मध्यप्रदेश के एडीजी राजेन्द्र कुमार मिश्रा के पिता के निधन की खबरों का मामला अब और गर्माता नजर आ रहा है. मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नरेन्द्र कुमार जैन के निर्देश पर अभी पुलिस मुख्यालय इस मामले की रिपोर्ट भी नहीं बना पाया था कि एडीजी की मां ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को एक शिकायत कर दी है. इस शिकायत में उन्होंने जैन द्वारा पद के दुरुपयोग किए जाने की बात कही है. उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र रुप से जांच कराई जाए.
मानवाधिकार आयोग ने एडीजी के पिता कुलामणि मिश्रा के निधन को लेकर भोपाल पुलिस से रिपोर्ट मांगी है. एडीजी की मां का कहना है कि यह उनके धार्मिक और व्यक्तिगत पारिवारिक जीवन में दखल है. कुछ मीडिया रिपोर्ट में एक निजी अस्पताल के हवाले से कहा गया है कि एडीजी के पिता का निधन हो चुका है. एडीजी और उनके परिवार का दावा है कि उनके पिता जीवित है और समाधि में हैं. इस संबंध में एडीजी के परिवार ने मप्र हाईकोर्ट में भी एक अलग याचिका दायर की है.
एडीजी की मां ने लिखा है कि जैन लगातार उनके पारिवारिक मामलों में दखल दे रहे हैं, जिससे उन्हें और उनके परिवार को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने लिखा है कि वह अपनी पति की देखभाल प्रकृतिक तरीके से कर रही हैं. उन्होंने शिकायत में लिखा है कि उन्हें लगातार फर्जी खबरों के आधार पर परेशान किया जा रहा है. उन्होंने लिखा है कि एलोपैथी का इलाज उनके पति का उपचार करने में आसफल रहा है, जिसके बाद उनका पति का इलाज 15 फरवरी से वैध द्वारा किया जा रहा है. हमारे लिए ये काफी हैरानी की बात है कि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष द्वारा एक ऐसी टीम को जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं जो मेरे पति का इलाज करने में असमर्थ है. उन्होंने मांग करते हुए कहा है इस पूरे मामले की एक स्वतंत्र जांच कराई जाए.
मानवाधिकार आयोग ने एडीजी के पिता कुलामणि मिश्रा के निधन को लेकर भोपाल पुलिस से रिपोर्ट मांगी है. एडीजी की मां का कहना है कि यह उनके धार्मिक और व्यक्तिगत पारिवारिक जीवन में दखल है. कुछ मीडिया रिपोर्ट में एक निजी अस्पताल के हवाले से कहा गया है कि एडीजी के पिता का निधन हो चुका है. एडीजी और उनके परिवार का दावा है कि उनके पिता जीवित है और समाधि में हैं. इस संबंध में एडीजी के परिवार ने मप्र हाईकोर्ट में भी एक अलग याचिका दायर की है.
एडीजी की मां ने लिखा है कि जैन लगातार उनके पारिवारिक मामलों में दखल दे रहे हैं, जिससे उन्हें और उनके परिवार को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने लिखा है कि वह अपनी पति की देखभाल प्रकृतिक तरीके से कर रही हैं. उन्होंने शिकायत में लिखा है कि उन्हें लगातार फर्जी खबरों के आधार पर परेशान किया जा रहा है. उन्होंने लिखा है कि एलोपैथी का इलाज उनके पति का उपचार करने में आसफल रहा है, जिसके बाद उनका पति का इलाज 15 फरवरी से वैध द्वारा किया जा रहा है. हमारे लिए ये काफी हैरानी की बात है कि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष द्वारा एक ऐसी टीम को जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं जो मेरे पति का इलाज करने में असमर्थ है. उन्होंने मांग करते हुए कहा है इस पूरे मामले की एक स्वतंत्र जांच कराई जाए.

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