मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने वन्य प्राणी अपराधों से संबंधित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये न्यायाधीशों को दिये जाने वाले यूनिट में संशोधन किया है.अब वन अपराध प्रकरणों के निराकरण के लिये संबंधित न्यायाधीश को 3 के स्थान पर 4 और वन्य प्राणी अपराध प्रकरण के निराकरण पर 3 के स्थान पर 6 यूनिट मिलेंगे.इससे वन्य प्राणी अपराध प्रकरणों का जल्दी निराकरण होगा.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) जितेन्द्र अग्रवाल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय दंड संहिता के तहत प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये न्यायधीशों को यूनिट (अंक) देने का प्रावधान है.उच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न प्रकार के अपराधिक प्रकरणों के निराकरण पर जज को दो से 16 अंक तक देने का प्रावधान है.अभी तक वन और वन्य प्राणी अपराध निराकरण करने पर जज को 3-3 यूनिट मिलती थीं.वन विभाग द्वारा की गई पहल से अब वन अपराध निराकरण होने पर 3 के स्थान पर 4 और वन्य प्राणी अपराध प्रकरण का निराकरण होने पर दोगुने अर्थात् 6 यूनिट प्राप्त होंगे. अग्रवाल ने बताया कि प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये वन विभाग ने उच्च न्यायालय से इसकी अनुशंसा की थी.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) जितेन्द्र अग्रवाल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय दंड संहिता के तहत प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये न्यायधीशों को यूनिट (अंक) देने का प्रावधान है.उच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न प्रकार के अपराधिक प्रकरणों के निराकरण पर जज को दो से 16 अंक तक देने का प्रावधान है.अभी तक वन और वन्य प्राणी अपराध निराकरण करने पर जज को 3-3 यूनिट मिलती थीं.वन विभाग द्वारा की गई पहल से अब वन अपराध निराकरण होने पर 3 के स्थान पर 4 और वन्य प्राणी अपराध प्रकरण का निराकरण होने पर दोगुने अर्थात् 6 यूनिट प्राप्त होंगे. अग्रवाल ने बताया कि प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये वन विभाग ने उच्च न्यायालय से इसकी अनुशंसा की थी.




























