मध्यप्रदेश के उमरिया जिले की प्राकृतिक सौदर्य, सांस्कृतिक गतिविधियां एवं आदिवासी कलाकृतियां तो पूरे देश में प्रसि़द्ध हैं. साथ ही जिला मुख्यालय उमरिया नगर की दीवारें जीवंतता प्रदान कर रही है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 1 मार्च 2017 को उमरिया जिले के भ्रमण के दौरान जिला मुख्यालय में इन कलाकृतियों का अवलोकन किया था. आपने कहा कि दीवारें जिले की सांस्कृतिक विरासत का इन कलाकृतियों से ही अंदाज लगाया जा सकता है.
जिला मुख्यालय में प्रवेश करते ही शहर के सार्वजनिक भवनों की दीवारो, बाउण्ड्रीवाल की दीवालो, स्टेडियम आदि में उकेरी गई आदिवासी कला भित्त अपनी ओर आकर्षित करती है. वहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति इस आदिवासी अंचलो की आदिवासी लोक कला का अंदाज लगा सकता है. आदिवासी कला भित्तचित्र बनाने में जनगण सिंह श्याम जो गोंडी पेटिंग के जनक कहे जाते हैं, जिनका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम है और उनकी बनाई हुई कलाकृति संसद भवन को आज भी शोभायमान कर रही हैं. डिण्डौरी जिले के ग्राम पाटनगढ़ के उनके वंशजों ने उमरिया के सार्वजनिक दीवारों में कलाकृतियां जीवंत किया, जिसका अवलोकन विदेशी सैलानी भी कर रहे हैं. उमरिया जिलें की इन कलाकृतियों के निर्माण का संयोजन स्थानीय कलाकार दीपम दर्दवंशी ने करके नगर का गौरव बढ़ाया है और स्वयं उनका साथ दिया.
स्थानीय स्कूलों मे पढ़ने वाले बच्चो तथा जिले के आदिवासी लोक कलाकारों द्वारा अपनी कल्पना को भित्त चित्रों मे उकेरा गया है. इस कार्य में जिला प्रशासन द्वारा जिले में स्कूल स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन कर इन कलाकारो का चिन्हांकन किया गया. इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण देकर उनकी प्रतिभा को निखारा गया. तब उनके नन्हें हाथों में आवश्यक सामग्री थमाकर इस कार्य को अंजान तक पहुँचाया गया. जिले की 65वर्षीय जुधइया बाई जो विभिन्न राष्ट्रीय मंचों पर आदिवासी कला एवं संस्कृति की पेन्टिंग में पुरस्कृत हो चुकी हैं वे भी पेन्टिंग के कार्य में पुरी तनमयता के साथ जुटी हैं साथ ही अन्य कलाकारो को भी अपना अनुभव बांट रही हैं.
बैगा एवं आदिवासी समाज के जाने माने कलाकारों द्वारा नगर के जयस्तंभ चौक से लेकर कोर्ट तिराहा तक सडक के दोनों किनारों की बाउण्ड्रीबाल में आदिवासी कला एवं संस्कृति की जीवंतता प्रदान की जा रही है. दीवारों में रेखांकित करने वाले पाटनगढ डिण्डौरी तथा उमरिया जिले के विभिन्न ग्रामों के कलाकार अपनी प्रतिभाओं को गोडी एवं बैगा मैकल पेन्टिंग से नगरवासियों को आकर्शित कर रहे हैं. अस्पताल से लेकर स्टेडियम, पुराना रेस्टहाउस,कलेक्टर बंगला, सामुदायिक भवन, की दीवारो में बनाये गये पशुपक्षी,जानवर, आदिवासी संस्कृति, कला,एवं पेड पौधे आने जाने वालों के लिए आकर्षित तो कर ही रहे हैं वहीं साफ सफाई, एवं सुन्दरता की छटा भी बिखेर रहे है.
जिला मुख्यालय में प्रवेश करते ही शहर के सार्वजनिक भवनों की दीवारो, बाउण्ड्रीवाल की दीवालो, स्टेडियम आदि में उकेरी गई आदिवासी कला भित्त अपनी ओर आकर्षित करती है. वहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति इस आदिवासी अंचलो की आदिवासी लोक कला का अंदाज लगा सकता है. आदिवासी कला भित्तचित्र बनाने में जनगण सिंह श्याम जो गोंडी पेटिंग के जनक कहे जाते हैं, जिनका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम है और उनकी बनाई हुई कलाकृति संसद भवन को आज भी शोभायमान कर रही हैं. डिण्डौरी जिले के ग्राम पाटनगढ़ के उनके वंशजों ने उमरिया के सार्वजनिक दीवारों में कलाकृतियां जीवंत किया, जिसका अवलोकन विदेशी सैलानी भी कर रहे हैं. उमरिया जिलें की इन कलाकृतियों के निर्माण का संयोजन स्थानीय कलाकार दीपम दर्दवंशी ने करके नगर का गौरव बढ़ाया है और स्वयं उनका साथ दिया.
स्थानीय स्कूलों मे पढ़ने वाले बच्चो तथा जिले के आदिवासी लोक कलाकारों द्वारा अपनी कल्पना को भित्त चित्रों मे उकेरा गया है. इस कार्य में जिला प्रशासन द्वारा जिले में स्कूल स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन कर इन कलाकारो का चिन्हांकन किया गया. इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण देकर उनकी प्रतिभा को निखारा गया. तब उनके नन्हें हाथों में आवश्यक सामग्री थमाकर इस कार्य को अंजान तक पहुँचाया गया. जिले की 65वर्षीय जुधइया बाई जो विभिन्न राष्ट्रीय मंचों पर आदिवासी कला एवं संस्कृति की पेन्टिंग में पुरस्कृत हो चुकी हैं वे भी पेन्टिंग के कार्य में पुरी तनमयता के साथ जुटी हैं साथ ही अन्य कलाकारो को भी अपना अनुभव बांट रही हैं.
बैगा एवं आदिवासी समाज के जाने माने कलाकारों द्वारा नगर के जयस्तंभ चौक से लेकर कोर्ट तिराहा तक सडक के दोनों किनारों की बाउण्ड्रीबाल में आदिवासी कला एवं संस्कृति की जीवंतता प्रदान की जा रही है. दीवारों में रेखांकित करने वाले पाटनगढ डिण्डौरी तथा उमरिया जिले के विभिन्न ग्रामों के कलाकार अपनी प्रतिभाओं को गोडी एवं बैगा मैकल पेन्टिंग से नगरवासियों को आकर्शित कर रहे हैं. अस्पताल से लेकर स्टेडियम, पुराना रेस्टहाउस,कलेक्टर बंगला, सामुदायिक भवन, की दीवारो में बनाये गये पशुपक्षी,जानवर, आदिवासी संस्कृति, कला,एवं पेड पौधे आने जाने वालों के लिए आकर्षित तो कर ही रहे हैं वहीं साफ सफाई, एवं सुन्दरता की छटा भी बिखेर रहे है.

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