मध्यप्रदेश के सीहोर जिले की बुधनी तहसील के मट्ठागांव के लगभग तीन एकड़ सिंचित भूमि के कृषक तरूण कुमार अपने खेत मे उत्पादन बढ़ाने के लिए विगत कई वर्षों से रासायनिक खाद का उपयोग कर रहे थे. तरुण ने महसूस किया कि उनकी जमीन की प्राकृतिक उर्वरता कम हो रही है, रासायनिक खाद की थोड़ी भी कमी उत्पादन पर प्रतिकूल असर डाल रही है. साथ ही कृषि अपशिष्ट के इधर-उधर पड़े रहने से खेत मे कचरा बढ़ रहा है. ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ने उन्है शासन की जैविक खेती योजना के बारे मे विस्तार से जानकारी देते हुए वर्मीकम्पोस्ट निर्माण के लिए प्रेरित किया. तरूण ने अपने खेत मे वर्मीकम्पोस्ट निर्माण इकाई की स्थापना की इसमें शासन द्वारा 30 हजार रुपए का अनुदान भी प्राप्त किया. उन्होंने अपने खेत का पूरा कृषि अपशिष्ट एवं गोबर एकत्रित कर वर्मीकम्पोस्ट पिट मे डालकर प्रति दो से तीन माह मे अच्छी गुणवत्ता की केंचुआ खाद प्राप्त की. तरूण ने इसे अपने खेत मे उपयोग कर मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाई वहीं अतिशेष खाद को पैकिट बनाकर अन्य कृषकों को बेचा जिससे प्रति तिमाही 8 से 10 हजार रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त की है. तरूण सभी कृषकों से आग्रह करते हैं कि वे भी अपने खेत मे वर्मी कम्पोस्ट स्थापित कर जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ अतिरिक्त आय प्राप्त करें.गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018
वर्मीकम्पोस्ट से खेती की उर्वरता के साथ बढ़ाई आय
मध्यप्रदेश के सीहोर जिले की बुधनी तहसील के मट्ठागांव के लगभग तीन एकड़ सिंचित भूमि के कृषक तरूण कुमार अपने खेत मे उत्पादन बढ़ाने के लिए विगत कई वर्षों से रासायनिक खाद का उपयोग कर रहे थे. तरुण ने महसूस किया कि उनकी जमीन की प्राकृतिक उर्वरता कम हो रही है, रासायनिक खाद की थोड़ी भी कमी उत्पादन पर प्रतिकूल असर डाल रही है. साथ ही कृषि अपशिष्ट के इधर-उधर पड़े रहने से खेत मे कचरा बढ़ रहा है. ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ने उन्है शासन की जैविक खेती योजना के बारे मे विस्तार से जानकारी देते हुए वर्मीकम्पोस्ट निर्माण के लिए प्रेरित किया. तरूण ने अपने खेत मे वर्मीकम्पोस्ट निर्माण इकाई की स्थापना की इसमें शासन द्वारा 30 हजार रुपए का अनुदान भी प्राप्त किया. उन्होंने अपने खेत का पूरा कृषि अपशिष्ट एवं गोबर एकत्रित कर वर्मीकम्पोस्ट पिट मे डालकर प्रति दो से तीन माह मे अच्छी गुणवत्ता की केंचुआ खाद प्राप्त की. तरूण ने इसे अपने खेत मे उपयोग कर मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाई वहीं अतिशेष खाद को पैकिट बनाकर अन्य कृषकों को बेचा जिससे प्रति तिमाही 8 से 10 हजार रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त की है. तरूण सभी कृषकों से आग्रह करते हैं कि वे भी अपने खेत मे वर्मी कम्पोस्ट स्थापित कर जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ अतिरिक्त आय प्राप्त करें.
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