फूल-पत्तियों का उपयोग भी किया जा रहा खाद बनाने में प्लास्टिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में युवाओं के लिए स्टार्टअप की अपार संभावनाएं हैं. युवा वर्ग इस क्षेत्र में बेहतर प्रोजेक्ट बनाकर नई शुरूआत कर सकते हैं. राजधानी भोपाल में मानव बाल से खाद भी तैयार की जा रही है. धार्मिक स्थलों में एकत्र होने वाली फूल-पत्तियों का उपयोग भी खाद बनाने के लिए किया जा रहा है.
यह जानकारी सार्थक सामुदायिक विकास एवं जन-कल्याण संगठन के इम्तियाज अली ने भोपाल के गांधी नगर स्थित सागर इंस्टीट्यूट में एप्को के सहयोग से आयोजित व्याख्यान में दी. इम्तियाज अली ने बताया कि उनकी संस्था ने प्लास्टिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन वेस्ट पिकर्स उत्थान परियोजना का भोपाल माडल प्रस्तुत किया है, जिसकी देश भर में प्रशंसा हुई है. अली ने कहा कि उन्होंने अपने माडल में भोपाल शहर को 19 जोन और 85 वार्डों में बांटा है. इसके लिए उन्होंने 3200 पंजीकृत वेस्ट पिकर्स तैयार किए और इन्हें सार्थक कर्मी का नाम दिया. इनमें महिला और पुरूष दोनों शामिल हैं. ये सार्थक कर्मी स्वच्छ पर्यावरण के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. इन्हें कचरा संग्रहण के लिए रिक्शा भी उपलब्ध करवाया गया है. इसके अलावा, इन कर्मियों को परिचय-पत्र भी उपलब्ध कराये गये हैं. प्लास्टिक अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए मशीनों का भी उपयोग किया जा रहा है. इनमें फटका और बेलींग मशीन प्रमुख है. उन्होंने बताया कि प्लास्टिक अपशिष्ट की ग्रेडिंग कर निर्धारित साइज की चिप्स बनाकर सड़क निर्माण में उपयोग किया जा रहा है. अली ने बताया कि राजा भोज सेतु की सड़क में वेस्ट प्लास्टिक मटेरियल का उपयोग किया गया है. इसके अलावा, पालीथिन से बने कुशन, पेपर ब्लाक एवं अन्य सामग्री भी तैयार की जा रही है. अली ने बताया कि भोपाल शहर में मानव बाल से खाद भी तैयार की जा रही है. धार्मिक स्थलों में एकत्र होने वाली फूल-पत्तियों का उपयोग भी खाद बनाने के लिए किया जा रहा है.
वक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि दुनिया के अनेक देश ने प्लास्टिक के उपयोग को प्रतिबंधित किया है. इन देशों में प्लास्टिक प्रतिबंधित करने में जनता की भागीदारी और जागरूकता अभूतपूर्व रही है. उन्होंने बताया कि सस्ती कीमत पर उपलब्ध होने से प्लास्टिक और पालीथिन का प्रचलन बढ़ा है. आशुतोष बताया कि पालीथिन के अंधाधुध उपयोग से भारत में बड़ी संख्या में गाय समेत अन्य मवेशी और समुद्री जीव काल ग्रसित हो रहे हैं. उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण के लिए ब्राण्ड अम्बेसडर की भूमिका निभाने का आव्हान किया.
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