मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन ने दिल्ली के मुख्य सचिव पर निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री की उपस्थिति में किए गए हमले और धमकी देने की कड़े शब्दों में निंदा की है. एसोसिएशन ने दिल्ली की वर्तमान सरकार को बर्खास्त करने और तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है.
एसोसिएशन ने अपनी बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा कि दिल्ली के मुख्य सचिव पर किए गए हमले और दुर्व्यवहार को मुख्यमंत्री सहित उपस्थितों द्वारा रोकने की कोशिश न करना और उन्हें हमले से न बचाना यह बताता है कि यह उपस्थितों की सहमति से पूर्व नियोजित षड़यंत्र के अंतर्गत हुआ है. एसोसिएशन ने कहा है कि यह मुख्य सचिव को अवैधानिक कार्य करने के लिए दबाव में लाने का कृत्य है. एसोसिएशन ने कहा कि मुख्य सचिव पर देश के उच्चतम न्यायालय के निदेर्शों के उल्लंघन करने के लिए दबाव डाला जा रहा था, जिसे करने से उन्होंने इंकार कर दिया. दिल्ली की निर्वाचित सरकार का यह कृत्य आपराधिक क्रिया की श्रेणी में आता है, जो भारतीय दण्ड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दण्डनीय है. एसोसिएशन ने मुख्य सचिव पर हमला करने वाले व्यक्तियों और सभी उपस्थित लोगों, जिन्होंने यह कृत्य करने के लिए हमलावरों को उकसाया, के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की मांग भी की है.
एसोसिएशन ने निंदा प्रस्ताव पारित किया. प्रस्ताव में कहा कि संविधान विधि-सम्मत कानून के अंतर्गत प्रशासन का अधिकार देता है. निष्पक्ष और स्वतंत्र लोक-सेवक भारतीय संविधान के अभिन्न और आधारभूत भाग हैं. एसोसिएशन ने कहा कि मुख्य सचिव पर हमला और उन्हें धमकाने की यह घटना स्पष्ट बताती है कि दिल्ली की राज्य सरकार प्रशासन के संवैधानिक दायित्वों के पालन को पूरी तरह नाकाम करने पर अमादा है. एसोसिएशन ने लोक-सेवा के मुखिया पर किसी राजनैतिक पार्टी के फायदे के लिए दबाव डालने को संविधान के अनुच्छेद-356 के प्रावधानों के विरुद्ध भी बताया है.
एसोसिएशन ने अपनी बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा कि दिल्ली के मुख्य सचिव पर किए गए हमले और दुर्व्यवहार को मुख्यमंत्री सहित उपस्थितों द्वारा रोकने की कोशिश न करना और उन्हें हमले से न बचाना यह बताता है कि यह उपस्थितों की सहमति से पूर्व नियोजित षड़यंत्र के अंतर्गत हुआ है. एसोसिएशन ने कहा है कि यह मुख्य सचिव को अवैधानिक कार्य करने के लिए दबाव में लाने का कृत्य है. एसोसिएशन ने कहा कि मुख्य सचिव पर देश के उच्चतम न्यायालय के निदेर्शों के उल्लंघन करने के लिए दबाव डाला जा रहा था, जिसे करने से उन्होंने इंकार कर दिया. दिल्ली की निर्वाचित सरकार का यह कृत्य आपराधिक क्रिया की श्रेणी में आता है, जो भारतीय दण्ड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दण्डनीय है. एसोसिएशन ने मुख्य सचिव पर हमला करने वाले व्यक्तियों और सभी उपस्थित लोगों, जिन्होंने यह कृत्य करने के लिए हमलावरों को उकसाया, के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की मांग भी की है.
एसोसिएशन ने निंदा प्रस्ताव पारित किया. प्रस्ताव में कहा कि संविधान विधि-सम्मत कानून के अंतर्गत प्रशासन का अधिकार देता है. निष्पक्ष और स्वतंत्र लोक-सेवक भारतीय संविधान के अभिन्न और आधारभूत भाग हैं. एसोसिएशन ने कहा कि मुख्य सचिव पर हमला और उन्हें धमकाने की यह घटना स्पष्ट बताती है कि दिल्ली की राज्य सरकार प्रशासन के संवैधानिक दायित्वों के पालन को पूरी तरह नाकाम करने पर अमादा है. एसोसिएशन ने लोक-सेवा के मुखिया पर किसी राजनैतिक पार्टी के फायदे के लिए दबाव डालने को संविधान के अनुच्छेद-356 के प्रावधानों के विरुद्ध भी बताया है.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें