विश्व जल दिवस 22 मार्च के अवसर पर जिले में जलाभिषेक अभियान के तहत जल संरक्षण के कार्य आरंभ किए जाएंगे. यह जानकारी मध्यप्रदेश के रायसेन जिला कलेक्टर भावना वालिम्बे ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित टीएल बैठक के दौरान दी. जल संरक्षण के कार्यो के लिए उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे प्राचीन जल संरचनाओं तथा नवीन जल संरचनाओं की आवश्यकता के तकनीकी प्रस्ताव 10 मार्च तक भिजवाना सुनिश्चित करें ताकि प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर जल संरक्षण के कार्यो को शीघ्र प्रारंभ किया जा सके.
कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण के लिए पुराने कुए, बावड़ी तथा अन्य प्राचीन जल स्त्रोतों की सफाई एवं जीर्णोद्धार का कार्य किया जा सकता है. नवीन जल संरचनाओं की आवश्यकता प्रतीत होने पर उसे प्रस्तावित कर गूगल शीट पर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि आज भी हमारी प्राचीन जल संरचनाएं जल के स्थाई स्त्रोत है, जो रखरखाव एवं उपयोग नहीं होने के कारण नष्ट हो गए हैं.उन्हें पुर्नजीवित करने की आवश्यकता है. उन्होंने जल के महत्व को बताते हुए लोगों को प्रेरित कर जलाभिषेक अभियान से जोड़ने की भी बात कही. उन्होंने जिले के लोगों को इस अभियान से जोड़ने के लिए डिस्ट्रिक्ट एनआईसी के पोर्टल पर जल दूत के रूप में आॅनलाईन पंजीयन की व्यवस्था करने के निर्देश जिला सूचना अधिकारी को दिए.
बैठक में यह जानकारी दी गई कि एक मार्च को बेगमगंज जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में जिला अधिकारियों द्वारा भ्रमण किया जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को सरकारी योजनाओं का फीडबेक, गांव की समस्याओं तथा उनके निराकरण के संबंध में उसी दिन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए कहा है. आगामी 14 मार्च को जिले में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा. उन्होंने ग्राम सभाओं में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के शेष रह गए हितग्राहियों की सूची का वाचन करने के भी निर्देश दिए हैं. उन्होंने सभी अधिकारियो को 14 मार्च को होने वाली विशेष ग्राम सभाओं के संबंध में अपने विभागों की आवश्यक जानकारी तैयार रखने के निर्देश दिए.
आधी-अधूरी जानकारी देने पर जताई नाराजगी
बैठक के दौरान कलेक्टर वालिम्बे ने आधी-अधूरी दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह देखा गया है कि जिला अधिकारियों को भोपाल या संभाग स्तर पर बैठक होने पर वे अपने प्रतिनिधि को टीएल बैठक में भेजते हैं, जिन्हें विभागीय गतिविधियों तथा टीएल पत्रों पर चल रही कार्यवाही की पूर्ण जानकारी नहीं होती है. उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जब वे संभाग या राज्य स्तरीय बैठक में जाएं तो बैठक में ऐसे अधिकारी को भेजें जिसे सम्पूर्ण जानकारी हो. कलेक्टर वालिम्बे ने टीएल बैठक के दौरान कहा कि अंर्तविभागीय कार्यो के लिए केवल पत्राचार पर्याप्त नहीं है. कार्य में गति लाने के लिए अधिकारी स्वयं भी व्यक्तिगत सम्पर्क कर अपने विभागों के कार्य को गति प्रदान करें. उन्होंने कहा कि समन्वित रूप से कार्य करने पर ही जल्दी और बेहतर काम होगा.
कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण के लिए पुराने कुए, बावड़ी तथा अन्य प्राचीन जल स्त्रोतों की सफाई एवं जीर्णोद्धार का कार्य किया जा सकता है. नवीन जल संरचनाओं की आवश्यकता प्रतीत होने पर उसे प्रस्तावित कर गूगल शीट पर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि आज भी हमारी प्राचीन जल संरचनाएं जल के स्थाई स्त्रोत है, जो रखरखाव एवं उपयोग नहीं होने के कारण नष्ट हो गए हैं.उन्हें पुर्नजीवित करने की आवश्यकता है. उन्होंने जल के महत्व को बताते हुए लोगों को प्रेरित कर जलाभिषेक अभियान से जोड़ने की भी बात कही. उन्होंने जिले के लोगों को इस अभियान से जोड़ने के लिए डिस्ट्रिक्ट एनआईसी के पोर्टल पर जल दूत के रूप में आॅनलाईन पंजीयन की व्यवस्था करने के निर्देश जिला सूचना अधिकारी को दिए.
बैठक में यह जानकारी दी गई कि एक मार्च को बेगमगंज जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में जिला अधिकारियों द्वारा भ्रमण किया जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को सरकारी योजनाओं का फीडबेक, गांव की समस्याओं तथा उनके निराकरण के संबंध में उसी दिन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए कहा है. आगामी 14 मार्च को जिले में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा. उन्होंने ग्राम सभाओं में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के शेष रह गए हितग्राहियों की सूची का वाचन करने के भी निर्देश दिए हैं. उन्होंने सभी अधिकारियो को 14 मार्च को होने वाली विशेष ग्राम सभाओं के संबंध में अपने विभागों की आवश्यक जानकारी तैयार रखने के निर्देश दिए.
आधी-अधूरी जानकारी देने पर जताई नाराजगी
बैठक के दौरान कलेक्टर वालिम्बे ने आधी-अधूरी दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह देखा गया है कि जिला अधिकारियों को भोपाल या संभाग स्तर पर बैठक होने पर वे अपने प्रतिनिधि को टीएल बैठक में भेजते हैं, जिन्हें विभागीय गतिविधियों तथा टीएल पत्रों पर चल रही कार्यवाही की पूर्ण जानकारी नहीं होती है. उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जब वे संभाग या राज्य स्तरीय बैठक में जाएं तो बैठक में ऐसे अधिकारी को भेजें जिसे सम्पूर्ण जानकारी हो. कलेक्टर वालिम्बे ने टीएल बैठक के दौरान कहा कि अंर्तविभागीय कार्यो के लिए केवल पत्राचार पर्याप्त नहीं है. कार्य में गति लाने के लिए अधिकारी स्वयं भी व्यक्तिगत सम्पर्क कर अपने विभागों के कार्य को गति प्रदान करें. उन्होंने कहा कि समन्वित रूप से कार्य करने पर ही जल्दी और बेहतर काम होगा.

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