मध्यप्रदेश गौसेवक संघ गौसेवकों की पंचायत स्तर पर नियुक्ति, निश्चित मानदेय और एबीएफओ की भर्ती में गौसेवकों को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग को लेकर 26 फरवरी को मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे. संघ के अध्यक्ष राजेश धौलपुरे ने बताया कि 23 हजार गौसेवकों ने अपनी मांगों को लेकर सभी जिलों में 8 जनवरी से 13 जनवरी तक शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा लेकिन उनकी मांगों का निराकरण नहीं हुआ. गौसेवक सरकार से अपनी मांग मनवाने के लिये अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं. 26 फरवरी को 23 हजार गौसेवक नीलम पार्क पर एकत्रित होकर मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करेंगे. जहां संघ के पदाधिकारी मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान को ज्ञापन देकर अपनी मांगों के संबंध में चर्चा करेंगे.
गौरतलब है कि संघ के सभी जिलाध्यक्षों ने 7 फरवरी को भोपाल में बैठक कर सरकार से मांगों का निराकरण करने का अल्टीमेटम दिया था, बावजूद इसके सरकार या विभाग की ओर से गौसेवकों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया. इस बात से दुखी होकर गौसेवकों ने 26 फरवरी को मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने का फैसला लिया है. संघ ने चेतावनी दी है कि उसके बाद भी सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो वे परिवार के साथ मिलकर राजधानी भोपाल में जल सत्याग्रह, भूख हड़ताल और विशाल आंदोलन कर अपनी मांगें मनवायेंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.
संघ के प्रवक्ता दिनेश धाकड़ ने बताया कि गौसेवक पशुपालन विभाग एवं सरकार की महत्वपूर्ण कड़ी हैं. पशुपालन विभाग के कृत्रिम गर्भाधान, प्राथमिक उपचार, टीकाकरण, बधियाकरण विभाग द्वारा चलाई जा रही सभी योजनाओं में ईमानदारी से काम करते हैं. गौसेवक गोकुल महोत्सव, कृषि महोत्सव, गोपाल पुरस्कार, नंदी शाला योजना, मुर्रा पाड़ा योजना में भी किसानों को जागरूक कर रहे हैं, बावजूद इसके उनको नियमित नहीं किया जा रहा है.
गौरतलब है कि संघ के सभी जिलाध्यक्षों ने 7 फरवरी को भोपाल में बैठक कर सरकार से मांगों का निराकरण करने का अल्टीमेटम दिया था, बावजूद इसके सरकार या विभाग की ओर से गौसेवकों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया. इस बात से दुखी होकर गौसेवकों ने 26 फरवरी को मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने का फैसला लिया है. संघ ने चेतावनी दी है कि उसके बाद भी सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो वे परिवार के साथ मिलकर राजधानी भोपाल में जल सत्याग्रह, भूख हड़ताल और विशाल आंदोलन कर अपनी मांगें मनवायेंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.
संघ के प्रवक्ता दिनेश धाकड़ ने बताया कि गौसेवक पशुपालन विभाग एवं सरकार की महत्वपूर्ण कड़ी हैं. पशुपालन विभाग के कृत्रिम गर्भाधान, प्राथमिक उपचार, टीकाकरण, बधियाकरण विभाग द्वारा चलाई जा रही सभी योजनाओं में ईमानदारी से काम करते हैं. गौसेवक गोकुल महोत्सव, कृषि महोत्सव, गोपाल पुरस्कार, नंदी शाला योजना, मुर्रा पाड़ा योजना में भी किसानों को जागरूक कर रहे हैं, बावजूद इसके उनको नियमित नहीं किया जा रहा है.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें