राज्य विधानसभा में पटल पर रखे गए आर्थिक सर्वेक्षण पटल पर रखा गया. आर्थिक एवं सांख्यिकी संचनालय, मध्यप्रदेश द्वारा जारी किये गए इस सर्वेक्षण में बेरोजगार युवाओं के साथ बड़ा धोका किया गया है. इसमें जानकारी छुपाने के उद्देश्य से वर्ष 2017 का बेरोजगारी से सम्बंधित डाटा जारी नहीं किया गया है. जबकि हमेशा इस सर्वेक्षण में पिछले वर्ष की बेरोजगारी से सम्बंधित जानकारी जैसे रोजगार कार्यालय में कुल पंजीकृत लोगों की संख्या, जितने लोगों को नौकरी मिली उनकी संख्या आदि होता है. इससे एक कदम बढ़ते हुए डाटा में हेरा फेरी कर दी गयी है, ताकि युवाओं को भ्रमित किया जा सके. निम्न जानकारी बदल दी गयी है.
* 2016-17 के सर्वेक्षण में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 13.01 लाख थी जिसे बदलकर (कम करके) 11.23 लाख कर दिया गया है.* 2016-17 के सर्वेक्षण में वर्ष 2015 एवं 2016 में अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या क्रमश: 30 और 11 थी, जिसे 2017-18 के सर्वेक्षण में बढ़ाकर क्रमश: 88 और 19 कर दिया गया है.
* 2016-17 के सर्वेक्षण में वर्ष 2015 एवं 2016 में अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या क्रमश: 04 और 03 थी, जिसे 2017-18 के सर्वेक्षण में बढ़ाकर क्रमश: 10 और 32 कर दिया गया है.
साथ ही इसमें से कुछ जानकारी जानबूझकर हटा दी गयी है
* परिशष्ट 6 जिसमें सार्वजानिक उपक्रम में नौकरियों के सम्बन्ध में जानकारी होती है.
* रोजगार कार्यालय के माध्यम से कितनी महिलाओं को नौकरी मिली उनकी संख्या.
स्पष्ट तौर पर यह मानवीय त्रुटि नहीं है, बल्कि जानबूझकर गलत जानकारी दी गयी है, ताकि बेरोजगारी की असलियत जनता के सामने नहीं आ सके. चूंकि यह सर्वेक्षण बजट का आधार होता है इसलिए बेरोजगार सेना मांग करती है कि सरकार बजट पेश करने से पहले इस पर अपनी सफाई दे और 2017 के बेरोजगारी संबधी आंकड़ों को जारी करे.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें