बसपा ने सपा के प्रदेश में छोड़ी तीन सीटें, दो उम्मीदवार की भी कर दिए घोषित
मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने अभी तक यह खुलासा नहीं किया है कि वे गठबंधन के तहत ही चुनाव मैदान में उतरेंगे, मगर बसपा ने सीटों का बंटवारा कर लिया है. बसपा ने प्रदेश की 29 में से 3 सीटें सपा के लिए छोड़ी है और शेष पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर ली है. बसपा ने दो उम्मीदवार भी घोषित कर दिए हैं. वहीं सपा अब तक भंग प्रदेश कार्यकारिणी को गठित नहीं कर पाई है.
उत्तरप्रदेश के बाद मध्यप्रदेश में भी बसपा और सपा गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, मगर प्रदेश में बसपा की सक्रियता ज्यादा नजर आ रही है, जबकि सपा चुनाव को लेकर निष्क्रिय है. बसपा ने प्रदेश में 29 लोकसभा सीटों में से 26 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला कर लिया है. शेष 3 सीटों टीकमगढ़, खजुराहो और बालाघाट सपा के लिए छोड़ दी है. इसके अलावा मुरैना और सतना में बसपा ने अपने प्रत्याशी भी घोषित कर दिए हैं. वहीं शेष सीटों पर वह प्रत्याशियों की तलाश कर रही है. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष डी.पी. चौधरी का कहना है कि हमने 26 स्थानों पर उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनाई है. इसके अलावा 3 सीटें सपा के लिए छोड़ी है. शेष सीटों पर लगातार हम उम्मीदवारों के नामों पर विचार कर रहे हैं, जल्द ही नामों की घोषणा करेंगे. उन्होंने कहा कि सपा के साथ गठबंधन को लेकर जो भी फैसला होगा वह बसपा प्रमुख मायावती ही तय करेंगी. दूसरी ओर सपा ने विधानसभा चुनाव के बाद भंग की प्रदेश कार्यकारिणी को अब तक गठित ही नहीं किया है. प्रदेश अध्यक्ष से लेकर जिला और ब्लाक अध्यक्ष तक न होने से सपा का नेटवर्क ही नजर नहीं आ रहा है. सपा के नेता भी इस बात को लेकर अब चिंतित होने लगे हैं कि चुनाव के लिए आचार संहिता ही लग जाएगी, मगर प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं होगा. अगर ऐसा होता है कि सपा का आधार और जमीनी पकड़ जो भी प्रदेश में थी वह और कमजोर हो जाएगी.
संकट में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी
मध्यप्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर विधानसभा चुनाव लड़ चुकी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के लिए अब बसपा और सपा के बने नए गठजोड़ ने संकट खड़ा कर दिया है. गोंगपा से अब तक सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के लिए कोई संपर्क नहीं किया है. इसके चलते गोंगपा के पदाधिकारी अब कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के नेताओं से संपर्क बढ़ा रहे हैं, मगर उन्हें सफलता हासिल नहीं हो पा रही है. गोंगपा को भरोसा था कि सपा के साथ मिलकर वह चुनाव मैदान में उतरेगी, मगर इस बार उसे सपा से गठबंधन की उम्मीद नहीं है. इसके चलते गोंगपा नेता चिंतित हो रहे हैं.
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