगातार घिरती जा रही है. हाल ही में मुरैना विधायक ऐंदल सिंह कंसाना के बेटे पर प्रकरण दर्ज किए जाने के मामले के बाद मुरैना के पुलिस अधीक्षक का तबादला किया तो शिवराज ने इसका खासा मजाक उड़ाया. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘साहब को छींक या खांसी आए तो अधिकारी का तबादला हो जाता है. लगता है मध्यप्रदेश सरकार ने तबादलों में सारे रिकार्ड तोड़ने का मन बना लिया है’
मध्यप्रदेश में लगातार हो रहे तबादलों से सियासत गर्मा गई है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को ट्वीट कर प्रदेश सरकार का मजाक उड़ाते हुए कहा है कि साहब को छींक या खांसी भी आती है तो अधिकारी का तबादला हो जाता है. उन्होंने कहा कि लगता है मध्यप्रदेश ही तबादलों में सारे रिकॉर्ड तोड़ेगा.
वहीं इतने तबादलों पर अब सरकार अपना बचाव करते दिखाई दे रही है. गृह मंत्री बाला बच्चन का कहना है कि ट्रांसफर होना एक रूटीन प्रकिया है. जरूरतों के हिसाब से अधिकारियों के ट्रांसफर किए जा रहे हैं. विधायक एदल सिंह कंसाना के बेटे पर मुकदमा दर्ज करने के बाद मुरैना पुलिस अधीक्षक रियाज इकबाल के ट्रांसफर मामले में गृह मंत्री बाला  बच्चन ने कहा कि उनका ट्रांसफर एक रूटीन प्रोसेस है. फिर भी मैं एक बार इस मामले को दिखवा लूंगा. उन्होंने सरकार का बचाव करते हुए कहा रियाज का ट्रांसफर इस वजह से नहीं हुआ कि उन्होंने विधायक एेंदल सिंह कंसाना  के बेटे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी. अगर ऐसा होता तो प्रकरण दर्ज 

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

कमलनाथ ने कहा दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई


 मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चित्रकूट में हुए अपहरण में अपनी जान गवां बैठे श्रेयांश और प्रियांश के पिता बृजेश रावत की मांग पर उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा कि वह चिंता न करें.  दुख की इस घड़ी में पूरी सरकार उनके साथ खड़ी है. मैं खुद इस दुखद घटना से आहत हूं, व्यथित हूं. हम दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएंगे.
पीड़ित बच्चों के पिता की मांग पर कमलनाथ ने कहा कि आप विश्वास रखिए. हम इस केस को फास्ट ट्रेक न्यायालय में चलाएंगे. दोषियों को फांसी दिलाने का सरकार पूरा प्रयास करेगी. आप निश्चिंत रहिए इस पूरे मामले की हम जांच कराएंगे. इसमें किसी भी अधिकारी की लापरवाही या वो दोषी पाया गया तो उसे नहीं बख्शेंगे. न संरक्षणदाता बचेंगे और न नहीं असली आरोपी. उन्होंने कहा कि  कितना ही बड़ा चेहरा यदि इस कांड के पीछे छिपा होगा तो हम उसे भी जांच कर बेनकाब करेंगे. कमलनाथ ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद, इसका मुझे भी बेहद अफसोस है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चे तो वापस नहीं आ सकते, लेकिन आपके परिवार को न्याय दिलाने तक मैं चैन से नहीं बैठूंगा. आप विश्वास रखिए इस दुख की घड़ी में मेरी पूरी सरकार आपके साथ खड़ी है. मैंने कल ही पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि पूरे 12 दिन की जांच रिपोर्ट देखे. पुलिस ने क्या-क्या किया? जिस भी अधिकारी की लापरवाही सामने आए उसे दंडित करें. मैं पहले ही कह चुका हूं इस दुखद घटना को मैं राजनीति का विषय कभी बनाना नहीं चाहूंगा. मेरा एक ही मकसद है आपके परिवार को न्याय दिलाना और उसी मकसद को लेकर में काम करूंगा.

बलात्कार के आरोपी ने लगाई थाने में आग

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नाबालिग से बलात्कार के आरोपी ने आज सुबह थाने में आग लगाकर खुदकुशी का प्रयास किया. पुलिस ने आरोपी युवक को जली हालत में चिकित्सालय में भर्ती कराया है.  इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए हैं.
पुलिस के अनुसार राजधानी के थाना कटारा हिल्स का यह मामला है. आरोपी राजकुमार उर्फ आर.के. पिता प्यारेलाल निवासी पुरानी बस्ती कटारा हिल्स को एक नाबालिग के साथ बलात्कार के आरोप में सोमवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. सोमवार की शाम को युवक से पूछताछ की गई. आज मंगलवार की सुबबह युवक ने बीड़ी पीने के लिए एक सिपाही से माचिस मांगी थी. बीड़ी जलाने के दौरान आरोपी को दिए गए कंबल में आग लग गई. आग लगने के बाद आरोपी द्वारा मदद की गुहार लगाई गई जिस पर ड्यूटी पर तैनात हेड कांस्टेबल भानूप्रताप ने आग बुझाने का प्रयास किया, जिससे उसके हाथ जल गए. आरोपी को पुलिस ने तत्काल इलाज के लिए हमीदिया चिकित्सालय भेजा. यहां उसका इलाज चल रहा है. 
राजधानी के डीआईजी इरशाद वली ने इस घटना को लेकर बताया कि घटना की जांच की जा रह ीहै. उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया तो इस मामले में लापरवाही की बात सामने आ रही है. टीआई ए.के.दांगी, एसआई जे.पी.सिंह और हेड कांस्टेबल भानूप्रताप सिंह को सस्पेंड कर दिया है. इसके अलावा भोपाल कलेक्टर ने डीआईजी की अनुशंसा पर घटना की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश भी दिए हैं.

एडीजी मिश्रा की मां ने की राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को शिकायत

मध्यप्रदेश के एडीजी राजेन्द्र कुमार मिश्रा के पिता के निधन की खबरों का मामला अब और गर्माता नजर आ रहा है. मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नरेन्द्र कुमार जैन के निर्देश पर अभी पुलिस मुख्यालय इस मामले की रिपोर्ट भी नहीं बना पाया था कि एडीजी की मां ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को एक शिकायत कर दी है. इस शिकायत में उन्होंने जैन द्वारा पद के दुरुपयोग किए जाने की बात कही है. उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र रुप से जांच कराई जाए.
मानवाधिकार आयोग ने एडीजी के पिता कुलामणि मिश्रा के निधन को लेकर भोपाल पुलिस से रिपोर्ट मांगी है. एडीजी की मां का कहना है कि यह उनके धार्मिक और व्यक्तिगत पारिवारिक जीवन में दखल है. कुछ मीडिया रिपोर्ट में एक निजी अस्पताल के हवाले से कहा गया है कि एडीजी के पिता का निधन हो चुका है. एडीजी और उनके परिवार का दावा है कि उनके पिता जीवित है और समाधि में हैं. इस संबंध में एडीजी के परिवार ने मप्र हाईकोर्ट में भी एक अलग याचिका दायर की है.
एडीजी की मां ने लिखा है कि जैन लगातार उनके पारिवारिक मामलों में दखल दे रहे हैं, जिससे उन्हें और उनके परिवार को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने लिखा है कि वह अपनी पति की देखभाल प्रकृतिक तरीके से कर रही हैं. उन्होंने शिकायत में लिखा है कि उन्हें लगातार फर्जी खबरों के आधार पर परेशान किया जा रहा है. उन्होंने लिखा है कि एलोपैथी का इलाज उनके पति का उपचार करने में आसफल रहा है, जिसके बाद उनका पति का इलाज 15 फरवरी से वैध द्वारा किया जा रहा है. हमारे लिए ये काफी हैरानी की बात है कि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष द्वारा एक ऐसी टीम को जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं जो मेरे पति का इलाज करने में असमर्थ है. उन्होंने मांग करते हुए कहा है इस पूरे मामले की एक स्वतंत्र जांच कराई जाए.

आतिशबाजी कर लहराया तिरंगा लहराकर, लोगों ने मनाया जश्न

 खुशियां मनाते हुए बांटी मिठाई, जवानों की वीरता की होती रही सराहना

भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर किए हमले के बाद आज राजधानी में जश्न का माहौल रहा. जगह-जगह तिरंगा लहराकर सेना के जवानों को बधाई दी गई और भारत माता के जयकारे लगाए गए. सेना की इस कार्रवाई को किसी ने पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देना बताया तो किसी ने जवानों की वीरता की सराहना की.
भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर आज सुबह किए गए हमले की जानकारी मिलने के बाद राजधानी में जश्न का माहौल देखा गया. भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने तिरंगा लहराते हुए जश्न मनाया और आतिश बाजी की. इस अवसर पर लोगों को मिठाई भी खिलाई गई.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर भारतीय सैनिकों को सैल्यूट किया. उन्होंने लिखा कि भारतीय वायुसेना के जांबाज सैनिकों द्वारा आतंकी ठिकानों पर की गयी जबरदस्त कार्रवाई के लिए सैनिकों को बधाई. मैं और मेरी पार्टी राष्ट्र हित के हर काम में आपके साथ है. वहीं सिंधिया ने भी ट्वीट कर भारतीय वायु सेना के सैनिकों को बधाई दी. उन्होंने लिखा कि सैनिकों के शौर्य और साहस को मेरा सलाम. आतंकी ठिकानों पर की गई जबर्दस्त कार्रवाई के लिए सैनिकों को बधाई.
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय वायुसेना के सफल आपरेशन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आतंकवाद को खोदकर गाड़ देंगे और प्रधानमंत्री ने साफ कह दिया था कि हम किसी को छेड़ेंगे नहीं और जिसने छेड़ा उसको छोड़ेंगे नहीं. भारतीय वायुसेना के जज्बे को सलाम और प्रणाम. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले का हमारी सेना ने मुंह तोड़ जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि सेना की यह कार्यवाही सराहनीय है. मैं और मेरी पार्टी की ओर से सेना के वीर जवानों को शुभकामना और बधाई. 
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि आतंकवादियों को उनके घर में घुसकर नेस्तानाबूद करने पर जांबाज भारतीय सेना के जवानों को मैं शुभकामना देता हूं. हर जवान को मैं सलाम करता हूं. वहीं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने कहा कि हमारी वायु सेना ने देश प्रेम से ओत-प्रोत होकर पुलवामा आतंकी हमले का पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दिया है.पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकी ठिकानों को ठिकाने लगाने के लिए मैं भारतीय सेना के जवानों को शुभकामना देता हूं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्र सुरक्षा के लिए उठाए गए हर कदम में देश के साथ है.

अपराधियों को सरकार का संरक्षण

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. बालाघाट के बाद आज उन्होंने सीहोेर जिलों के किसानों के साथ प्रदर्शन किया और सरकार को चेतावनी दी कि अगर किसानों की समस्याएं नहीं सुलझी तो वे आंदोलन करेंगे. उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधी खुलकर खेल रहे हैं. शिवराज ने आरोप लगाया कि अपराधियों को सरकार का संरक्षण मिल रहा है.
सीहोर जिले के किसानों का आज सीहोर में सम्मेलन और प्रदर्शन था. इसमें शामिल होने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचे थे. इसके पहले वे कल सोमवार को बालाघाट में किसानों के साथ प्रदर्शन कर चुके हैं. सीहोर जिले के किसानों को संबोधित करते हुए चौहान ने कमलनाथ सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि किसान बैंकों की लाइन में खड़े-खड़े रो रहे हैं कि पैसे ही नहीं आ रहे हैं. कह रहे हैं कि मामा आ जाओ, काहे चले गये.  जब हम चले जाएंंगे, तो याद बहुत आएंगे, क्योंकि हम तो जीते ही आपके लिए हैं. चौहान ने कहा कि कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जब सरकार बनानी थी, तो कर्जा माफ, कर्जा माफ कर रहे थे और अब अलग-अलग रंग के फार्म भरवा रहे हैं. अब तक केवल 1 लाख 89 हजार किसानों के खातों में थोड़े पैसे आये हैं. उन्होंने कहा कि कमलनाथ जी, वादा आपने किया है, लेकिन निभवायेंगे हम. हर किसान का कर्जा माफ करना होगा. 
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज किसान परेशान है. ओला-पाला से फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं. सरकार अब तक खेतों को देखने नहीं गई. जब मेरी सरकार थी और ओले गिरते थे, लगता था कि मेरी छाती पर गिर रहे हैं. मैं सुबह होते ही खेतों में पहुंच जाता था. प्रदेश में ऐसी अराजकता बढ़ गई है.  फिरौती लेकर भी बच्चों को मार डाला, व्यापारी की हत्या कर दी, रीवा के बुजुर्ग दंपतियों की जान ले ली. ये कैसा मध्यप्रदेश बना रही है कांग्रेस? आज अपराधी खुलकर खेल रहे हैं, इसलिए क्योंकि सरकार खुद अपराधियों को संरक्षण दे रही है.
कलम की ताकत नहीं है मेरे पास
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज मेरे आंखों से आंसू टपक जाते हैं, जब कोई आता है और मैं उसका इलाज नहीं करवा पाता हूं, क्योंकि कलम की ताकत नहीं रही. मुख्यमंत्री से कहना चाहता हूं कि गरीबों की गंभीर बीमारियों के इलाज की योजना चलने दीजिए.

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

बारात में हर्ष फायर, बच्चे की मौत

मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में बारात में हर्ष फायर करना उस वक्त महंगा पड़ गया, जब बंदूक से निकली गोली ने एक बच्चे की जान ले ली. एक अन्य बच्चा और कुछ लोग घटना में घायल हुए हैं.
मध्यप्रदेश के रतलाम के बाराखेड़ा गांव में हर्ष फायरिंग से एक बच्चे की मौत हो गई. जबकि एक बच्चा और कुछ लोग घायल हो गए है. घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है रतलाम के रहने वाले राजेश नाम के युवक की बारात बाराखेड़ा गांव में गई थी, जहां बारात में दुल्हे का भाई 12 बोर की बंदूक से हर्ष फायर करते हुए चल रहा था. तभी उसकी बंदूक से निकली गोली 12 साल के बच्चे चिराग और 14 साल के सुमित और उसके पिता राधेश्याम को लग गई. बताया जा रहा है कि गोलियां सुमित के पेट और उसके पिता के सीने में लगी. घटपा की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने मासूम के शव को पीएम कराने के लिए अस्पताल भेज दिया. पुलिस ने बताया कि घटना के बाद से ही आरोपी फरार हो गया है जिसकी तलाश की जा रही है.

कानून व्यवस्था को लेकर सड़क पर उतरी भाजपा, निकाला पैदल मार्च

गौर ने कमलनाथ सरकार को घेरा, भाजयुमो ने प्रदर्शन कर की सरकार के खिलाफ नारेबाजी
मध्यप्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट में जुड़वा बच्चों के अपहरण के बाद हत्या के मामले को लेकर भाजपा ने सड़क पर उतरकर विरोध तेज कर दिया है. भाजपा ने आज राजधानी में बिगड़ी कानून व्यवस्था और जुड़वा बच्चों की हत्या को लेकर प्रदर्शन किया और पैदल मार्च निकाला. इस दौरान भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की.
सतना जिले के चित्रकूट में अपहृत जुड़वा भाईयों की हत्या को लेकर सरकार के खिलाफ भाजपा मैदान में उतर गई है. भाजपा ने आज राजधानी भोपाल में बोर्ड आफिस चौराहे पर प्रदर्शन किया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. यहां से कार्यकर्ता पैदल मार्च करते हुए पुलिस अधीक्षक दक्षिण भोपाल के कार्यालय तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे. इस दौरान रास्ते भर कार्यकर्ताओं ने घटना के लिए सरकार को दोषी ठहराया और गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग की. इस अवसर पर हुजूर के भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि सरकार घटना को लेकर कार्रवाई करे, उन्होंने कहा सरकार तो आरोपियों के भाजपा से जुड़े होने का कहकर बचना चाहती है. शर्मा ने कहा कि सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आरोपियों को सरकार चौराहे पर गोली मारे, भाजपा सरकार के साथ है. उन्होंने कांग्रेस पर अपराधियों को बचाने का आरोप भी लगाया और कहा कि कांग्रेस का ये घिनौना चरित्र है. 
गौर ने घेरा सरकार को
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने जुड़वा भाइयों की हत्या को जघन्य अपराध है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार और पुलिस प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार बताया है. गौर ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में लापरवाही बरती गई है. बच्चे 12 दिन से गायब थे और पुलिस का इंटलिजेंस बच्चों तक नहीं पहुंच पाया. इस बीच हत्यारों तक पैसे भी पहुंचाए गए. पुलिस क्या कर रही थी, यानि पुलिस का इंटलिजेंस फैल्युर साबित हुआ.
सतना रहा बंद, शिवराज ने निकाला मौन जुलूस
घटना को लेकर सतना में आज भी लोगों का गुस्सा दिखाई दिया. लोगों ने आज सतना बंद रखा. इस दौरान व्यापारियों ने स्वत: ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखे. सतना में आज सुबह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा और स्थानीय लोगों ने मौन जुलूस भी निकाला और बच्चों को श्रद्धांजलि दी.  इससे पहले रविवार को शिवराज सिंह चौहान मृतक बच्चों के परिजन से मिलने पहुंचे थे और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा था . शिवराज ने कमलनाथ सरकार से सवाल पूछा कि दो बच्चों को सरेआम जल समाधि दे दी गई और पुलिस आखिर क्यों कुछ नहीं कर पाई.  शिवराज ने मुख्यमंत्री से इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है.  आरोपियों का नाम भाजपा से जुड़कर लिए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि 13 दिन तक क्या करती रही पुलिस,अपराधी की कोई जाति और पार्टी नहीं होती है. शिवराज सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कोई कार्रवाई नहीं करते तो प्रदेश भर में जन आंदोलन करेंगे.
सरकार, पुलिस प्रशासन घटना के लिए दोषी 
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि बच्चों के अपहरण की यह घटना प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है? कही न कही सरकार और पुलिस प्रशासन भी दोषी है इस घटना के लिए. उन्होंने कहा कि अपराधी बेखोफ होकर ऐसी घटनाओं को अंजाम देते है और पुलिस कार्यवाही किये जाने का ढोंग करती है. 12 दिन से लापता बच्चों के अपराधियों को पुलिस एकाएक शव मिलने के तुरंत बाद ही पकड़ लेती है, यह तत्परता पुलिस और शासन ने तभी दिखाई होती जब अपहरण हुआ था तो शायद आज किसी का आंगन सूना नही होता. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अपराधियों के दिल मे पुलिस प्रशासन का खौफ ही नही है.

जिन कांग्रेसियों ने काम नहीं किया वो मुर्दाबाद

दिग्विजय सिंह 
हमेशा बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले दिग्विजय सिंह आज फिर सुर्खियों में आ गए. सिंह ने आज राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान अपने की कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुर्दाबाद कर दिया. उन्होंने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने काम नहीं किया वो मुर्दाबाद.
दरअसल राजधानी भोपाल के उपनगर बैरागढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में दिग्विजय सिंह जब पहुंचे तो दो घंटे से इंतजार कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी थी और अपने वरिष्ठ नेता के आने पर उत्साह भी था. ऐसे में जब सिंह मंच पर पहुंचे तो कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के समर्थन में नारेबाजी करनी शुरु कर दी. तभी मंच पर माइक लेकर दिग्विजय सिंह ने भी नारेबाजी करते हुए कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी के लिए काम नहीं किया वे मुर्दाबाद, जिन्होंने काम किया वे जिंदाबाद. सिंह की इस बयानबाजी से कार्यकर्ताओं ने निराशा भी छाई और ज्ञानचंदानी समर्थक कार्यकर्ताओं में उत्साह भी जागा. सिंह के नेतृत्व में मंच पर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की सदस्यता भी ली. इनमें भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ अध्यक्ष सहित अन्य नेता शामिल हैं.
सिंह द्वारा की गई इस तरह की नारेबाजी के बाद कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता तो कार्यक्रम से नाराज होकर चले गए. सिंह ने मंच पर बैठे नरेश ज्ञानचंदानी को अपने पास बुलाया और उनकी प्रशंसा भी की. सिंह ने कहा कि अगर सभी कार्यकर्ता मिलकर मेहनत करते तो ज्ञानचंदानी भी चुनाव जीत जाते. यहां उल्लेखनीय है कि ज्ञानचंदानी को भाजपा के रामेश्वर शर्मा ने विधानसभा चुनाव हराया था.


योग्यता पूछी तो भड़की मंत्री, कहा तुम्हे नौकरी की जरुरत नहीं है

इमरती देवी 
मध्यप्रदेश के महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी को एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा उनक योग्यता पूछना इतना नागवार गुजरा की उन्होंने कार्यकर्ता को कह दिया कि आपको नौकरी की जरुरत नहीं है. किसी और सरकार में नौकरी कर लेना, फिलहाल तो इतना ही वेतन मिलेगा. इमरती देवी पहले भी चर्चा में रह चुकी है. स्वतंत्रता दिवस पर वे भाषण पूरा नहीं पढ़ पाई थी तो गुना जिले के प्रवास पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से चर्चा करते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया था कि उन्हें बड़ी-बड़ी फाइलें देखकर नींद आती है.
मध्यप्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी शिवपुरी में आंगनाबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच पहुंची थी. यहां पर जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को संवाद के लिए बुलवाया  गया था. इस दौरान एक कार्यकर्ता के सवाल ने मंत्री के अलावा वहां हर उपस्थित व्यक्ति को आश्चर्य में डाल दिया. हुआ यह कि संवाद के दौरान मंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से उनकी शैक्षणिक योग्यता के बारे में भी जानकारी हासिल की. इस दौरान एक कार्यकर्ता ने हाथ उठाया और मंत्री  से प्रश्न पूछने की इच्छा जाहिर की. जिसके बाद इमरती देवी ने कहा पूछिए आप क्या पूछना चाह रही हैं, इस पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने जवाब में कहा, आप हमसे तो पूछ रही है आपकी एजुकेशन क्या है? लेकिन आपकी क्वालिफिकेशन क्या है ये तो बताइए. इस पर मंत्री खफा हो गई और कार्यकर्ता से यह  पूछ लिया आपको नौकरी करनी है या नहीं. वहीं मंत्री ने कहा कि आप कार्यकर्ता हैं, तभी महिला ने जवाब दिया कि वह कार्यकर्ता नहीं, बल्कि सहायिका हैं. महिला के प्रश्न का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि आपको अगर मानदेय कम लग रहा है तो हट जाओ, जो काम करेगी हम उसे देंगे. आप इस नौकरी को छोड़ दीजिए कहीं अच्छी सैलेरी पर काम कीजिए.
उल्लेखनीय है कि इमरती देवी का नाम इससे पहले भी सुर्खियों में आ चुका है. 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में वह मुख्यमंत्री का संदेश भी नहीं पढ़ पाईं थी. ग्वालियर में गणतंत्र दिवस के मुख्य कार्यक्रम में तिरंगा फहराने के बाद उन्हें संदेश पढ़ना था, लेकिन वो अटकने लगीं. काफी देर कोशिश के बाद जब उनसे नहीं पढ़ा गया, तो उन्होंने मंच से ही कह दिया था कि अब आगे कलेक्टर साब पढ़ेंगे. इतना कहकर वह हंसते हुए किनारे खड़ी हो गईं. प्रदेश की कैबिनेट मंत्री की ये हालत देख मौजूद अधिकारी व लोग भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए थे. इसके पूर्व मंत्री पद की शपथ लेने के बाद मंत्री जब गुना जिले के प्रवास पर पहुंची तो उन्होंने काम को लेकर कार्यकर्ताओं से यहां तक कह दिया था कि आफिस में फाइलों के ढेर देखकर उन्हें नींद आती है.

स्वास्थ्य मंत्री से मांगा जवाब

तुलसी सिलावट
मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को पहली सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति शैलेंद्र शुक्ला ने कांग्रेस की टिकट से चुने गए तुलसी सिलावट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सिलावट के निर्वाचन को याचिका दायर कर भाजपा के उमीदवार डॉक्टर राजेश सोनकर ने चुनौती दी है. याचिका में भाजपा के उम्मीदवार राजेश सोनकर ने मंत्री तुलसी सिलावट द्वारा गलत नामांकन भरने,  जानकारी छुपाने के आरोप लगाए हैं. मामले में अगली सुनवाई के लिए अदालत ने अगली तारीख 28 मार्च तय की है. गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट पिछले वर्ष नवंबर में दिसंबर में आए विधानसभा चुनाव के नतीते में इंदौर की सांवेर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी. उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार डॉक्टर राजेश सोनकर को 2945 वोटों से हराया था.

रविवार, 24 फ़रवरी 2019

अपहृत बच्चों की हत्या, आरोपी गिरफ्तार

 चित्रकूट में हंगामें के बाद लगाई धारा 144

मध्यप्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट से अगुवा किए गए दो बच्चों की हत्या के बाद चित्रकूट में हंगामें की बनी स्थिति को देख प्रशासन ने धारा 144 लगा दी है. पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने जिन छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, घटना को अंजाम देने वाला मास्टर माइंड पदम शुक्ला भी शामिल है. पदम बजरंग दल संयोजन विष्णु का भाई है.
सतना जिले के चित्रकूट से 12 फरवरी को बृजेश रावत के दो जुड़वा बच्चों के हुए अपहरण के बाद हत्या कर दी गई. पुलिस ने उत्तरप्रदेश के बांदा से बच्चों के शव बरामद किए. हत्या की जानकारी मिलने पर चित्रकूट और सतना में लोग सड़कों पर उतर आए और जमकर हंगामा किया, इस दौरान पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा.  व्यापारियों ने चित्रकूट में अपने सभी प्रतिष्ठान आज बंद रखे. इस दौरान आक्रोशित लोगों ने लामबंद होकर जानकीकुंड परिसर में धावा बोल दिया. जगह-जगह हंगामे की खबरें भी सामने आई. चित्रकूट में भड़के लोगों पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर आंसू गैस भी छोड़नी पड़ी. इसके बाद पुलिस ने चित्रकूट में धारा 144 लागू कर दी है, भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई है. 
यह था मामला
जुड़वां भाई श्रेयांश और प्रियांश चित्रकूट के सद्गुरु पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे. 12 फरवरी को दोनों स्कूल बस से घर लौट रहे थे. इसी दौरान बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों ने बंदूक की नोंक पर बच्चों को अगवा कर लिया था. पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गई थी. वारदात के 12 दिन बाद दोनों बच्चों के हाथ पैर बंधे हुए शव उत्तरप्रदेश के बांदा में यमुना नदी के पास बरामद हुए. इन शवों का बरामद करने के लिए सतना जिले की पुलिस के साथ उत्तरप्रदेश एसटीएफ एवं पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया था, मगर इस अभियान में पुलिस को कोई सफलता हासिल नहीं हुई. 
बजरंग दल संयोजक का भाई है मास्टर माइंड
रीवा रेंज के आईजी चंचल शेखर ने बताया कि अपहरण कर हत्या के मामले में पदम शुक्ला सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि पदम  बजरंग दल के संयोजक विष्णु शुक्ल का भाई है. उन्होंने कहा कि अभी तक की जांच में विष्णु की किसी तरह की इस मामले में भूमिका होना सामने नहीं आई है. आईजी ने बताया कि आरोपियों ने अपराध में बाइक और कार का इस्तेमाल किया था. बाइक की नंबर प्लेट पर रामराज्य लिखा हुआ था और कार पर भाजपा का झंडा लगा हुआ था. उन्होंने बताया कि घटना के दो दिन बाद आरोपियों ने एक राह चलते युवक से फोन मांगा और उसके फोन से बच्चों के पिता से बात की और बच्चों की भी बात कराई थी. आरोपियों ने 2 करोड़ रुपए की फिरोती की मांग की थी. 19 फरवरी को बच्चों के परिजनों ने 20 लाख रुपए फिरोती के रुप में दिए थे. इसके बाद आरोपियों ने 21 फरवरी को बच्चों की हत्या कर दी.
फांसी के फंदे तक पहुंचाएंगे आरोपियों को
सतना अपहरण के बाद जुड़वा बच्चों की हत्या के मामले में मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक वीके सिंह ने कहा है कि ये पूरा मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा. दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया जाएगा. इस मामले में दो बीई (आईटी) के स्टूडेंट भी शामिल हैं. सिंह ने बताया की आईटी के छात्र और आरोपी इंटरनेट कालिंग के जरिए एक दूसरे से संपर्क में थे. साथ भी फिरौती के लिए किए गए सभी काल भी इंटरनेट के जरिए ही किए जा रहे थे. पुलिस ने इसे भी क्रेक कर लिया है. पुलिस महानिदेशक ने बताया कि  आरोपी उत्तरप्रदेश से पूरे मामले को हैंडल कर रहे थे और मामले से जुड़े सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का बेहद अफसोस है कि दोनों मासूम बच्चों को नहीं बचाया जा सका.
मुख्यमंत्री ने कहा दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
म्मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चित्रकूट के सद्गुरु पब्लिक स्कूल से विगत दिनों अपहृत हुए दो जुड़वा भाई श्रेयांश और प्रियांश के सकुशल वापस नहीं मिलने की घटना को दुखद बताते हुए कहा कि इस घटना ने मुझे झकझोर दिया है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले में बच्चों के परिजनों से फोन पर चर्चा कर उन्हें सांत्वना दी और कहा कि निश्चित तौर पर यह घटना बेहद दुखद है, मुझे खुद इस बात का अफसोस है कि हम बच्चों को सकुशल वापस नहीं ला पाए. मेरी पूरी सरकार इस दुख की घड़ी में आपके साथ खड़ी है. हम निश्चित ही दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेंगे, यह मैं आपको विश्वास दिलाता हूं.
जिन्हें पुलिस ने किया गिरफ्तार
पद्मकांत शुक्ला के अलावा भवुआ बांदा जिले का राजू द्विवेदी, ग्राम तेदुरा बांदा जिले का लकी सिंह तोमर, भवुआ बांदा जिले का रोहित द्विवेदी, ग्राम छेरा बांदा जिले का रामकेश यादव और गुरदहा जिला हमीरपुरा का पिंटू यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.

स्त्री पात्रों को नयी दृष्टि से देखता है ‘अपने-अपने कुरुक्षेत्र’

 मीनाक्षी नटराजन के पहले उपन्यास का लोकार्पण  

रामायण और महाभारत एक ही सभ्यता के दो ऐसे महाकाव्य हैं जो मानव के आदर्श और यथार्थ का चित्रण करते हैं. रामायण जहां मनुष्य के आदर्श को बताता है तो महाभारत के उसके यथार्थ को चित्रित करता है. इन दोनों ही कृतियों पर पहले भी कई उपन्यास,कहानी,काव्य और नाटक लिखे गए हैं लेकिन उपन्यास अपने-अपने कुरुक्षेत्र ऐसा उपन्यास है जो महाभारत के स्त्री पात्रों को नयी दृष्टि से देखता है. लेखिका इसके लिए बधाई की पात्र हैं. 
यह कहना है साहित्यकार प्रो. रमेषचंद्र शाह का. वे आज माधवराव सप्रे संग्रहालय में  प्रबुद्ध राजनेता मीनाक्षी नटराजन के  उपन्यास अपने-अपने कुरुक्षेत्र के लोकार्पण अवसर पर  आयोजित विमर्श में बोल रहे थे. सप्रे संग्रहालय द्वारा आयोजित विमर्श में साहित्यकार प्रो.रमेश दवे एवं कथाकार उर्मिला शिरीष ने भी उपन्यास पर अपने विचार व्यक्त किए.  प्रो. शाह ने कहा कि लेखिका ने महाभारत के नारी पात्रों के माध्यम से नई बात कही है. सत्यवती जैसे पात्र के माध्यम से बातें कहलवाना अकल्पनीय है. इससे लगता है कि उन्होंने महाभारत को सूक्ष्मता से पढ़ा है और नए ढंÞग से देखा है इसके बाद समूचे महाभारत को भी नए रूप में प्रस्तुत करने का आग्रह यह कृति करती है. 
साहित्यकार एवं शिक्षाविद प्रो. रमेश दवे ने कहा कि उपन्यासकार ने कथा को मूल रूप से उठाकर अपनी दृष्टि को स्थापित किया है. पात्रों का अद्भुत चयन किया है. स्त्री,पुरुष और किन्नर सभी पात्रों के साथ न्याय किया है. कथा तत्व और भाषा शिल्प के लिहाज से भी यह उपन्यास श्रेष्ठ है. प्रो. दवे ने कहा  कि इस कृति में जिस तरह की हिन्दी लेखिका ने लिखी है वह हिन्दी के और लेखकों को रास्ता दिखाती है. 
कथाकार उर्मिला शिरीष ने भी उपन्यास की भाषा को सहज, सरल बताते हुए कहा कि उपन्यासकार ने महाभारत के स्त्री पात्रों को बंधी-बंधाई छवि से ऊपर उठकर वर्तमान से जोड़ा है. इसमें लेखिका गहन अध्ययन और शोध दिखाई देता है.  लेखकीय वक्तव्य देते हुए उपन्यासकार मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि इस उपन्यास को लिखने के पूर्व तैयारियों में पाया कि इसे नारियों तक सीमित रखेंगे तो दृष्टि मिलेगी, इसी को केन्द्र में रखा. इसके अलावा कृष्ण और भीष्म के संवाद ने इन्हें विस्तार दिया. इसे संवाद शैली में लिखा है पाठक अलग-अलग रूप में पढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि वेद व्यास ने जिस तरह से हर पात्र को सूक्ष्मता से देखा और उसका नाम तय किया यह अपने आप में अनूठा है. उन्होंने स्वीकार किया कि इसको लिखने के पूर्व पहले आए इस तरह के उपन्यासों की शैली को केन्द्र में रखा है. 

शिवराज ने पूछा क्या मध्यप्रदेश में मिस्टर बंटाढ़ार रिटर्न्स हो गया ?

 मध्यप्रदेश कभी शांति का टापू था जो अब अपराध का महाद्वीप बन गया
सतना के चित्रकूट से दो अपहृत बच्चों की हत्या के बाद राज्य में सियायत गर्मा गई है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिं हने सवाल खड़े किए हैं और पछात है कि क्या मध्यप्रदेश में मिस्टर बंटाधार रिटर्न्स हो गया है? उन्होंने कहा कि  मध्यप्रदेश शांति का टापू था, जो अब अपराध का महाद्वीप बन गया है.
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि पिछले 50 दिनों में महिला अपराध की 6 हजार से ज्यादा घटनाए, चोरी, लूट-पाट की 5,467 घटनाएं हुईं, लेकिन राज्य सरकार का ध्यान केवल अफसरों के तबादलों पर है. प्रदेश ऐसे नहीं चलता, बड़ा सवाल तो यह है कि प्रदेश असल में चला कौन रहा है. मुझे लगता है कि मध्यप्रदेश में 'मिस्टर बंटाधार रिटर्न्स' हो गया है.  उन्होंने कहा कि कांग्रेस  ने नारा दिया था 'वक्त है बदलाव का'. क्या वह बदलाव यही है? इतने दिन बच्चे अपराधियों के चंगुल में रहे, क्या गृहमंत्री ने कभी गंभीरता से लिया, क्या मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लिया? इनका पूरा ध्यान सिर्फ अधिकारियों के तबादलों पर है और प्रदेश में गुंडों का बोलबाला है.  श्रेयांश और प्रियांश वे फूल थे जो खिलने के पहले ही डाल से तोड़ लिए गए. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा केवल शाब्दिक सहानुभूति से काम नहीं चलेगा. प्रदेश में आगे कानून व्यवस्था की स्थिति दुरुस्त हो, इसके लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे. मैं दोनों बच्चों को श्रद्धा के सुमन अर्पित करता हूं.
शिवराज ने कहा कि पिछले दो महीनों में इन लोगों ने प्रदेश की अजीब स्थिति बना दी. दो महीने किसी सरकार की समीक्षा के लिए पर्याप्त नहीं, लेकिन जो हालत मेरे राज्य की है उससे मन में अफसोस ही नहीं होता, आत्मा भी रोती है. प्रदेश की जनता को कष्टों से निजात दिलाने के लिए सरकार नहीं चेती तो हम सड़क पर उतरेंगे. उन्होंने कहा कि  मैं अब भी सरकार से कहता हूं कि प्रदेश की बदतर हो चुकी स्थिति में सुधार लाएं नहीं तो हम वृहद स्तर पर आंदोलन करेंगे और जनता के लिए लड़ेंगे. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि  चित्रकूट में अगवा मासूम बच्चों की हत्या की घटना को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दुखद बताया है. शिवराज ने कांग्रेस की सरकार पर जमकर भड़ास भी निकाली है. उन्होंने बयान दिया है कि आपेक्षा थी कि सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी, और उन ये कांग्रेस सरकार खरा उतर रही है. हम कल्पना कर सकते हैं कि परिजनों में कितनी पीड़ा हो रही होगी. बच्चों ने कितनी यातनाएं सही होंगी. मध्यप्रदेश शांति का टापू था, जो अब अपराध का महाद्वीप बन गया है.
प्रदेश में सिर्फ दो ही उद्योग, तबादला और अपहरण
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने अपहृत दोनों बच्चों की हत्या पर शोक व्यक्त करते हुए कांग्रेस सरकार को आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कि सरकार तबादलों में उलझी है और प्रदेश में गुंडो-बदमाशों का व्यापार चल रहा है. उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन अपराध को रोकने में नाकाम रहा है. भार्गव ने कहा कि कमलनाथ सरकार में सिर्फ दो ही उद्योग चल रहे हैं, एक तबादला और दूसरा अपहरण.नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे मामले की मुख्यमंत्री से जांच कराने की मांग करते हुए गृह मंत्री से इस्तीफा देने को कहा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ पुलिस मुख्यालय पहुंचकर कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हैं और गृह मंत्री नदारत रहते हैं.
कानून मंत्री ने मांगा योगी आदित्यनाथ से इस्तीफा
अपहृत बच्चों की हत्या के मामले को लेकर राज्य के कानून मंत्री पी.सी.शर्मा ने दुख जताया और कहा कि घटना दुखद है. इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रेक अदालत में चलवाएंगे. उन्होंने कहा कि बच्चों को मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा से अगवा किया गया था. बच्चों के शव उत्तरप्रदेश में मिले हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह की वारदात को अंजाम देने वाले अपराधी उत्तरप्रदेश के ही हो सकते हैं. शर्मा ने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. 
बच्चों को छुड़ाने के गंभीरता से नहीं किए प्रयास
मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश सरकार की नाकामी की घोर निंदा की है. सिंह ने कहा है कि अगवा किए गए बच्चों को छुड़ाने में मध्यप्रदेश सरकार ने गंभीरता से प्रयास नहीं किए. मासूम बच्चों की हत्या की घटना दुखद और दर्दनाक है. प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद सब तरफ अपराध बढ़ रहे हैं और कानून व्यवस्था सरकार के नियंत्रण से  बाहर है, जो चिंतनीय है.
पिछली सरकार से बेहतर कर रहे कम
राज्य के गृह मंत्री बाला बच्चन ने  दोनों बच्चों की हत्या पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. गृह मंत्री ने कहा कि घटना के अपराधी पकड़े जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की तुलना में हम बेहतर काम कर रहे हैं, फिर भी कानून व्यवस्था पर फोकस हम करेंगे. कानून को बनाए रखेंगे. उन्होंने कहा कि अपराधियों पर विशेषकर अपहृत बच्चों की हत्या के अपराधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

सिंधिया ने कहा आदिवासियों-वनवासियों के घर उजड़ने से बचाने दायर करना चाहिए याचिका

मध्यप्रदेश से गुना के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में आए उच्च न्यायालय के फैसले पर चिंंता जताते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर मांग की है कि मध्यप्रदेश सरकार को आदिवासियों, वनवासियों के घर उजड़ने से बचाने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए. 
सिंधिया ने कमलनाथ को लिखे पत्र में कहा कि 20 फरवरी को प्रकशित हुए उच्च न्यायालय के निर्ण से देशभर के 10 लाख से ज्यादा अनुसूचित जनजाति और वन निवासी परिवारों के लिए चिंताजनक स्थिति उत्पन्न हो गई है. इनमें से 3.5 लख परिवात को मध्यप्रदेश से ही हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भाजपा प्रशासन में आदिवासियों और वन वासियों द्वारा जमा किए गए दावों को किसी न किसी कारण मान्यता नहीं दी जाती थी. उन्होंने पत्र में कहा कि उच्च न्यायालय में ही पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक मध्यप्रदेश में 2 लाख 4 हजार 123 अनुसूचित जनजातियों और 1 लाख 50 हजार 664 वन निवासियों के दावों को ठुकराया गया है, जो बाकी राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा है. 
सिंधिया ने पत्र में उल्लेख किया है कि केन्द्र सरकार ने वन अधिकार कानून के पक्ष में मजबूत दलीलें पेश नहीं की, यहां तक की सरकारी वकील तो कई पेशियों  में उपस्थित ही नहीं रहते थे, लेकिन केन्द्र सरकार की इन लापरवाहियों का नुकसान  आदिवासी और वन निवासियों को नहीं भुगतना चाहिए. उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ से आग्रह किया है कि प्रदेश में बड़ी मात्रा में आदिवासियों और वन निवासियों को उनकी जमीन और घर से उजड़ने से बचाने के लिए और उनके अधिकारियों के हनन को रोकने के लिए हमें हर संभव कोशिश करनी चाहिए. सिंधिया ने पत्र में लिखा कि मध्यप्रदेश सरकार पुनर्विचार याचिका भी दाखित कर सकती है. मुझे यह आशा है कि प्रदेश के आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रदेश की सरकार यह कदम जरुर उठाएगी.

मध्यप्रदेश में अधिकारी एक से ज्यादा शासकीय वाहन नहीं रख सकेंगे

मध्यप्रदेश सरकार अब अधिकारियों के खर्च में कटौती करने की तैयारी कर चुकी है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहले मंत्रियों पर खर्च में कटौती करने को कहा अब अधिकारियों पर यह फार्मूला लागू किया जा रहा है. अगर अधिकारी एक वाहन से अधिक वाहन उपयोग करता है तो उसका खर्च स्वयं अधिकारी को उठाना होगा. इतना ही नहीं अगर वह किराए का वाहन लेता है तो उसका किराया भी उसे ही देना होगा.
प्रदेश के सरकारी विभागों को अब हर माह की पांच तारीख को सरकारी गाड़ियों की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट वित्त विभाग को भेजनी पड़ेगी. खर्च में कटौती के लिए वित्त विभाग ने प्रदेश के मंत्रियों और अधिकारियों के लिए सिंगल वाहन पॉलिसी बनाई है, लेकिन कई विभागों में इसका पालन नहीं होने की शिकायतों के बाद अब विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग जैन ने हर माह की पांच तारीख को विभागों की वाहन व्यवस्था की रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया है. इस नीति के तहत अब किसी अफसर के पास एक से अधिक शासकीय वाहन होने की जानकारी तत्काल विभागाध्यक्ष को देनी होगी, वे विभाग प्रमुख अतिरिक्त वाहन को किसी अन्य अधिकारी को उसके दायित्व की आवश्यकता के अनुसार आवंटित कर सकेंगे. किराए पर ली गई गाडिय़ों की संख्या कम करने के साथ ही दोहरी जिम्मेदारी वाले अधिकारियों के पास भी एक ही वाहन हो यह सुनिश्चित करने का दायित्व विभाग प्रमुखों का होगा.
वित्त विभाग ने निर्देश दिए हैं कि  अधिकारियों के लिए अनुबंध पर लिए गए किराए की गाडिय़ों के लिए गृह विभाग द्वारा तय वाहन शुल्क की वसूली कर शासकीय कोष में जमा कराई जाए. यदि कोई अफसर इन निदेर्शों का पालन नहीं करता है तो विभाग के आहरण एवं संवितरण अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि अतिरिक्त वाहन पर होने वाले किसी भी प्रकार के खर्च का भुगतान न करे. अभी तक कई विभागों में किराए के वाहनों के लिए अफसरों से कोई शुल्क ही नहीं लिए जाने की जानकारी वित्त विभाग को मिली है.  राज्य सरकार के सभी विभागों के साथ यह व्यवस्था निगम-मंडल, स्वशासी संस्थाओं, निकाय और विश्वविद्यालयों में भी लागू होगी.

शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

मंत्री ने किया स्कूल बसों का निरीक्षण, 11 बसों के काटे चालान

मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार की सुबह सड़कों पर आकर बच्चों को स्कूल ले जाने वाली बसों का निरीक्षण किया. इस दौरान बसों में कुछ खामियां मिलने पर उन्होंने इसे ठीक कराने की हिदायत दी. उन्होंने 11 स्कूल बसों के चालान भी काटे.
मंत्री राजपूत शुक्रवार की सुबह चेतक ब्रिज क्षेत्र पहुंचे. इस दौरान उन्होंने लगभग 11 स्कूली बसों का निरीक्षण किया. वे बसों के अंदर गए और हालत का जायजा लिया. बच्चों से भी बात की और उनकी समस्याएं जानी. इस दौरान वे बस के अंदर चढ़े और चेक किया की कहीं ज्यादा बच्चों को तो नहीं बैठाया गया है. 8 से 10 बसों में उन्हें स्पीड गर्वनर नहीं मिला. वहीं बस चालक और परिचालक भी ड्रेस में नहीं थे. बस चालकों को हिदायतें दीं, साथ ही बसों की स्थिति पर भी चर्चा की. 
परिवहन मंत्री का कहना है कि अब विभाग के अफसर मैदान में उतकर बसों की चेकिंग करेंगे. अगर कोई अफसर अपने दफ्तर में बैठकर ही काम करता रहेगा और मैदान में नहीं उतरेगा तो उन पर कार्रवाई की जाएगी. मंत्री के इस औचक निरीक्षण से बस चालकों में हड़कंप मच गया है. ज्ञात हो कि राज्य में कई स्कूल बसों की हालत अच्छी न होने और हादसों की शिकायतें लगातार आती रहती हैं. यहां पुरानी और जर्जर बसों का उपयोग सामान्य है.

शिवराज ने कहा बाहरी व्यक्ति डांट रहा है मंत्रियों को

शिवराज सिंह चौहान 
अपनों के बाद भाजपा के निशाने पर आए दिग्विजय
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह द्वारा मंत्रियों को लेकर उठाए गए सवालों पर वे अपनी ही पार्टी में तो घिरते नजर आए, लेकिन अब भाजपा ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो उन्हें बाहरी बताते हुए कहा कि वे मंत्रिमंडल में नहीं है, फिर भी मंत्रियों को डांट लगा रहे हैं. वहीं इंदौर भाजपा नगर अध्यक्ष गोपीकृष्ण  नेमा ने सिंह को एक खुला पत्र लिखकर सिंह स्वयं को सुपर सीएम बता रहे हैं और लोकतंत्र का मजाक उड़ा रहे हैं.
विधानसभा सत्र में मंत्रियों के जवाब का विरोध करने के बाद दिग्विजय सिंह फिर मुसीबत में आ गए हैं. पहले उनके खिलाफ अपनी ही पार्टी के मंत्री उमंग सिंघार ने मोर्चा खोला, फिर कुछ विधायक असंतुष्ट नजर आए. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा और अपनी नाराजगी भी जताई, जिस पर मुख्यमंत्री ने मंत्री उमंग सिंघार को हिदायत भी दी. यह मामला कांग्रेस के अंदरुनी तौर पर चल रहा था, लेकिन सत्र के गुरुवार को समाप्त होते ही सिंह के खिलाफ भाजपा ने सीधा हमला करना तेज कर दिया. भाजपा की ओर से सबसे पहले हमला पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया. चौहान ने विदिशा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि  मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के साथ सुपर सीएम भी हैं. ढ़ाई मुख्यमंत्रियों की सरकार है. सचमुच में यह संवैधानिक संकट है कि एक बाहर का व्यक्ति जो मंत्रिमंडल में नहीं है, वह मंत्रियों को डांट रहा है. यह सरकार अपने अंतर्विरोधों के कारण ही गिर जाएगी.
नेमा ने लिखा पत्र
भाजपा के इंदौर नगर अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को एक खुला पत्र लिखकर कहा कि सिंह स्वयं को सुपर सीएम सिद्ध करने की कोशिश कर लोकतंत्र का मजाक उड़ा रहे हैं. नेमा ने अपने पत्र में सिंह द्वारा मंंत्रियों को नसीहत देने को लेकर कहा है कि यह लोकतंत्र के अंतर्गत मान्य नैतिक सिद्धांतों की हत्या है. आपकों यह नहीं भूलना चाहिए कि आप भी इसी सदन के सदस्य रहे हैं और पूर्व में प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे हैं. आपकों स्मरण होना चाहिए कि किसी मंत्री को दबाव प्रभाव में लेकर बयान देने एवं दिए गए बयान को बदलवाने का अलोकतांत्रिक तरीके से प्रयास करना निंदनीय  एवं अनुचित है. उन्होंने पत्र में लिया है कि तथाकथित सुपर सीएम के रुप में आपके द्वारा किए जा रहे इस प्रकार के कार्य जनचर्चा का विषय बन रहे हैं. अब प्रश्न यह है कि सदन में मंत्री आपसे चर्चाकर ही बयान देंगे? ऐसी नई व्यवस्था आप बनाना चाह रहे है, जो आपत्तिजक होने के साथ आलोचना के योग्य है.

याद रखना वह प्रभात झा का बेटा है

तुष्मल झा का धमकी देते हुए आडियो हुआ वायरल
प्रभात झा 
राज्यसभा सांसद प्रभात झा के बेटे तुष्मुल झा का एक आडियो वायरल हुआ है, इस आडियो में वे एक युवक को यह धमकी दे रहे हैं ‘याद रखना, वह मेरा भाई और प्रभात झा को बेटा है.’ इस पूरे मामले में सांसद प्रभात झा ने मौन साध रखा है. 
दरअसल तुष्मुल झा के छोटे भाई अयन्त को मिक्की चांदवानी नामक युवक ने मारने की धमकी दी. वायरल हुए आडियो के जरिए तुष्मुल, मिक्की को धमकी देते सुनाई दे रहे हैं. तुष्मुल झा आडियो में मिक्की द्वारा छोटे भाई अयत्न को गाली दिए जाने को लेकर धमकी देते सुनाई दे रहे हैं. तुष्मुल ने मिक्की को धमकी देते हुए कहा कि वह यह नहीं जानता की अयत्न उनका भाई और प्रभात झा का बेटा है. आडियो के वायरल होने के बाद से अब तक दोनों ही पक्ष मौन है. तुष्मुल इस आडियो को फर्जी बता रहे हैं और कह रहे हैं कि आडियो में उनकी आवाज नहीं है. वहीं वे यह भी कह रहे हैं कि वे तो उस नाम के व्यक्ति को जानते भी नहीं है. वहीं अयन्त का कहना है कि ऐसी कोई घटना  नहीं हुई, हम दोनों तो दोस्त हैं और जहां चार बर्तन होंगे, वहां तो आवाज आएगी ही. हालांकि आडियो को लेकर दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को भी किसी तरह से कोई शिकायत नहीं की गई है.
आडियो में यह कहा तुष्मुल ने
‘तुष्मुल : मेरे छोटे भाई से तुम्हारा क्या हुआ है. तुमने उसे गाली दी.
मिक्की : भैया कुछ भी नहीं. पहले उन्होंने गाली दी. मैं तो उन्हें पेबल-बे में एक प्रापर्टी दिखाने ले गया था.
तुष्मुल: तुम उसको गाली दोगे...
मिक्की : आप बताओ... अयत्न भाई मेरे दोस्त हैं. इतने सालों से उन्हें प्रॉपर्टी दिखाए जा रहा हूं. एक-दूसरे को भाई बोलते हैं.. अगर वो मेरी मां को गाली देंगे तो प्रैक्टिकली खुद सोचो आप. कोई सुनेगा क्या? उन्होंने गाली दी तो रिवर्ट में मैंने भी कहा.
तुष्मुल: बेटा हमारे बारे में नहीं जानते हो... ये बताओ तुमको क्या लगता है.. तुम्हारे साथ क्या होगा?
मिक्की : मैंने कोई गलत बात नहीं की. उन्होंने (अयत्न) धक्का-मुक्की की. रामभाई से पूछ लो. आपने तो अभी थाने में बैठा दिया. 
तुष्मुल : अरे बेटा अभी कुछ नहीं हुआ. तुष्मुल झा के बारे में तुम कुछ नहीं जानते. याद रखना वह मेरा छोटा भाई और प्रभात झा  का बेटा है. तुमको बताऊंगा बेटा. तू बच्चा है.
मिक्की : तो आप क्या करोगे. मेरे पास जान से मारने के मैसेज आ रहे हैं. फोन आ रहे हैं कि मुझे मारने गनमैन निकले हैं. क्या करोगे मेरा भैया.
तुष्मुल : अभी थोड़ी देर रुक.. 15-20 मिनट. तुमको अभी सब समझाएंगे.
मिक्की : आप मुझे धमकी दे रहे हैं.
तुष्मुल : हंसते हुए. मैं किसी को धमकी नहीं देता.’ 

संघ ने मांगा विंध्य के सांसदों का लेखा-जोखा

मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा के लिए संघ एक बार फिर सक्रिय हो गया है. संघ ने विंध्य अंचल के तीन लोकसभा क्षेत्रों  रीवा, सीधी और सतना के वर्तमान सांसदों का लेखा-जोखा मांगा है. संघ पर अंदुरुनि सर्वे भी करा रहा है, इसके बाद संगठन को यहां पर प्रत्यााशी चयन के लिए अपनी राय देगा.
संघ लोकसभा चुनाव के लिए अब मैदान में उतर गया है. अंचलवार वह वर्तमान सांसदों का अंदरुनी सर्वे करा रहा है. संघ ने इसकी शुरुआत विंध्य अंचल से की है. विंध्य अंचल में विधानसभा चुनाव में भाजपा को सफलता भी मिली थी. यहां पर कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा था. इसके चलते संघ चाहता है कि विंध्य अंचल में विधानसभा चुनाव में जो भाजपा के पक्ष में परिणाम आए वे लोकसभा में भी यथावत बने रहे. इस अंचल की सतना, रीवा और सीधी संसदीय सीटों पर संघ ने फोकस किया है. संघ यहां पर अंदरुनी सर्वे करा रहा है. इस सर्वे के आधार पर वह संगठन को प्रत्याशी चयन को लेकर अपनी राय भी देगा. वहीं संघ ने तीनों सीटों के वर्तमान सांसदों का लेखा-जोखा भी मांगा है. संघ इन तीनों सीटों पर वर्तमान सांसदों को लेकर उठ रहे विरोध का आकलन भी जमीनी स्तर पर कर रहा हैं. संघ को मिली जानकारी के अनुसार रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा, सतना के सांसद गणेश सिंह और सीधी की सांसद रीति पाठक को लेकर जनता में आक्रोश है. इस आक्रोश का आकलन संघ कर रहा है. सूत्रों की माने तो संघ तीनों संसदीय क्षेत्रों में प्रत्याशी बदलने को संगठन को कह सकता है.

ठेका, कमीशन नहीं नौकरी चाहता है नौजवान

 मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किया युवा स्वाभिमान योजना का शुभारंभ, कहा बेरोजगारी बड़ी समस्या
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में कृषि व्यवस्था चौपट है. किसान उत्पादन तो कर लेता है, मगर उसे बाजार में सही कीमत नहीं मिलती है. उन्होंने कहा कि नौजवान ठेका, कमीशन नहीं चाहता, वह तो नौकरी चाहता है. प्रदेश में बेरोजगारी बड़ी समस्या है.
यह बात मुख्यमंत्री ने आज राजधानी के लाल परेड मैदान में युवा स्वाभिमान योजना के शुभारंभ अवसर पर कही. योजना  21 से 30 साल के शहरी युवा बेरोजगारों के लिए शुरू की गई है, इस योजना के तहत शहरी युवाओं को 100 दिन का रोजागर और प्रशिक्षण दिया जाना है. युवाओं को चार हजार रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा. इस योजना के लिए योजनाओं में पंजीयन, युवा स्वाभिमान पोर्टल पर 12 फरवरी से हो रहे हैं. उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत पिछले 10 दिनों में प्रदेशभर में 1 लाख 55 हजार युवा बेरोजगारों ने अपना पंजीयन कराया है. भोपाल में पंजीयन कराने वाले युवा बेरोजगारों की संख्या करीब 4500 है.  
योजना का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि मैं प्रदेशवासियों को धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने हमारी सरकार बनाई. हमने बहुत की कम समय में युवाओं के लिए यह नई योजना शुरू की है और आगे भी हम आपकी सभी अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे.  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि व्यवस्था चौपट है. किसान उत्पादन तो कर लेता है, मगर उसे बाजार में सही दाम नहीं मिलता है. इसी तरह प्रदेश में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है. हमारा नौजवान ठेका, कमीशन नहीं मांगता, बल्कि वह नौकरी मांगता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी ने बड़े-बड़े वादे किए, नौजवानों को सपने दिखाए, मगर एक भी पूरा नहीं किया. उन्होंने कहा कि मोदी का डिजिटल इंडिया, स्कील इंडिया सब जुमला साबित हुए. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने अभी कहा कि हम किसानों को साल में 6 हजार रुपए देंगे, अब मध्यप्रदेश में किसानों को महज 100 दिन में साढ़े तेरह हजार रुपए मिलेंगे. उन्होंने कहा कि मैंने किसानों और प्रदेश की जनता को जो वचन दिया था, मैं उसे पूरा करूंगा. इस दौरान मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पोस्टर लगाने वाली सरकार नहीं है, बल्कि काम करने वाली सरकार हैं.
इस अवसर पर नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि अब प्रदेश का युवा बेरोजगार नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अब प्रदेश में सिंगल विंडो सिस्टम को खत्म कर दिया है. उन्होंने उद्योगपतियों से टेबल पर बात करनी शुरु कर दी है. इसके परिणाम भी जल्द ही सामने आएंगे. 
मंच छोड़कर चले गए महापौर
योजना के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में महापौर आलोक शर्मा भी मंच पर थे. उनकी उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने भाजपा और मोदी पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान जब मुख्यमंत्री का संबोधन खत्म हुआ तो क्षेत्रीय विधायक आरिफ मसूद को आभार प्रदर्शन के लिए मंच पर बुलाया गया. तभी अचानक शर्मा मंच छोड़कर चले गए. बताया जाता है कि शर्मा को यह उम्मीद थी कि उन्हें कार्यक्रम में संबोधन देने को कहा जाएगा, मगर ऐसा नहीं हुआ. शर्मा इससे से नाराज होकर मंच छोड़कर चले गए.

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

सरोज सिंह का दावा खारिज


मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह की पत्नी सरोज सिंह द्वारा अपने बेटों अजय सिंह और अभिमन्यु सिंह के खिलाफ दायर घरेलू हिंसा का मामला अदालत ने खारिज कर दिया. अदालत ने अजय सिंह और उनकी मां के बीच पूर्व में हुए पारिवारिक बंटवारे को आधार मानते हुए सरोज सिंह का दावा खारिज किया है.
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और उनके भाई अभिमन्यु सिंह के खिलाफ उनकी मां सरोज सिंह ने 19 जून को अदालत में घरेलू हिंसा का मामला पेश किया था. सरोज सिंह ने आरोप लगाए थे कि बेटा अजय सिंह पत्नी के दबाव में केरवा कोठी मेंं रहने नहीं दे रहा है. उन्होंने अदालत से मांग की थी कि उन्हें केरवा कोठी देवश्री में रहने की इजाजत दी जाए. सरोज कुमारी सिंह की ओर से कहा गया था कि वो अपने दोनों बेटों से अलग नोएडा में रह रही हैं. यह मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी गौरव प्रज्ञानन की अदालत में चल रहा था. 
अदालत को अजय सिंह के वकील साजिद अली द्वारा बताया गया कि सरोज सिंह और अजय सिंह द्वारा पूर्व में ही पारिवारिक संपत्तियों का बंटवारा हो चुका है. उन्होंने पार्टीशन डीड को भी अदालत में पेश किया था. इसके अलावा डीआईआर रिपोर्ट भी विस्तृत नहीं थी. इस रिपोर्ट में इस बात का कहीं जिक्र नहीं था कि सरोज सिंह के साथ घरेलू हिंसा कब, कहां और किसके सामने हुई थी. साथ ही अजय सिंह द्वारा मां को कभी कोठी में आने से रोकने की बात भी रिपोर्ट सामने नहीं आई.अदालत ने इन सभी तर्कों को सुना और मामले  पर सुनवाई करते हुए उन्होंने अजय सिंह और उनकी मां के बीच पूर्व में हुए पारिवारिक बंटवारे को आधार मानते हुए सरोज सिंह का दावा खारिज कर दिया.
यहां उल्लेखनीय है कि भोपाल के केरवा इलाके में बनी अर्जुन सिंह की करोड़ों रुपए कीमत की कोठी और अन्य संपत्तियों सरोज कुमारी सिंह, बेटी वीणा सिंह और बेटों अजय सिंह और अभिमन्यु सिंह के बीच विवाद चल रहा है. उनकी मां सरोज कुमारी सिंह का अदालत में अजय सिंह और अभिमन्यु सिंह के खिलाफ घरेलू हिंसा और भरण-पोषण का मुकदमा दायर करना इसी विवाद का नतीजा है.

तेज बारिश के साथ राजधानी में गिरे ओले


राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई जिलों में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है. बुधवार की रात को राजधानी में बारिश के साथ ओले गिरे और कई इलाकों में बिजली भी गुल हुई. राजधानी के अलावा राज्य के कई जिलों में इसी तरह के मौसम में बदलाव आया है.  बारिश और ओला वृष्टि की वजह से किसानों में फिर चिंता बढ़ गई है.
राजधानी भोपाल में बीती रात करीब डेढ़ बजे  तेज बारिश के साथ ओले गिरे. इस दौरान कई इलाकों की बिजली चली गई. करीब 10 मिनट तक छोटे ओले गिरते रहे. अचानक हुई इस ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है. भोपाल से लगे मंडीदीप, मिसरोद क्षेत्र में रुक-रुक कर गरज चमक के साथ तेज बारिश हुई. वहीं नसरुल्लागंज, रेहटी, हरदा, होशंगाबाद,सीहोर, बैतूल, क्षेत्र में भी ओले गिरे हैं.
मौसम विभाग के मुताबिक राजस्थान पर बने प्रेरित चक्रवात के कारण मौसम में ये बदलाव देखने को मिला है. मौसम विभाग के मुताबिक  प्रदेश के  बैतूल, हरदा, खंडवा, देवास, सतना, छिंदवाड़ा, सागर, जबलपुर, राजगढ़, उमरिया, मंदसौर और नीमच में बारिश होने की संभावना है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार राजस्थान से विदर्भ तक एक ट्रफ लाइन बनी हुई है. इसके अलावा एक अन्य सिस्टम भी बना है. इस वजह से कई जगह बारिश के साथ ओले गिरने का अनुमान है.
राज्य में बदले मौसम के चलते आज गुरुवार को धूप में चुभन कम रही, जबकि बुधवार को तेज धूप से लोग परेशान हो गए थे. आज दिनभर तेज हवाएं भी चलती रही और बुधवार की अपेक्षा आज कम गर्मी का अहसास भी लोगों ने किया.
यहां हो सकती है बारिश
मौसम विभाग ने राज्य के सागर, रीवा, शहडोल, जबलपुर, ग्वालियर, चंबल और भोपाल संभाग के जिलों के अलावा होशंगाबाद, बैतूल और हरदा एवं बुरहानपुर जिलों में बारिश होने की संभावना जताई है. मौसम विभाग के अनुसार राज्य में बीते 24 घंटों के दौरान सागर, भोपाल और होशंगाबाद संभागों के जिलों में बारिश होना दर्ज किया गया है. राजय में सबसे कम तापमान मंडला में 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. 

अजा, अजजा वर्ग के जनप्रतिनिधियों का अपमान कर रहे दिग्विजय


 भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष, विधायक  प्रदीप लारिया ने कहा कि मध्यप्रदेश मे कांग्रेस की अल्पमत सरकार मुश्किल परिस्थितियों में कमलनाथ के नेतृत्व मे चल रही है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह  सरकार के मंत्रियों पर लगातार अनुचित दबाव बना रहे है. वे लगातार अजा, अजजा विधायकों का अपमान कर रहे हैं.
लारिया ने कहा कि  अनुसूचित जाति और जन जाति के मंत्री सज्जन वर्मा, बाला बच्चन, उमंग सिंघार के विभागीय कार्यो मे हस्तक्षेप कर इस वर्ग के मंत्रियों को नीचा दिखाने का षडयंत्र कर रहे है. मध्यप्रदेश विधानसभा के पटल पर बाला बच्चन, उमंग सिंघार , जयवर्धन सिंह ने सच्चाई रखी है पर अपने पुत्र को बचाते हुए दोनों आदिवासी वर्ग के मंत्रियों के खिलाफ दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रुप से टीका टिप्पणी कर इस वर्ग को अपमानित करने का प्रयास किया है. लारिया ने सरकार के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा द्वारा दिग्विजय सिंह को दी गई नसीहत को एक साहसिक कदम बताते हुए कहा कि दिग्विजय अब वह भूल जाएं कि वह किसी रियासत के राजा है. दिग्विजय सिंह दलित वर्ग के मंत्रियों के खिलाफ सार्वजनिक बयान बाजी और अपने पुत्र को बंद कमरे मे समझाईस देकर किस तरह की राजनीति कर रहे है वे बताएं ?

गरीब सवर्ण आरक्षण मुद्दे पर भाजपा ने हंगामा कर किया बहिर्गमन

 विधानसभा अध्यक्ष द्वारा चर्चा कराने की मांग न मानने पर किया हंगामा

मध्यप्रदेश विधानसभा में आज लगातार दूसरे दिन गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का मामला गर्माया. भाजपा ने इसे लेकर सदन में चर्चा कराए जाने की मांग की, मगर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने इसकी अनुमति नहीं दी. इस पर भाजपा विधायकों ने जमकर हंगामा किया और सदन की कार्रवाई से बहिर्गमन कर दिया.
राज्य विधानसभा की आज की कार्रवाई शुरु होते ही भाजपा ने फिर गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की. यह मुद्दा नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव सहित अन्य भाजपा विधायकों ने उठाया. इस पर भाजपा विधायक सदन में चर्चा कराने की मांग करने लगे, मगर विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने उन्हें अपने स्थानों पर बैठ जाने को कहा, इस दौरान भाजपा विधायकों ने जमकर हंगामा किया और चर्चा कराने की मांग को दोहराते रहे. विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जब उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया गया तो भाजपा विधायकों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया.
मंत्रियों को लगाई फटकार
विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापित ने आज मंत्रियों को फटकार लगाई और नाराज होकर पांच मिनट के लिए सदन की कार्रवाई को स्थगित भी कर दिया. दरअसल शून्यकाल के दौरान मंत्री जयवर्धन सिंह, प्रियव्रत सिंह और सुखदेव पांसे  कुछ विधायकों से झूंड बनाकर चर्चा कर रहे थे. इस दौरान अध्यक्ष ने उन्हें कहा कि वे अपने स्थान पर जाकर बैठे. मगर वे नहीं माने तो नाराज अध्यक्ष ने बिना कुछ कहे कार्रवाई पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी. इस दौरान विपक्ष सदस्यों ने कहा कि मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब सदन को मंत्रियों के इस तरह के रवैये से शर्मसार होना पड़ा है.
यूरिया की कालाबाजारी की आठ शिकायतें
कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि प्रदेश में दो महीने में चार जिलों में यूरिया की कालाबाजारी की आठ शिकायतें मिली है.मंत्री ने यह जानकारी आज राज्य विधानसभा में भाजपा विधायक डा. नरोत्तम मिश्रा के प्रश्न के लिखित जवाब में दी. मंत्री ने बताया कि दिसंबर 2018 से अब तक उपलब्धता के अनुसार खाद का वितरण किसानों को किया गया है. इस अवधि में खाद न मिलने को लेकर किसानों ने आंदोलन नहीं किया. उन्होंने कहा कि गुना, दतिया, अशोकनगर, श्योपुराकला, रायसेन, राजगढ़ और होशंगाबाद जिलों में पुलिस की निगरानी में खाद का वितरण कराया गया था, लाठी चार्ज की कहीं कोई शिकायत नहीं मिली. उन्होंने बताया कि जबलपुर में वितरण में अनियमितता की शिकायत मिली थी, जिस पर गोदाम प्रभारी को निलंबित किया गया. सतना में कालाबाजारी की दो शिकायतें मिली. इसी तरह ग्वालियर में चार शिकायतें, होशंगाबाद में एक शिकायत कालाबाजारी और अनियमितता की मिली थी.वहीं दतिया में तीन व्यक्ति निरीक्षण के दौरान बगैरी अनुज्ञप्ति के उर्वरक करते पाये गए जिन पर प्राथमिकी दर्ज  की गई है.
नौकरी लगी पहले, बाद में बना जाति प्रमाण पत्र
स्वास्थ्य विभाग में औषधि निरीक्षक के पद पर शोभित की नौकरी 1997 में लगी थी.उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत हुई तो पता चला कि शोभित ने जाति प्रमाण पत्र 2007-08 में बनवाया था. उन्होंने अपना जाति प्रमाण पत्र अनुसूचित जाति, जनजाति (हल्वा) का बनवाया था. यह जानकारी आज राज्य विधानसभा में विधायक प्रदीप पटेल के प्रश्न के लिखित जवाब में जनजातीय मंत्री ओमकार सिंह मरकाम ने दी. उन्होंने बताया कि इस मामले में छानबीन समिति 2018 में दमोह कलेक्टर को पत्र लिखकर जानकारी दी है. वहीं विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से भी जानकारी मांगी है.
छिंदवाड़ा को संभाग बनाने का प्रस्ताव नहीं
राज्य विधानसभा में राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि छिंदवाड़ा को संभाग बनाने का प्रस्ताव नहीं है. राजपूत ने यह जानकारी विधायक सुनील उइके के प्रश्न के लिखित जवाब में दी. उन्होंने  बताया कि इस आशय का प्रस्ताव विभाग के पास विचाराधीन नहीं है. वहीं जुन्नारदेव एवं तामिया तहसीलों से दमुआ और देलाखारी को अलग करने की कार्यवाही भी विचाराधीन नहीं है.

किसानों के मुद्दे पर हंगामा, तीखी नोंक-झोंक


मध्यप्रदेश विधानसभा में आज किसानों की कर्ज माफी के मुद्दे पर सदन में चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ और भाजपा एवं कांग्रेस सदस्यों के बीच तीखी नोंक-झोंक भी हुई. भाजपा ने किसानों की कर्ज माफी को कांग्रेस द्वारा किसानों को दिया जा रहा धोखा बताया.
राज्य विधानसभा में आज ओला-पाला और किसान कर्ज माफी मुद्दे पर सदन में चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों ने जमकर हंगामा किया. भाजपा विधायकों का कहना था कि किसान कर्ज माफी के लिए सरकार द्वारा पैसों का खुलासा नहीं किया जा रहा है. कितना पैसा किसानों की कर्ज माफी के लिए सरकार ने रखा है और कितना दिया जा रहा है. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव सहित अन्य भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार पैसों का राज क्यों छिपा रही है? इस पर राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने पूर्ववर्ती सरकार पर किसानों के नाम पर भ्रष्टाचार किए जाने की बात कही तो मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि अगर पूर्ववर्ती सरकार ने भ्रष्टाचार किया है तो अब आपकी सरकार है, जांच करा लें. इसी बीच संसदीय मंत्री डा. गोविंद सिंह भी बोल उठे. इस पर डा.मिश्रा ने विरोध जताया और जमकर नोंक-झोंक होने लगी. 
स्वाइन फ्लू प्रदेश में 35 मौतें
विधानसभा में भाजपा विधायक डा. सीताशरण शर्मा द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण पर चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि राज्य में स्वाइन फ्लू से 35 मौतें हुई है. प्रदेश में इसके स्वाइन फ्लू से इलाज के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं.  स्वास्थ्य मंत्री का जवाब सुनते ही विपक्षी विधायकों ने कहा कि जब इलाज की व्यवस्था इतनी दुरुस्त है तो इतनी मौत कैसे हो गई.  उन्होंने प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 2 वर्ष पूर्व मंजूरी मिलने के बाद भी वायरोलॉजी लैब का काम प्रारंभ नहीं होने पर भी आश्चर्य जताया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें यह प्रयास करना चाहिए कि स्वाइन फ्लू के मरीज न बढ़ें और उसके इलाज की पर्याप्त व्यवस्था हो.
पब्जी मोबाइल गेम बंद करने की मांग
भाजपा विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने आज राज्य विधानसभा में पब्जी मोबाइल गेम बंद किए जाने की मांग की. उन्होंने कहा कि यह गेम अफीम की तरह हो गया है. आज के युवाओं को पब्जी का नशा लग गया है. उन्होंने कहा कि देश के 7 राज्यों ने इस गेम पर प्रतिबंध लगाया है, हमें भी प्रदेश में इस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए.

बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

मुख्यमंत्री के लिए दीपक ने दिया इस्तीफा


मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए छिंदवाड़ा के कांग्रेस विधायक दीपक सक्सेना विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है. विधानसभा अध्यक्ष एन.पी. प्रजापति ने उनका इस्तीफा भी मंजूर कर लिया है.
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ अभी विधानसभा के सदस्य नहीं हैं. उन्हें शपथ लेने के छह माह के भीतर विधानसभा सदस्य बनना आवश्यक है. इसी को लेकर दीपक सक्सेना ने छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से इस्तीफा देकर कमलनाथ के लिए क्षेत्र खाली कर दिया है. माना जा रहा है कि लोकसभा के आम चुनाव के साथ ही छिंदवाड़ा विधानसभा के लिए उपचुनाव होगा.
उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा संसदीय सीट से कमलनाथ सांसद हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद ये कयास लगाए जा रहे थे कि कमलनाथ छिंदवाड़ा के किस विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे. उनके लिए छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र तथा सौसर विधानसभा क्षेत्र बेहतर विकल्प माने जा रहे थे. कमलनाथ के करीबी माने जाने वाले विधायक दीपक सक्सेना पहले भी उनके लिए सीट छोड़ने की बात कह चुके थे, ऐसे में सक्सेना ने अब जाकर ये सीट मुख्यमंत्री के लिए खाली कर दी है.

मीसाबंदी पेंशन नहीं कर रहे बंद

 प्रदेश के मीसाबंदियों की  संख्या नहीं मालूम सरकार को

मध्यप्रदेश में मीसांबंदी पेंशन को सरकार द्वारा बंद नहीं किया जा रहा है. प्रदेश में मीसाबंदियों की संख्या कितनी है, इसकी भी जानकारी सरकार को नहीं है. सरकार इसकी जानकारी एकत्रित करा रही है.
यह जानकारी आज राज्य विधानसभा में भाजपा विधायक डा. नरोत्तम मिश्रा के प्रश्न के लिखित जवाब में सामान्य प्रशासन मंत्री डा. गोविंद सिंह ने दी. उन्होंने बताया कि प्रदेश में कितने मीसाबंदी है इसकी जानकारी एकत्रित कराई जा रही है. मंत्री ने बताया कि यह पेंशन ऐसे लोकतंत्र सेनानी जो एक माह से कम समय के लिए जेल में बंद रहे हों उन्हें 8 हजार रुपए प्रतिमाह और एक माह से अधिक समय के लिए जेल में बंद रहने वाले लोकतंत्र सेनानियों को 25 हजार रुपए प्रतिमाह की दर से सम्मान राशि की पात्रता होगी. मंत्री ने बताया कि यह पेंशन बंद नहीं की जा रही है. उन्होंने बताया कि यह पेंशन आपातकाल के दौरान राजनीतिक या सामाजिक कारणों से मीसा या डीआईआर के अधीन जेल या पुलिस थानों में बंद रहे लोगों को दी जा रही है.
सरोगेसी क्लीनिकों में 79 बच्चों का हुआ जन्म
मध्यप्रदेश के 21 पंजीकृत सेरोगेसी क्लीनिकों में 1 जनवरी 2012 से अब तक 79 बच्चों का जन्म हुआ है. बच्चा प्राप्त करने वाले दंपत्तियों में विदेशी दंपत्ति नहीं है. यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भाजपा विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया के प्रश्न के लिखित जवाब में दी. मंत्री ने बताया कि प्रदेश में सेरोगेसी क्लीनिकों के लिए तय नियमों के तहत 21 क्लीनिक पंजीकृत हैं. 1 जनवरी 2012 से अब तक इन क्लीनिकों में 79 बच्चों का जन्म हुआ है. इनमें बच्चा प्राप्त करने वाले कोई भी विदेशी दंपत्ति नहीं है. मंत्री ने बताया कि सेरोगेसी हेतु बच्चा चाहते वाले दंपत्ति से सेरोगेसी क्लीनिक द्वारा 1 लाख रुपए से 1.75 लाख रुपए और पराई कोख वाली महिला के आपसी समझौते के अनुसार 4 लाख से 5 लाख की राशि कोख में बच्चा पालने वाली महिला को दी जाती है. शासन द्वारा कमजोर परिवारों के लिए किसी तरह की कोई रियायत देने का प्रावधान नहीं है.
नहीं है प्रशिक्षित स्टाफ 
स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने आज स्वीकार किया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र छपारा में ईसीसी के लिए प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है. इसके कारण लोगों को ईसीजी की सुविधा नहीं मिल पा रही है. सिलावट ने भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन के प्रश्न के लिखित जवाब में यह बात स्वीकार की. उन्होंने कहा कि जिन स्वास्थ्य केन्द्रों पर ईसीजी और पैथोलाजी की सुविधयाएं नहीं है, वहां पर यह तय किया जा रहा है कि भविष्य में यह सुविधा उपलब्ध कराई जा सके.

मंदसौर गोलीकांड, मंत्री के बयान पर मचा घमासान



मध्यप्रदेश विधानसभा में गृह मंत्री बाला बच्चन द्वारा मंदसौर गोली कांड को लेकर दिए बयान को लेकर आज भी घमासान मचा रहा. भाजपा विधायकों ने सदन के बाहर मीडिया से चर्चा करते हुए मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस और मुख्यमंत्री कमलनाथ पर सीधा हमला बोला, जबकि कांग्रेस के मंत्री आज बचाव की मुद्रा में नजर आए. मंत्रियों ने अधिकारियों को निशाने पर लिया और कहा कि जवाब तैयार करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी.
गृह मंत्री बाला बच्चन द्वारा मंदसौर गोलीकांड, वन मंत्री उमंग सिंगार द्वारा विधानसभा में  दिए गए प्रश्नों के जवाब में शिवराज सरकार को क्लीन चिट देने की बात सामने आई थी, इस मामले को लेकर आज बुधवार को भी विधानसभा परिसर में भाजपा ने कांग्रेस और मुख्यमंत्री कमलनाथ को घेरा. पूर्व मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कमलनाथ सरकार में जो मंत्री बनाए गए हैं, वे अनुभवहीन है. विधानसभा के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है. मंत्री और मुख्यमंत्री ट्वीट कर विधानसभा के नियमों को तोड़ रहे हैं. मिश्रा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि जब तक पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह अपने पुत्र जयवर्धन सिंह को मुख्यमंत्री नहीं बनवा देते तब तक सरकार ऐसी ही चलती रहेगी. 
इस मामले का लेकर विधि मंत्री पी.सी.शर्मा ने इस मामले में कहा कि किसी को भी क्लीनचिट नहीं दी गई है. पूरा मामला मुख्यमंत्री की संज्ञान में है. इस मामले की जांच कराई जा रही है कि जवाब किन अधिकारियों ने दिया और उन पर कार्रवाई की जाएगी. वहीं लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह ने कहा कि विधानसभा में किसी भी तरह का जवाब देने के पहले उसे मंत्रियों को पढ़ लेना चाहिए. इसके अलावा उसका अध्ययन भी करना चाहिए. इसके बाद ही जवाब दिया जाना चाहिए. अधिकारी कोई खुदा नहीं होता, जो हम उसके द्वारा दिए जवाब को सही मान लें.
सिंहस्थ मामले में किसी को नहीं दी क्लीनचिट
नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि सिंहस्थ मामले में सरकार की ओर से किसी को भी क्लीनचिट नहीं दी गई है. उन्होंने कहा कि अभी तक विभाग को रिपोर्ट की नहीं मिली है. सिंह ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने इस मामले की फाइल की गुम करा दी है. इस पूरे मामले को लेकर प्रमुख सचिव को निर्देशित किया है कि जल्द ही यह फाइल निकलवाएं. जो भी इस मामले में दोषी होंगे कार्रवाई की जाएगी.
फिर छलका शेरा का दर्द
बुराहनपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा का दर्द आज फिर छलका है. सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता ऐसे हैं, जो मुख्यमंत्री कमलनाथ तक वास्तविकता ही नहीं पहुंचने दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं खुद कई बार मुख्यमंत्री से मुलाकात करने का समय मांग चुका हूं, मगर मुझे समय ही नहीं मिल रहा है. मैंने सरकार को समर्थन दिया है और मुझे ही विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाया गया. उन्होंने कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में बैनर और पोस्टरों से मेरा चेहरा ही गायब कर दिया जाता है, शायद कांग्रेस को मेरा चेहरा हीं पसंद नहीं है. मैं अपनी सारी बातों को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलूंगा, मैंने उनसे समय मांगा है, अभी तो समय नहीं मिला है, मगर जब मिलेगा सारी बात उनके सामने रखूंगा.

सैनिक स्कूल के लिए केन्द्र से दिलाएं मदद


राज्य विधानसभा में भिंड जिले में सैनिक स्कूल को लेकर मामला गर्माया. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखे बहस भी हुई. बहस में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्कूल खुलवाने के लिए जो मदद लगेगी वह हम केन्द्र से दिलाएंगे. इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी जवाब देते हुए कहा कि भिंड में दूसरा सैनिक स्कूल खुलना चाहिए, इसके लिए आपकों केन्द्र से मदद दिलानी चाहिए, आप तो खजाना पूरा खाली करके गए हैं. इस पर शिवराज सिंह ने जवाब दिया  हम तो सरप्लस करके गए थे.
भिंड जिले में सैनिक स्कूल का मामला बसपा विधायक संजीव सिंह संजू ने प्रश्नकाल में उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य के भिंड और मुरैना जिले से अधिक संख्या में सेना में भर्ती होने के लिए युवा जाते हैं. इसका जवाब संसदीय कार्यमंत्री डा. गोविंद सिंह ने दिया. इस पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई.   प्रदेश में भिंड और मुरैना यह दो जिले ऐसे हैं जहां से सबसे अधिक नौजवान देश की सैन्य सेवाओं में भर्ती होते हैं. इसलिए पूर्व में हमारी सरकार ने इस क्षेत्र में एक सैनिक स्कूल की आवश्यकता महसूस की थी और इसके लिए आवश्यक जरूरतों को पूरा करने की दिशा में कार्य आरंभ किया था, लेकिन इसके लिए धन मुहैया कराना अकेले केंद्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, इसमें राज्य सरकार को भी बराबर से अपनी हिस्सेदारी निभानी होगी. उन्होंने कहा कि प्रदेश के रीवा में बने सैनिक  विद्यालय में भी राज्य सरकार समय-समय पर अपना आर्थिक सहयोग देती है, इसी प्रकार से भिंड में भी उसे पहल करना चाहिए. केंद्र से जो भी मदद हो सकेगी उसके लिए हम प्रयास करेंगे. 
इस पर संसदीय मंत्री डा. सिंह ने कहा कि केन्द्रीय स्कूल उसी स्थिति में खोला जा सकता है, जब केन्द्र सरकार इसके लिए 100 करोड़ की मदद करे. उन्होंने कहा कि राशि मिलेगी तभी भवन निर्माण का कार्य शुरु होगा. मंत्री के इस जवाब पर तीखी-नोंक-झोंक भी हुई. फिर मुख्यमंत्री कमलनाथ  हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार भिंड में सैनिक  स्कूल बनाने को लेकर गंभीर है, लेकिन सभी को पता है कि अभी खजाना खाली है. आप मदद करा दीजिए केन्द्र से. इस पर शिवराज सिंह ने जवाब दिया हम तैयार है, मगर खजाना सरप्लस छोड़कर गए थे.

दो विभागों को मिलाकर बना आध्यात्म विभाग

प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक सत्येंद्र पाठक के स्थान पर उनकी तरफ से पूछे गए सवाल को उठाते हुए भाजपा विधायक विश्वास सारंग ने पूछा कि क्या शासन द्वारा आध्यात्म विभाग का गठन किया गया है और उसके तहत तीर्थ दर्शन योजना का संचालन हो रहा है. इस पर जवाब देते हुए आध्यात्म विभाग के मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि दो विभागों धर्मस्व और आनंद को मिलाकर आध्यात्म विभाग का गठन किया गया है. आध्यात्म से ही आनंद आता है. आपने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 1950 में ही संसद में कहा था कि आध्यात्म विभाग का गठन किया जाना चाहिए वहां तो नहीं हुआ पर हमने यहां आध्यात्म विभाग का गठन कर दिया. इस दौरान नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत कितने स्थानों पर तीर्थ दर्शन ट्रेनें गई हैं. उन्होंने कहा कि यह योजना बंद नहीं होनी चाहिए. इस पर आध्यात्म विभाग के मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि अभी कुंभ के लिए ट्रेनें भेजी गई हैं. जिन स्थानों को तीर्थ दर्शन के लिए अधिसूचित किया गया है उसमें प्रयागराज भी है.
व्यापमं बंद करने का प्रस्ताव नहीं
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग के पास व्यापमं को बंद करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. कमलनाथ ने विधायक हर्ष विजय गेहलोत के एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि व्यापमं वित्तीय अधिकार प्राप्त है. प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड को परीक्षा शुल्क के निर्धारण का अधिकार है. अत: यह कहना सही नहीं है कि बेरोजगारों के साथ किसी प्रकार का छलावा किया जाता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में सामान्य प्रशासन विभाग में व्यापमं को बंद करने जैसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.

हमें संविधान का कोई पाठ न पढ़ाएं : कमलनाथ


मध्यप्रदेश विधानसभा में आज मुख्य विपक्षी दल के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया. सदन की आज की कार्रवाई शुरु होते ही मंत्रियों द्वारा सोमवार को दिए लिखित जवाब को लेकर भाजपा ने संवैधानिक संकट खड़ा होने की बात कह डाली साथ ही विशेषाधिकार हनन की सूचना देने को कहा. इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा को करारा जवाब दिया और कहा कि विपक्ष हमें संविधान का पाठ न पढ़ाए. भाजपा लंबे वक्त के बाद विपक्ष में बैठी है. उसका यह सफर मंगलमय हो.
मध्यप्रदेश विधानसभा में बुधवार को आज की कार्यवाही शुरु होते ही नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और भाजपा के वरिष्ठ विधायक डा. नरोत्तम मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के द्वारा गृह एवं वन विभाग के मंत्रियों को लेकर सार्वजनिक तौर पर की गई टिप्पणी का विषय उठाते हुए कहा कि यह सब कुछ संविधान के विरुद्ध हो रहा है. दोनों ने यहां तक चेतावनी दे डाली कि वे इस विषय को लेकर विशेषाधिकार भंग की सूचना तक दे सकते हैं. इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता उन्हें संविधान का कोई पाठ न पढ़ाएं. उन्हें मालूम है कि संविधान की क्या मंशा है और क्या मर्यादाएं हैं. हमें सदन की गंभीरता को बनाए रखने के लिए प्रयास करना चाहिए. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि यह सही है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ पूरी तरह से संविधान की मंशा के अनुसार कार्य कर रहे हैं. इसके बाद भी कुछ देर तक वाद-विवाद की स्थिति बनी रही तब विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के स्पष्टीकरण के बाद अब कोई विषय नहीं बचा है.
सवर्ण आरक्षण, मंत्रिमंडल की समिति करेगी फैसला
विधानसभा में शून्य काल के दौरान भाजपा विधायक और पूर्व संसदीय कार्य मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने अनारक्षित वर्गों के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा उठाया. डा. मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार ने संविधान संशोधन करके अनारक्षित वर्गों के गरीबों को आरक्षण देने की व्यवस्था की है. देश के कई राज्य इसे लागू कर चुके हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में अब तक यह आरक्षण लागू नहीं किया गया है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसका जबाव देते हुए कहा कि गरीबों को आरक्षण देना हमेशा कांग्रेस का विषय रहा है. हमने इस मुद्दे को लेकर मंत्रिमंडलीय उप समिति बना ली है. वह समिति यह विचार करेगी कि किस तरह इसे लागू किया जाना है. आपने कहा कि उप समिति की रिपोर्ट मिलते ही गरीब आरक्षितों को आरक्षण का लाभ देना प्रारंभ कर दिया जाएगा.
उठा पन्ना में इंजीनियरिंग कालेज खोलने का मुद्दा
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री ब्रजेंद्र प्रताप सिंह ने पन्ना  में सरकारी इंजीनियरिग कालेज खोले जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि इसके बारे में पूर्व सरकार ने आदेश जारी कर दिए थे लेकिन अब तक  स्कूल खोले जाने के प्रक्रिया जारी नहीं हुई है. इस पर बाला बच्चन ने कहा कि पिछली सरकार ने आचार संहिता लागू होने के कुछ दिन पूर्व ही पन्ना में इंजीनियरिंग कालेज खोले जाने की स्वीकृति दी थी. हम इन कालेजों के खोले जाने के बारे में विचार कर रहे हैं इस पर शीघ्र ही फैसला होगा. इस पर जब ब्रजेन्द्र सिंह ने समय सीमा बताने की बात की तो उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश में 160 से ज्यादा इंजीनियरिंग कालेज में जिनमें काफी सीटें खाली हैं. जब भाजपा विधायक ने पन्ना में कालेज खोले जाने पर जोर दिया तो मंत्री ने कहा कि अभी डीपीआर बनना है इसके बाद शीघ्र ही हम इस दिशा में कार्य करेंगे.

मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019

मरकाम, शाह को बैतूल से हटाया


राज्य सरकार ने राज्य प्रशासिनक सेवा के अधिकारियों के तबादले किए हैं. इसके तहत राकेश सिंह मरकाम और राजेश शाह को डिप्टी कलेक्टरों को हटाया गया है.
जारी आदेश के अनुसार राकेश सिंह डिप्टी कलेक्टर बैतूल को डिप्टी कलेक्टर मंडला, मुकुल गुप्ता डिप्टी कलेक्टर डिप्टी कलेक्टर भोपाल को आवंटन अधिकारी संपदा संचालनालय भोपाल, राजेश शाह डिप्टी कलेक्टर बैतूल को डिप्टी कलेक्टर नरसिंहपुर, अखिलेश कुमार सिंह डिप्टी कलेक्टर रीवा को डिप्टी कलेक्टर डिण्डोरी, गोपाल सिंह वर्मा डिप्टी कलेक्टर उज्जैन को विदिशा, लक्ष्मीकांत खरे डिप्टी कलेक्टर सागर को डिप्टी कलेक्टर रायसेन, बृजेश सक्सेना डिप्टी कलेक्टर होशंगाबाद को डिप्टी कलेक्टर सागर, हुनेन्द्र घोरमारे डिप्टी कलेक्टर मंडला को डिप्टी कलेक्टर सिवनी, शिवलाल शाक्य डिप्टी कलेक्टर मंदसौर को डिप्टी कलेक्टर नीमच और सुरेश कुमार बराहदिया डिप्टी कलेक्टर गुना को डिप्टी कलेक्टर मुरैना पदस्थ किया है.इसके अलावा दिशा नागवंशी अपर कलेक्टर भोपाल को महाप्रबंधक राज्य नागरिक आपूर्ति निगम भोपाल पदस्थ किया है.