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| शर्मिला टैगोर |
यहां यह बता दें कि पिछले दिनों रायसेन के औबेदुल्लागंज में 721 एकड़ जमीन के नामांतरण की फाइल एसडीएम के पास पहुंची थी. इसका नामांतरण भी कर दिया गया, लेकिन जब यह फाइल दोबारा तहसीलदार के पास पहुंची तो उसने इसको खारिज कर दिया और इसकी जानकारी बैठक में संभागायुक्त को दी. इसके बाद से संभागायुक्त ने जानकारी जुटाई तो यह पता चला कि जिस जमीन का नामांतरण किया जा रहा था. वो नवाब प्रॉपर्टी है.
उल्लेखनीय है सरकार ने जमींदारी प्रथा को खत्म करने के लिए सीलिंग एक्ट 1961 में लागू किया था. इसके तहत कोई भी व्यक्ति 54 एकड़ से ज्यादा जमीन नहीं रख सकता है. अगर ज्यादा जमीन हुई तो वह सीलिंग एक्ट के तहत आएगी. इस एक्ट के तहत भोपाल नवाब की निजी 133 प्रापर्टी को छोड़कर सभी को एक्ट के तहत लिया गया था, लेकिन अधिकारियों की गलती के चलते नवाब की कुछ जमीनें सरकारी रिकार्ड में नहीं आ सकी. अब इन जमीनों का दोबारा सर्वे कराकर सरकारी रिकार्ड में लिया जा रहा है.

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