राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा मध्यप्रदेश के देवास जिले में 10-12 सक्रिय कृषि सखी द्वारा जिला पंचायत के ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व सहायता समूहों की महिलाओं के घर जगह अनुसार पूरक पोषण आहर की सब्जियों की बाड़ी लगाने को प्रशिक्षण सह मार्गदर्शन कर उसके महत्व के बारे समूहों की बैठक के साथ इसके बारे में भी जानकारी देती है.
प्रशिक्षण में मौसमानुसार पालक, मैथी, बैंगन, भिंडी, टमाटर तथा बेल वाली सब्जियां गिलखी, करेला, सेम आदि को लगाने के लिए प्रेरित करती है, जिससे की उन्हें घर पर ही बारह माह शुध्द सब्जियां मिल सके, क्योंकि इसमें गौमूत्र, छाछ, मिर्ची, नीम, धतुरा की पत्ती, गौबर आदि का काड़ा बनाकर जैविक दवाई तैयार करती है, जिससे कि उनकी सब्जियों पर मौसमानुसार होने वाले कीट प्रकोप से भी रोकथाम हो सकें. साथ ही घर परिवार को शुद्ध ताजी हरी सब्जियां प्राप्त हो सके, जिससे उनकी सब्जियों पर होने वाले मासिक व्यय की बचत होगी. तथा स्वास्थ्य लाभ भी होने लगेगा. आजीविका मिशन का मुख्य उद्देश्य गरीब अति गरीब परिवार की महिलाओं को समूहों में जोड़ना तथा उन्हें छोटी-छोटी साप्ताहिक बचत कर आर्थिक रूप से सामाजिक रूप से सम्पन्न बनाने के साथ स्वास्थ्य में क्षेत्र में भी जैविक आजीविका पोषण वाटिका बनाकर उन्हें स्वस्थ्य लाभ पहुचाना है. देवास जिला प्रबंधक पंकजसिंह ठाकुर ने बताया कि जिले में जैविक आजीविका पोषण वाटिका कृषि सखी के माध्यम से बनवाकर ग्रामीण आजीविका मिशन के समूहों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है, पोषण वाटिका सात क्यारियों के रूप में तकनीकी रूप से इस प्रकार तैयार की जाती है, कि प्रतिदिवस महिलाओं को अलग-अलग प्रकार की सब्जियॉ खाने को मिल सके. उद्देश्य वर्ष भर सब्जियां मिले सके यह रहता है, लेकिन पानी की कमी के कारण हमारा यह कार्य थोड़ अवरूद्ध अवश्य होता है, जिले अभी तक हमारे उद्यानिकी विभाग से समन्वय कर सब्जी मीनिकीट उपलब्ध करवाये गये है एवं कृषि सखी द्वारा जिले में 1591 पोषण वाटिकाएं तैयार की जा चुकी है.

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