गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

झाड़-फूंक के सहारे मृत पिता को जिंदा करने की कोशिश कर रहे आईपीएस

झाड़-फूंक अंधविश्वास आज इक्कीसवीं सदी में भी जारी है. अंधविश्वास के आगोश में अशिक्षित लोगों से ज्यादा शिक्षित लोग समाते जा रहे हैं. इसका उदाहरण मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में देखा गया. यहां एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अपने मृत पिता को एक माह से झाड़-फूंक और आयुर्वेद के सहारे जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं. जबकि चिकित्सकों ने अधिकारियों को उनके पिता को मृत घोषित कर मृत्यु प्रमाण पत्र भी सौंप दिया है.
राजधानी भोपाल में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजेन्द्र कुमार मिश्रा अपने पिता के प्रेम में अंधविश्वास में ऐसे डूबे कि वे एक माह से लाश को अपने घर में रखकर पिता को झाड़-फूंक और आयुर्वेद के सहारे जीवित करना चाह रहे हैं. मामला तब सामने आया जब उनके यहां पदस्थ दो पुलिसकर्मियों जो पिता की सेवा में लगे थे, उनकी तबीयत खराब हुई और पड़ौसियों को बदबू आई. 
यह है मामला
पुलिस मुख्यालय में एडीजी पद पर पदस्थ राजेन्द्र कुमार मिश्रा ने अपने 84 वर्षीय पिता कालमनि मिश्रा को तबीयत खराब होने पर 13 जनवरी को बंसल चिकित्सालय में भर्ती कराया था. यहां पर इलाज के दौरान उनकी मौत हुई और 14 जनवरी को डाक्टरों ने मृत्यु प्रमाण पत्र देकर उन्हें मृत बता दिया. इसके बाद मिश्रा अपने पिता को पुलिस के शव वाहन से घर लाए, तब कुछ मृत शरीर में उन्हें हलचल महसूस हुई. इसके बाद उन्होंने उनका अंतिम संस्कार कराने के बजाय घर पर वेंटीलेटर बुलाया और शव को उस पर रख दिया. इसके बाद आयुर्वेद और झाड़-फूंक के सहारे वे अपने पिता को जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं.
ऐसे हुआ खुलासा
आईपीएस अधिकारी मिश्रा के  बंगले पर ड्यूटी करने वाले एसएएफ के दो सुरक्षा कर्मी उनकी देखरेख में लगे थे. दोनों बीमार हो गए तब मामले की हकीकत सामने आई. उन दोनों जवानों ने साथियों को बताया कि बंगले पर आयुर्वेदिक डॉक्टरों के साथ दूर-दराज से तांत्रिक भी झाड़-फूंक करने आ रहे हैं. इस बीच पड़ौस में रहने वालों ने बदबू आने की भी शिकायतें की. इसके बाद इस बात का खुलासा हुआ, मगर मिश्रा यह बताते रहे कि उनके पिता की स्थिति गंभीर है. उनका इलाज वे घर पर करा रहे हैं. जबकि अस्पताल प्रबंधन यह साफ कर चुका है कि मिश्रा के पिता का निधन हो गया है.

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