मध्यप्रदेश सरकार अब अधिकारियों के खर्च में कटौती करने की तैयारी कर चुकी है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहले मंत्रियों पर खर्च में कटौती करने को कहा अब अधिकारियों पर यह फार्मूला लागू किया जा रहा है. अगर अधिकारी एक वाहन से अधिक वाहन उपयोग करता है तो उसका खर्च स्वयं अधिकारी को उठाना होगा. इतना ही नहीं अगर वह किराए का वाहन लेता है तो उसका किराया भी उसे ही देना होगा.प्रदेश के सरकारी विभागों को अब हर माह की पांच तारीख को सरकारी गाड़ियों की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट वित्त विभाग को भेजनी पड़ेगी. खर्च में कटौती के लिए वित्त विभाग ने प्रदेश के मंत्रियों और अधिकारियों के लिए सिंगल वाहन पॉलिसी बनाई है, लेकिन कई विभागों में इसका पालन नहीं होने की शिकायतों के बाद अब विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग जैन ने हर माह की पांच तारीख को विभागों की वाहन व्यवस्था की रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया है. इस नीति के तहत अब किसी अफसर के पास एक से अधिक शासकीय वाहन होने की जानकारी तत्काल विभागाध्यक्ष को देनी होगी, वे विभाग प्रमुख अतिरिक्त वाहन को किसी अन्य अधिकारी को उसके दायित्व की आवश्यकता के अनुसार आवंटित कर सकेंगे. किराए पर ली गई गाडिय़ों की संख्या कम करने के साथ ही दोहरी जिम्मेदारी वाले अधिकारियों के पास भी एक ही वाहन हो यह सुनिश्चित करने का दायित्व विभाग प्रमुखों का होगा.
वित्त विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अधिकारियों के लिए अनुबंध पर लिए गए किराए की गाडिय़ों के लिए गृह विभाग द्वारा तय वाहन शुल्क की वसूली कर शासकीय कोष में जमा कराई जाए. यदि कोई अफसर इन निदेर्शों का पालन नहीं करता है तो विभाग के आहरण एवं संवितरण अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि अतिरिक्त वाहन पर होने वाले किसी भी प्रकार के खर्च का भुगतान न करे. अभी तक कई विभागों में किराए के वाहनों के लिए अफसरों से कोई शुल्क ही नहीं लिए जाने की जानकारी वित्त विभाग को मिली है. राज्य सरकार के सभी विभागों के साथ यह व्यवस्था निगम-मंडल, स्वशासी संस्थाओं, निकाय और विश्वविद्यालयों में भी लागू होगी.
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